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छात्रों पर पेलेट गन किसके आदेश पर चली? राहुल गांधी ने अमित शाह से मांगा हिसाब, मोदी से माफी की मांग

ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 26 जुलाई 2026

जंतर-मंतर पर छात्रों के आंदोलन ने धर्मेंद्र प्रधान की कुर्सी तो ले ली, लेकिन सरकार की मुश्किलें अभी खत्म होती नहीं दिख रही हैं। अब सवाल सीधे गृह मंत्रालय और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह तक पहुंच गया है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने अमित शाह को पत्र लिखकर प्रदर्शनकारी छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई को ‘बर्बर’ करार दिया है और पूछा है कि देश के युवाओं के खिलाफ पेलेट गन जैसे घातक हथियार इस्तेमाल करने का आदेश आखिर किसने दिया? क्या गृह मंत्री को इसकी जानकारी थी और क्या इतनी कठोर कार्रवाई उनकी मंजूरी से हुई? राहुल गांधी ने जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से छात्रों से माफी मांगने की मांग भी की है।

राहुल गांधी ने अपने पत्र में सबसे गंभीर सवाल पेलेट गन के कथित इस्तेमाल को लेकर उठाया है। उनका कहना है कि शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने आए छात्रों के खिलाफ इस स्तर का बल प्रयोग लोकतांत्रिक व्यवस्था में बेहद गंभीर मामला है। जिन युवाओं का भविष्य पेपर लीक और परीक्षा व्यवस्था की खामियों से प्रभावित हुआ, उन्हीं युवाओं को जब जवाब मांगने के लिए सड़क पर उतरना पड़ा तो उनके सामने पुलिस बल खड़ा कर दिया गया। अब विपक्ष पूछ रहा है कि लाठीचार्ज और पेलेट गन के इस्तेमाल की जवाबदेही किसकी है। केवल यह कह देना पर्याप्त नहीं होगा कि हालात नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने कार्रवाई की; सरकार को बताना होगा कि आदेश कहां से आया और इतनी कठोर कार्रवाई की जरूरत क्यों पड़ी।

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद इस सवाल की धार और तेज हो गई है। पेपर लीक और परीक्षा व्यवस्था को लेकर देशभर में उठे छात्र आक्रोश के बीच प्रधान को शिक्षा मंत्रालय छोड़ना पड़ा और अब प्रह्लाद जोशी ने मंत्रालय संभाल लिया है। लेकिन चेहरा बदल जाने से जंतर-मंतर पर जो कुछ हुआ, उससे जुड़े सवाल खत्म नहीं हो जाते। एक मंत्री की राजनीतिक जवाबदेही तय हो गई, अब पुलिस कार्रवाई की प्रशासनिक और राजनीतिक जवाबदेही तय करने की मांग उठ रही है। यही वह मोर्चा है जिस पर विपक्ष सरकार को संसद के भीतर घेरने की तैयारी कर रहा है।

राहुल गांधी ने सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से छात्रों से माफी मांगने की मांग करके इस विवाद को केवल दिल्ली पुलिस या गृह मंत्रालय तक सीमित नहीं रहने दिया है। विपक्ष का तर्क है कि यदि देश की राजधानी में अपने भविष्य और निष्पक्ष परीक्षा के लिए आवाज उठा रहे युवाओं के खिलाफ इस तरह बल प्रयोग हुआ है तो सरकार के शीर्ष नेतृत्व को जवाब देना चाहिए। सवाल इसलिए भी बड़ा है क्योंकि यही सरकार लगातार युवाओं को विकसित भारत का निर्माता बताती रही है। ऐसे में विपक्ष पूछ रहा है कि यदि युवा वास्तव में विकसित भारत के निर्माता हैं तो उनकी शिकायत सुनने के बजाय उनके आंदोलन से निपटने के लिए कठोर पुलिस कार्रवाई क्यों की गई?

जंतर-मंतर की लड़ाई अब एक नए चरण में प्रवेश कर चुकी है। पहले सवाल था—पेपर किसने लीक किया और शिक्षा मंत्री जिम्मेदारी कब लेंगे? धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद अब सवाल है—छात्रों पर बल प्रयोग किसके आदेश पर हुआ और उसका जिम्मेदार कौन है? सत्ता के लिए यह दूसरा सवाल पहले से अधिक असहज हो सकता है, क्योंकि इसका जवाब केवल मंत्री बदलकर नहीं दिया जा सकता।

राहुल गांधी के पत्र ने इस मामले को सीधे अमित शाह के सामने रख दिया है। अब गृह मंत्रालय के सामने सवाल हैं—क्या पेलेट गन के इस्तेमाल की अनुमति दी गई थी? यदि दी गई तो किसने दी? यदि नहीं दी गई तो इसका इस्तेमाल कैसे हुआ? लाठीचार्ज और अन्य कठोर कार्रवाई के लिए कौन जिम्मेदार था? और क्या उन अधिकारियों के खिलाफ जांच या कार्रवाई होगी? लोकतंत्र में पुलिस की ताकत कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए होती है, असहमति को कुचलने के लिए नहीं—और यही कसौटी अब सरकार के सामने रखी जा रही है।

धर्मेंद्र प्रधान की विदाई से सरकार ने पेपर लीक आंदोलन के एक बड़े राजनीतिक दबाव को जरूर कम करने की कोशिश की है, लेकिन जंतर-मंतर की तस्वीरें और पुलिस कार्रवाई से जुड़े सवाल इतनी आसानी से पीछे छूटने वाले नहीं हैं। प्रधान की कुर्सी जा चुकी है, लेकिन अब सवाल अमित शाह के दरवाजे पर खड़ा है—छात्रों पर पेलेट गन किसके आदेश पर चली? देश जवाब चाहता है।

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