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सावधान! आपकी रसोई में मौजूद ये आम चीजें गलत तरीके से खाने पर बन सकती हैं ‘जहर’

स्वास्थ्य | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 27 जुलाई 2026

हमारी रसोई को आमतौर पर घर की सबसे सुरक्षित जगह माना जाता है। सब्जियां, फल, दालें, मसाले और मेवे हमारी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा हैं। लेकिन प्रकृति में मिलने वाली हर चीज हर अवस्था में खाने योग्य हो, यह जरूरी नहीं। कई सामान्य खाद्य पदार्थों में ऐसे प्राकृतिक रसायन पाए जाते हैं जो पौधों की अपनी सुरक्षा व्यवस्था का हिस्सा होते हैं। सामान्य परिस्थितियों में इनसे डरने की जरूरत नहीं है, क्योंकि सही तरीके से पकाने, भिगोने, छीलने या उचित मात्रा में खाने पर जोखिम बहुत कम हो जाता है। समस्या तब पैदा हो सकती है जब कुछ खाद्य पदार्थ कच्चे, अधपके, खराब अवस्था में या असामान्य रूप से अधिक मात्रा में खाए जाएं। इसलिए डरने के बजाय यह जानना ज्यादा जरूरी है कि किन चीजों के साथ थोड़ी अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए। क्योंकि आलू से लेकर काजू, जायफल और फलों के बीज तक—रोजमर्रा की कई चीजों में प्राकृतिक विषैले तत्व पाए जाते हैं, लेकिन सही तैयारी और सामान्य मात्रा में सेवन से अधिकांश खाद्य पदार्थ सुरक्षित रहते हैं।

कसावा: गलत तैयारी से पैदा हो सकता है सायनाइड का खतरा

कसावा दुनिया के कई हिस्सों में करोड़ों लोगों का प्रमुख भोजन है। लेकिन इसकी कुछ किस्मों में ऐसे प्राकृतिक cyanogenic compounds पाए जाते हैं जिनसे शरीर में सायनाइड बन सकता है। इसका अर्थ यह नहीं कि कसावा अपने आप में खाने लायक नहीं है। दुनिया के अनेक देशों में इसे सुरक्षित रूप से खाया जाता है, लेकिन इसकी सही processing बेहद महत्वपूर्ण है। किस्म के अनुसार छीलना, भिगोना, कद्दूकस करना, fermentation और अच्छी तरह पकाना जैसे पारंपरिक तरीके विषैले तत्वों को कम करने में मदद करते हैं। खासकर bitter cassava को बिना उचित processing के खाना खतरनाक हो सकता है। इसलिए कसावा के मामले में केवल ऊपर-ऊपर पकाना या बिना जानकारी के कच्चा खाना सही नहीं है।

हरा या अंकुरित आलू: रंग बदलना केवल दिखावट की समस्या नहीं

आलू यदि लंबे समय तक रोशनी में पड़ा रहे तो उसका कुछ हिस्सा हरा हो सकता है और उसमें अंकुर निकल सकते हैं। हरा रंग स्वयं जहर नहीं है, लेकिन यह संकेत हो सकता है कि आलू में glycoalkaloids, विशेषकर solanine और chaconine, का स्तर बढ़ा है। इनकी अधिक मात्रा से मतली, उल्टी, पेट दर्द, दस्त और अन्य गंभीर लक्षण हो सकते हैं। यदि आलू बहुत ज्यादा हरा, कड़वा, क्षतिग्रस्त या अत्यधिक अंकुरित हो गया है तो उसे खाना उचित नहीं है। आलू को ठंडी, सूखी और अंधेरी जगह रखना बेहतर है। केवल यह मान लेना भी सही नहीं कि हर हरे आलू को थोड़ा पकाकर पूरी तरह सुरक्षित बनाया जा सकता है।

राजमा: अधपका खाना पड़ सकता है भारी

भारतीय रसोई में राजमा बेहद लोकप्रिय है, लेकिन कच्चे या ठीक से न पके kidney beans में phytohaemagglutinin नामक lectin अपेक्षाकृत अधिक मात्रा में पाया जा सकता है। पर्याप्त मात्रा में कच्चा या अधपका राजमा खाने से तेज मतली, उल्टी, पेट दर्द और दस्त जैसी समस्याएं हो सकती हैं। यही कारण है कि सूखे राजमा को अच्छी तरह भिगोकर और फिर पर्याप्त तापमान पर पूरी तरह पकाकर खाना चाहिए। यहां एक महत्वपूर्ण बात यह है कि धीमी आंच पर अधूरा पकाना पर्याप्त नहीं माना जाना चाहिए। अच्छी तरह उबालकर पूरी तरह पकाया हुआ राजमा सामान्य भोजन के रूप में सुरक्षित है। यानी समस्या राजमा नहीं, उसकी गलत तैयारी है।

