राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 25 जुलाई 2026
NEET समेत विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक और अनियमितताओं को लेकर देशभर में जारी विवाद के बीच केंद्र सरकार ने परीक्षा प्रणाली में गड़बड़ी करने वालों के खिलाफ कानून को और कठोर बनाने की तैयारी कर ली है। सरकार ने Public Examinations (Prevention of Unfair Means) Amendment Bill, 2026 प्रस्तावित किया है। विधेयक की प्रति शनिवार को संसद सदस्यों के बीच वितरित की गई और इसे सोमवार, 27 जुलाई को संसद में पेश किए जाने की संभावना है।
प्रस्तावित संशोधन का मुख्य उद्देश्य पेपर लीक, संगठित नकल और परीक्षा प्रक्रिया से छेड़छाड़ जैसे अपराधों पर मौजूदा कानून की पकड़ मजबूत करना है। नए प्रावधानों में व्यक्तिगत अपराधियों के साथ परीक्षा संबंधी गड़बड़ियों में शामिल संस्थागत अपराधियों के लिए भी अधिकतम कारावास की अवधि बढ़ाने और आर्थिक दंड में भारी वृद्धि का प्रस्ताव है।
यह कदम ऐसे समय सामने आया है जब NEET-UG परीक्षा में अनियमितताओं और पेपर लीक के मुद्दे ने सरकार पर जबरदस्त दबाव बनाया है। दिल्ली के जंतर-मंतर से शुरू हुए विरोध ने देश के कई हिस्सों में छात्र आंदोलन का रूप लिया और अंततः केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने शनिवार को अपना इस्तीफा प्रधानमंत्री को भेज दिया।
मौजूदा Public Examinations (Prevention of Unfair Means) Act, 2024 सार्वजनिक परीक्षाओं में अनुचित साधनों और संगठित गड़बड़ियों को रोकने के उद्देश्य से बनाया गया था। लेकिन हाल के पेपर लीक प्रकरणों के बाद सवाल उठने लगे कि क्या मौजूदा कानून परीक्षा माफिया और संगठित नेटवर्क को रोकने के लिए पर्याप्त है। इसी पृष्ठभूमि में सरकार अब दंडात्मक प्रावधानों को और कठोर करने जा रही है।
प्रस्तावित विधेयक का राजनीतिक महत्व भी कम नहीं है। सरकार एक ओर शिक्षा मंत्री के इस्तीफे के जरिए राजनीतिक जवाबदेही के सवाल का सामना कर रही है, वहीं दूसरी ओर कानून में बदलाव के जरिए यह संदेश देने की कोशिश कर रही है कि भविष्य में पेपर लीक और परीक्षा व्यवस्था से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ अधिक कठोर कार्रवाई होगी।
हालांकि असली परीक्षा कानून पारित होने के बाद शुरू होगी। केवल सजा और जुर्माना बढ़ाने से समस्या खत्म होगी या नहीं, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि परीक्षा केंद्रों से लेकर प्रश्नपत्र तैयार करने, डिजिटल सुरक्षा, परिवहन और एजेंसियों की जवाबदेही तक पूरी व्यवस्था में कितनी पारदर्शिता लाई जाती है।
देश के लाखों प्रतियोगी छात्रों के लिए सवाल केवल दोषियों को सजा देने का नहीं, बल्कि यह भरोसा वापस पाने का है कि उनकी वर्षों की मेहनत किसी पेपर लीक, संगठित गिरोह या प्रशासनिक लापरवाही की भेंट नहीं चढ़ेगी। अब सरकार के सामने चुनौती कानून को कठोर बनाने से आगे बढ़कर परीक्षा व्यवस्था को भरोसेमंद बनाने की है।




