राष्ट्रीय | आलोक रंजन | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 25 जुलाई 2026
20 जुलाई के ‘संसद चलो’ मार्च के दौरान पैलेट गन के कथित इस्तेमाल को लेकर विवाद शुक्रवार को और तेज हो गया। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी एक घायल युवक को मीडिया के सामने लेकर आए और उसके शरीर पर मौजूद चोटों को कैमरे पर दिखाते हुए आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे युवाओं पर पैलेट गन का इस्तेमाल किया गया।
राहुल गांधी ने दावा किया कि उनके साथ मौजूद युवक की एक आंख की रोशनी चली गई है। उन्होंने कहा कि जिस समय युवक घायल हुआ, वह हाथ में भारतीय तिरंगा लेकर प्रदर्शन कर रहा था।
राहुल ने सरकार के पैलेट गन इस्तेमाल नहीं होने के दावे पर सवाल उठाते हुए कहा, “पैलेट गन तब चलाई गई, जब मेरा यह भाई हाथ में तिरंगा लेकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहा था। उसकी आंख को नुकसान पहुंचा है, उसकी रोशनी चली गई है।”
‘पेपर लीक हुआ, इसलिए सड़क पर उतरा था युवा’
राहुल गांधी के मुताबिक, घायल युवक पुलिस भर्ती परीक्षा की तैयारी कर रहा था। उसने मेहनत से परीक्षा की तैयारी की, लेकिन बाद में उसे पता चला कि पेपर लीक हो गया है। इसी के विरोध में वह प्रदर्शन में शामिल हुआ था।
राहुल ने कहा कि यह किसी एक छात्र की कहानी नहीं है। देश में लाखों युवा प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए वर्षों मेहनत करते हैं और उनके परिवार अपनी सीमित कमाई से उनकी पढ़ाई और तैयारी का खर्च उठाते हैं। ऐसे में पेपर लीक उनके लिए सिर्फ एक परीक्षा रद्द होने का मामला नहीं, बल्कि वर्षों की मेहनत और भविष्य से जुड़ा सवाल है।
राहुल ने रखीं तीन मांगें
राहुल गांधी ने इस मामले में तीन प्रमुख मांगें सामने रखीं। उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को पद से हटाने, प्रदर्शनकारियों पर कथित तौर पर पैलेट और लाठियों का इस्तेमाल करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई तथा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से युवाओं से माफी मांगने की मांग की।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई करके देश के भविष्य पर हमला किया है।
मेडिकल रिपोर्टों ने बढ़ाए सवाल
पैलेट गन को लेकर विवाद इसलिए भी गंभीर होता जा रहा है क्योंकि कुछ घायलों की मेडिकल रिपोर्ट में ऐसी चोटों का उल्लेख सामने आया है।
हिंदुस्तान टाइम्स के मुताबिक, उसने 32 वर्षीय नूतन टोप्पो और प्रदर्शन में घायल 28 वर्षीय पत्रकार की मेडिको-लीगल रिपोर्ट देखी है। राम मनोहर लोहिया अस्पताल की रिपोर्ट में महिला की चोट को “suspected gunshot injury” बताया गया, जबकि सफदरजंग अस्पताल की रिपोर्ट में पत्रकार के शरीर पर “pellet injury marks” का उल्लेख है।
इससे पहले एक 28 वर्षीय स्पोर्ट्स पत्रकार ने दावा किया था कि उसके शरीर में अब भी 30 से अधिक पैलेट मौजूद हैं।
दिल्ली पुलिस का इनकार, CRPF कर रही सत्यापन
दूसरी ओर, दिल्ली पुलिस आधिकारिक रूप से पैलेट या रबर गन इस्तेमाल करने से इनकार कर चुकी है। हालांकि यह बात सामने आई है कि 20 जुलाई को दिल्ली पुलिस के साथ तैनात Rapid Action Force (RAF) के दंगा-रोधी उपकरणों में पैलेट गन शामिल होती है।
CRPF पहले कह चुकी है कि वह पैलेट गन के इस्तेमाल से संबंधित मीडिया रिपोर्टों का सत्यापन कर रही है। ऐसे में अब सवाल सिर्फ यह नहीं रह गया है कि प्रदर्शनकारियों को चोट कैसे लगी, बल्कि यह भी है कि यदि पैलेट चले तो किस बल ने चलाए और किसके आदेश पर उनका इस्तेमाल किया गया।
20 जुलाई की कार्रवाई पर बढ़ता राजनीतिक दबाव
CJP भी पुलिस कार्रवाई को लेकर जिम्मेदारी तय करने की मांग कर रही है। संगठन ने घोषणा की है कि वह तस्वीरों और वीडियो के आधार पर कथित रूप से अत्यधिक बल प्रयोग करने वाले पुलिसकर्मियों की पहचान करने का प्रयास करेगा और उनके खिलाफ शिकायत दर्ज कराएगा।
अब राहुल गांधी द्वारा घायल युवक को सीधे मीडिया के सामने लाने और मेडिकल रिपोर्टों में पैलेट जैसी चोटों के उल्लेख के बाद 20 जुलाई की घटनाओं को लेकर राजनीतिक दबाव और बढ़ गया है।
दिल्ली पुलिस के इनकार, CRPF की सत्यापन प्रक्रिया, अस्पतालों की मेडिकल रिपोर्ट और घायलों के दावों के बीच अब सबसे महत्वपूर्ण जरूरत एक निष्पक्ष जांच की है—ताकि यह साफ हो सके कि 20 जुलाई को वास्तव में क्या हुआ और प्रदर्शनकारियों को लगी इन चोटों के लिए कौन जिम्मेदार था।