सेब के बीज और कुछ फलों की गुठलियां: घबराएं नहीं, लेकिन जानना जरूरी

सेब के बीज और खुबानी, आड़ू तथा चेरी जैसे कुछ फलों की गुठलियों के भीतर cyanogenic compounds मौजूद हो सकते हैं। शरीर में इनके टूटने पर सायनाइड बन सकता है। हालांकि गलती से सेब के एक-दो बीज निगल जाने पर आमतौर पर घबराने की जरूरत नहीं होती, क्योंकि साबुत बीज कई बार बिना टूटे पाचन तंत्र से निकल जाते हैं और इतनी छोटी मात्रा सामान्यतः गंभीर विषाक्तता पैदा नहीं करती। लेकिन जानबूझकर बड़ी मात्रा में बीजों या गुठलियों के अंदर मौजूद kernels को पीसकर या चबाकर खाना सुरक्षित आदत नहीं है। खासकर बच्चों के मामले में अतिरिक्त सावधानी जरूरी है।

स्टारफ्रूट: किडनी की बीमारी वाले लोगों के लिए विशेष चेतावनी

स्टारफ्रूट यानी कमरख सामान्य स्वस्थ व्यक्ति के लिए अलग बात है, लेकिन गंभीर kidney disease वाले लोगों के लिए यह जोखिम पैदा कर सकता है। इसमें caramboxin नामक neurotoxin सहित ऐसे पदार्थ पाए जाते हैं जिन्हें स्वस्थ किडनी सामान्यतः शरीर से बाहर निकालने में मदद करती है। जब किडनी ठीक से काम नहीं करती तो ये पदार्थ शरीर में जमा हो सकते हैं और हिचकी, भ्रम, बेचैनी, दौरे तथा गंभीर neurological complications तक पैदा कर सकते हैं। इसलिए chronic kidney disease या dialysis वाले लोगों को स्टारफ्रूट से बचने की सलाह दी जाती है। किडनी की बीमारी से जूझ रहे व्यक्ति को अपनी डाइट डॉक्टर या योग्य dietitian से तय करनी चाहिए।

कच्चा काजू: दुकान में मिलने वाला ‘Raw Cashew’ वास्तव में वैसा कच्चा नहीं होता

काजू को लेकर अक्सर यह दावा किया जाता है कि “कच्चा काजू जहरीला होता है।” इसमें थोड़ी सच्चाई है, लेकिन बात को सही संदर्भ में समझना जरूरी है। काजू के खोल और उससे जुड़े हिस्सों में urushiol जैसे irritant compounds पाए जा सकते हैं, जो poison ivy से जुड़े compounds के समान परिवार के हैं और त्वचा पर गंभीर प्रतिक्रिया पैदा कर सकते हैं। लेकिन बाजार में ‘raw cashews’ के नाम से बिकने वाले काजू आमतौर पर processing से गुजर चुके होते हैं ताकि खोल और संबंधित irritants हटाए जा सकें। इसलिए पैकेट में मिलने वाले सामान्य काजू को poison ivy जैसा खतरा समझना गलत होगा। असली सावधानी बिना processed किए सीधे cashew shell या उसके आसपास के पदार्थों से संपर्क के मामले में जरूरी है।

आम के छिलके से कुछ लोगों को हो सकती है एलर्जी

आम दुनिया के सबसे लोकप्रिय फलों में है और सामान्यतः पूरी तरह सुरक्षित है। लेकिन आम के छिलके और पौधे के sap में urushiol से संबंधित compounds हो सकते हैं। जो लोग poison ivy जैसे पौधों के प्रति अत्यधिक संवेदनशील हैं, उनमें आम के छिलके के संपर्क से खुजली, लालिमा या dermatitis जैसी प्रतिक्रिया हो सकती है। इसका मतलब यह नहीं कि आम जहरीला फल है। अधिकांश लोग बिना किसी समस्या के आम खाते हैं। लेकिन यदि किसी व्यक्ति को आम छीलने या उसके छिलके के संपर्क के बाद बार-बार त्वचा की प्रतिक्रिया होती है तो उसे सावधानी बरतनी चाहिए और जरूरत पड़ने पर चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए।

