नई दिल्ली | ABC NATIONAL NEWS | 27 जुलाई 2026
सोशल मीडिया पर ‘Gadkari is next’ की मुहिम तेज
NEET आंदोलन के दबाव में धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद अब सोशल मीडिया और विपक्ष के निशाने पर केंद्र सरकार की E20 पेट्रोल नीति आ गई है। केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी को लेकर सोशल मीडिया पर ‘Gadkari is next’ जैसे मीम और पोस्ट तेजी से फैल रहे हैं। इसी बीच आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने E20 के खिलाफ राष्ट्रीय अभियान छेड़ने का ऐलान कर दिया है। उन्होंने चेतावनी दी है कि सरकार समय रहते इस मुद्दे का समाधान करे, वरना यह भी बड़े जनआंदोलन में बदल सकता है।
केजरीवाल बोले—युवाओं ने सरकार झुकाई, E20 पर भी फैसला करे केंद्र
केजरीवाल ने कहा कि जिस तरह युवाओं के आंदोलन के बाद सरकार को धर्मेंद्र प्रधान के मामले में पीछे हटना पड़ा, उसी तरह E20 को लेकर बढ़ रही नाराजगी को भी सरकार हल्के में न ले। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से इस मामले में हस्तक्षेप की मांग की है।
केजरीवाल ने शनिवार, 1 अगस्त को दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में ‘नेशनल टाउन हॉल’ आयोजित करने की घोषणा की है। इसमें विशेषज्ञों, वाहन मालिकों और आम लोगों के साथ E20 पेट्रोल के प्रभाव पर चर्चा की जाएगी। दिल्ली-NCR के लोग इसमें सीधे शामिल हो सकेंगे, जबकि देश के दूसरे हिस्सों के लोगों को ऑनलाइन जोड़ने की योजना है।
केजरीवाल का दावा है कि उनकी पार्टी की ऑनलाइन मुहिम में दो लाख से अधिक पत्र मिल चुके हैं। उन्होंने कहा है कि वे अगले सप्ताह इन पत्रों को प्रधानमंत्री तक पहुंचाएंगे।
आखिर E20 पर इतना गुस्सा क्यों?
E20 का अर्थ ऐसा पेट्रोल है जिसमें 20% एथेनॉल और 80% पेट्रोल होता है। सरकार का तर्क है कि इससे भारत की कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम होती है, प्रदूषण घटाने में मदद मिलती है और गन्ना, मक्का तथा अन्य कृषि उत्पादों से एथेनॉल बनाने के कारण किसानों को भी फायदा होता है।
लेकिन विरोध करने वालों के सवाल अलग हैं। उनका कहना है कि खासकर पुराने वाहनों में E20 के इस्तेमाल से इंजन और दूसरे पुर्जों पर असर पड़ने की आशंका है। इसके साथ ईंधन की माइलेज में कमी और एथेनॉल उत्पादन के लिए अधिक पानी की जरूरत जैसे मुद्दे भी उठाए जा रहे हैं। सरकार वाहन खराब होने के व्यापक दावों से इनकार करती रही है, हालांकि ईंधन दक्षता में कुछ कमी की संभावना स्वीकार की गई है।
‘अब E20 के वक्त मिलेंगे’—सोशल मीडिया पर नई लहर
CJP का 36 दिन लंबा आंदोलन खत्म होने के बाद सोशल मीडिया पर E20 को लेकर अभियान अचानक तेज हुआ है। जंतर-मंतर छोड़ते समय कुछ युवा प्रदर्शनकारियों के बीच “अब E20 के वक्त मिलेंगे” जैसी टिप्पणियां भी सामने आईं। हालांकि CJP नेतृत्व ने अभी E20 को लेकर किसी नए आंदोलन की औपचारिक घोषणा नहीं की है।
इसी बीच सोशल मीडिया पर ‘E20 Janta Party’ नाम से सक्रिय अकाउंट भी चर्चा में हैं। इससे जुड़े लोगों का कहना है कि यह कोई राजनीतिक दल नहीं, बल्कि नागरिकों का स्वतंत्र अभियान है जिसका मकसद E20 के वास्तविक प्रभाव, उपभोक्ता अधिकार और नीति में पारदर्शिता पर बहस कराना है।