जायफल: मसाला है, लेकिन बहुत ज्यादा मात्रा सुरक्षित नहीं

रसोई में इस्तेमाल होने वाला जायफल सामान्य पाक मात्रा में सुरक्षित माना जाता है। लेकिन अत्यधिक मात्रा में इसका सेवन गंभीर समस्या पैदा कर सकता है। जायफल में myristicin सहित कई सक्रिय compounds पाए जाते हैं और बहुत अधिक मात्रा लेने पर मतली, चक्कर, बेचैनी, भ्रम, hallucinations, तेज धड़कन और अन्य neurological symptoms हो सकते हैं। इसलिए सोशल मीडिया पर किसी भी मसाले को बड़ी मात्रा में खाने की चुनौती या घरेलू नुस्खे के नाम पर असामान्य मात्रा लेना खतरनाक हो सकता है। मसाले भोजन का स्वाद बढ़ाने के लिए हैं—दवा या नशे के विकल्प के रूप में उनका प्रयोग नहीं किया जाना चाहिए।

रूबार्ब: डंठल और पत्तियों में फर्क समझना जरूरी

Rhubarb के डंठल कई देशों में खाद्य पदार्थ के रूप में इस्तेमाल किए जाते हैं, लेकिन इसके पत्तों को खाने योग्य नहीं माना जाता। पत्तियों में oxalic acid और अन्य compounds की मात्रा अधिक हो सकती है, जो बड़ी मात्रा में शरीर के लिए हानिकारक हो सकते हैं। इसलिए जहां rhubarb भोजन में इस्तेमाल किया जाता है, वहां सामान्यतः उसका stalk इस्तेमाल किया जाता है, पत्तियां नहीं। यहां भी सामान्य नियम वही है—किसी पौधे का एक हिस्सा खाने योग्य है तो इसका अर्थ यह नहीं कि पूरा पौधा खाने योग्य होगा।

एल्डरबेरी: फल और पौधे के दूसरे हिस्से एक जैसे नहीं

Elderberry से बने processed खाद्य पदार्थ और उत्पाद कई जगह इस्तेमाल किए जाते हैं, लेकिन कच्ची या अधपकी elderberries तथा पौधे के कुछ अन्य हिस्सों में cyanogenic glycosides हो सकते हैं। इनसे मतली, उल्टी और दस्त जैसी परेशानी हो सकती है। इसलिए इन्हें सही तरीके से तैयार और पकाकर ही इस्तेमाल करना चाहिए। यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि इंटरनेट पर मिलने वाले घरेलू नुस्खों के आधार पर किसी अपरिचित जंगली पौधे या berry को खाना जोखिम भरा हो सकता है, क्योंकि कई जहरीली berries खाने योग्य berries जैसी दिखाई देती हैं।

फुगु: एक ऐसी डिश जिसकी तैयारी विशेषज्ञ के हाथ में ही सुरक्षित

जापान की प्रसिद्ध pufferfish dish ‘Fugu’ इस सूची का सबसे असामान्य उदाहरण है। Pufferfish के कुछ अंगों में tetrodotoxin नामक अत्यंत शक्तिशाली neurotoxin हो सकता है। यह toxin शरीर की नसों और मांसपेशियों के सामान्य काम को बाधित कर सकता है और गंभीर poisoning में सांस लेने की क्षमता तक प्रभावित हो सकती है। इसी कारण जापान सहित कई जगह इसकी तैयारी और बिक्री पर कड़े नियम लागू हैं और विशेष प्रशिक्षण प्राप्त विशेषज्ञ ही इसे तैयार करते हैं। इसे घर पर प्रयोग करने वाली सामान्य seafood recipe समझना बेहद खतरनाक होगा।

सबसे जरूरी बात: भोजन से डरना नहीं, उसे समझना है

इन उदाहरणों को पढ़कर यह निष्कर्ष निकालना गलत होगा कि हमारी रसोई जहरीली चीजों से भरी हुई है। प्रकृति में अनेक खाद्य पौधों में अपनी रक्षा के लिए प्राकृतिक compounds होते हैं और मनुष्य ने हजारों वर्षों में उन्हें सुरक्षित तरीके से तैयार करना सीखा है। आलू, राजमा, काजू, आम और जायफल जैसे खाद्य पदार्थ दुनिया भर में करोड़ों लोग सुरक्षित रूप से खाते हैं। खतरा मुख्यतः गलत पहचान, गलत preparation, अत्यधिक मात्रा या किसी विशेष बीमारी की स्थिति में पैदा होता है। इसलिए सोशल मीडिया पर “ये 10 चीजें जहर हैं” जैसी सनसनीखेज सूचियों से डरने के बजाय सही जानकारी पर भरोसा करना चाहिए। रसोई में सुरक्षा का सबसे सरल मंत्र है—खाद्य पदार्थ की सही पहचान करें, उसे उचित तरीके से तैयार और पकाएं, खराब या संदिग्ध भोजन न खाएं और किसी बीमारी की स्थिति में डॉक्टर की आहार संबंधी सलाह को प्राथमिकता दें।

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