विरोध करने वाले कुछ समूहों की मांग है कि बाजार में बिना एथेनॉल वाला पेट्रोल उचित कीमत पर उपलब्ध कराया जाए, E10 का विकल्प जारी रहे और यदि E20 से माइलेज कम होती है तो उसकी कीमत में उपभोक्ताओं को राहत दी जाए।
सड़क से संसद तक आंदोलन की तैयारी
E20 के खिलाफ विरोध अब केवल सोशल मीडिया तक सीमित नहीं दिख रहा। राजनीतिक कार्यकर्ता तहसीन पूनावाला की ओर से 31 जुलाई को दिल्ली में मार्च की बात सामने आई है। वहीं ‘E20 Janta Party’ नाम इस्तेमाल करने वाले एक सोशल मीडिया अकाउंट ने 4 अगस्त को संसद मार्च का ऐलान किया है, जिसमें टैक्सी, टूरिस्ट और कमर्शियल वाहन मालिकों को जोड़ने की बात कही गई है।
कांग्रेस भी E20 नीति पर सवाल उठा चुकी है। विपक्ष का आरोप है कि सरकार को इस नीति के उपभोक्ताओं और पुराने वाहनों पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर ज्यादा पारदर्शिता दिखानी चाहिए।
गडकरी भी पलटवार को तैयार, मामला अदालत पहुंचा
इस राजनीतिक और सोशल मीडिया हमले के बीच नितिन गडकरी ने भी कानूनी मोर्चा खोलने की तैयारी कर ली है। बॉम्बे हाई कोर्ट ने उन्हें Meta, X Corp, Google और अन्य प्लेटफॉर्म के खिलाफ कथित मानहानिकारक पोस्ट तथा AI से बनाए गए डीपफेक कंटेंट को लेकर दीवानी मुकदमा दायर करने की अनुमति दी है।
गडकरी की आपत्ति खास तौर पर उन पोस्ट और वीडियो को लेकर है जिनमें कथित रूप से उन्हें और उनके परिवार को एथेनॉल नीति से आर्थिक लाभ होने से जोड़ा गया है। अदालत की अनुमति के बाद वे ऐसे कंटेंट के खिलाफ अंतरिम राहत और अस्थायी रोक की मांग कर सकते हैं।
यहां राजनीतिक विरोध और कथित गलत सूचना के बीच अंतर भी महत्वपूर्ण है। सरकारी नीति की आलोचना लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन किसी व्यक्ति के बारे में अपुष्ट आरोप या डीपफेक सामग्री फैलाना अलग कानूनी सवाल पैदा करता है।
प्रधान के बाद क्या E20 बनेगा अगला बड़ा जनमुद्दा?
यही सबसे बड़ा राजनीतिक सवाल है। NEET आंदोलन ने दिखाया कि सोशल मीडिया से निकला युवा असंतोष बहुत तेजी से सड़क और फिर सत्ता के दरवाजे तक पहुंच सकता है। अब E20 को लेकर भी वैसा ही माहौल बनाने की कोशिश दिखाई दे रही है।
लेकिन दोनों मुद्दों में बड़ा अंतर है। NEET विवाद सीधे छात्रों और परीक्षा व्यवस्था से जुड़ा था, जबकि E20 करोड़ों वाहन मालिकों, किसानों, तेल आयात, पर्यावरण और ऊर्जा सुरक्षा से जुड़ी जटिल नीति है। इसलिए यहां सरकार और विरोधियों—दोनों के दावों की वैज्ञानिक और तथ्यात्मक जांच महत्वपूर्ण होगी।
फिर भी राजनीतिक संकेत साफ हैं। धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे से उत्साहित विपक्ष अब E20 को सरकार के खिलाफ अगले बड़े जनमुद्दे में बदलने की कोशिश कर रहा है। केजरीवाल ने मोर्चा खोल दिया है, सोशल मीडिया पर गडकरी निशाने पर हैं और सड़क पर प्रदर्शन की तारीखें सामने आने लगी हैं। अब सवाल है—सरकार E20 पर लोगों की शंकाएं दूर करेगी या यह मुद्दा भी एक नए आंदोलन की जमीन तैयार करेगा?




