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Google पर EU के जुर्माने से भड़के ट्रंप, यूरोप पर भारी टैरिफ लगाने की धमकी

अंतरराष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | वॉशिंगटन | 25 जुलाई 2026

अमेरिका और यूरोपीय संघ के बीच पहले से मौजूद व्यापारिक तनाव अब अमेरिकी टेक कंपनियों पर लगाए जा रहे जुर्माने को लेकर नए टकराव में बदलता दिखाई दे रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को यूरोपीय संघ पर अमेरिकी टेक्नोलॉजी कंपनियों के साथ भेदभाव करने का आरोप लगाते हुए चेतावनी दी कि अमेरिका इसके जवाब में यूरोपीय संघ पर बड़ा टैरिफ लगा सकता है। ट्रंप का यह बयान Google पर यूरोप में एक और भारी जुर्माने की खबर के बाद आया। उन्होंने आरोप लगाया कि यूरोपीय संघ लगातार Google, Apple, Meta और Amazon जैसी बड़ी अमेरिकी कंपनियों को निशाना बना रहा है और अरबों डॉलर के जुर्माने के जरिए अमेरिकी कंपनियों तथा करदाताओं से पैसा वसूला जा रहा है। ट्रंप ने साफ कहा कि अमेरिका अब इसे स्वीकार नहीं करेगा और उनकी सरकार यूरोपीय संघ की इन कार्रवाइयों की जांच के लिए अमेरिकी व्यापार कानून के Section 301 के तहत तत्काल प्रक्रिया शुरू करेगी।

ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर बेहद कड़े शब्दों में यूरोपीय संघ पर हमला करते हुए कहा कि “United States of America is not a ‘PIGGYBANK’ for Europe”, यानी अमेरिका यूरोप के लिए कोई गुल्लक नहीं है। उन्होंने दावा किया कि Google पर यूरोपीय संघ अब तक कुल 18 अरब डॉलर से ज्यादा का जुर्माना लगा चुका है और हाल में कंपनी पर करीब एक अरब डॉलर का एक और दंड लगाया गया है। ट्रंप ने Apple, Meta और Amazon का भी उल्लेख करते हुए दावा किया कि Apple पर करीब 15 अरब डॉलर, Meta पर लगभग 3 अरब डॉलर और Amazon पर करीब 2.5 अरब डॉलर के जुर्माने लगाए गए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति ने इन कार्रवाइयों को “अवैध” और “अत्यधिक भेदभावपूर्ण” करार दिया और कहा कि उनकी सरकार अमेरिकी कंपनियों के खिलाफ इस तरह के व्यवहार को जारी नहीं रहने देगी।

ट्रंप ने इसके जवाब में Section 301 investigation शुरू करने की घोषणा की है। अमेरिका के Trade Act का Section 301 अमेरिकी प्रशासन को उन विदेशी व्यापार नीतियों और कार्रवाइयों की जांच करने का अधिकार देता है जिन्हें अमेरिका अनुचित, भेदभावपूर्ण या अमेरिकी व्यापारिक हितों को नुकसान पहुंचाने वाला मानता है। ऐसी जांच के बाद अमेरिकी सरकार संबंधित देश या व्यापारिक समूह के खिलाफ जवाबी व्यापारिक कदम उठा सकती है, जिनमें अतिरिक्त टैरिफ भी शामिल हो सकते हैं। इसलिए ट्रंप की घोषणा महज राजनीतिक बयान तक सीमित नहीं है; यदि प्रशासन औपचारिक जांच के बाद यूरोपीय संघ की कार्रवाई को अमेरिकी कंपनियों के खिलाफ अनुचित व्यवहार मानता है, तो मामला वास्तविक व्यापारिक प्रतिबंधों और नए शुल्क तक पहुंच सकता है।

ट्रंप ने यूरोपीय संघ को चेतावनी देते हुए कहा कि उसे अपनी कार्रवाई की “बहुत बड़ी कीमत” चुकानी पड़ेगी। उन्होंने यह संकेत भी दिया कि यूरोपीय संघ पर “substantial tariff” यानी भारी आयात शुल्क जल्द से जल्द लगाया जा सकता है। ट्रंप का कहना है कि यूरोपीय नियामकों द्वारा अमेरिकी कंपनियों पर लगाए गए जुर्माने को पूरी तरह पलटा जाना चाहिए। उनके मुताबिक, यूरोपीय संघ बार-बार बड़ी अमेरिकी कंपनियों को निशाना बना रहा है और मौजूदा अमेरिकी प्रशासन इस कथित भेदभाव को अब बर्दाश्त नहीं करेगा। उन्होंने अपने संदेश के अंत में “Stay tuned” लिखकर संकेत दिया कि आने वाले दिनों में इस मामले पर अमेरिकी प्रशासन की ओर से और कदम सामने आ सकते हैं।

इस विवाद की जड़ केवल Google पर लगाया गया ताजा जुर्माना नहीं है। यूरोपीय संघ पिछले कई वर्षों से दुनिया की बड़ी डिजिटल कंपनियों के बाजार व्यवहार, प्रतिस्पर्धा, डेटा और प्लेटफॉर्म शक्ति को लेकर कड़ा नियामक रुख अपनाता रहा है। Google, Apple, Meta और Amazon जैसी अमेरिकी कंपनियां यूरोपीय नियामकों की जांच और दंडात्मक कार्रवाइयों का सामना करती रही हैं। यूरोप इन कार्रवाइयों को अपने प्रतिस्पर्धा और डिजिटल बाजार नियमों को लागू करने का हिस्सा मानता है, जबकि ट्रंप प्रशासन का आरोप है कि व्यवहार में इसका सबसे बड़ा निशाना अमेरिकी कंपनियां बन रही हैं। यही मतभेद अब एक व्यापक अमेरिका-EU व्यापार विवाद में बदलने का खतरा पैदा कर रहा है।

ट्रंप की धमकी इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यदि यूरोपीय संघ पर अतिरिक्त अमेरिकी टैरिफ लगाया जाता है तो विवाद टेक सेक्टर की सीमा से निकलकर दोनों अर्थव्यवस्थाओं के व्यापक व्यापारिक रिश्तों को प्रभावित कर सकता है। यूरोपीय वस्तुओं पर नया अमेरिकी शुल्क लगने की स्थिति में यूरोपीय संघ भी जवाबी कार्रवाई पर विचार कर सकता है। इससे ऑटोमोबाइल, मशीनरी, फार्मास्यूटिकल्स, कृषि उत्पादों और दूसरे औद्योगिक क्षेत्रों तक तनाव फैलने का जोखिम रहेगा। अमेरिका और यूरोपीय संघ दुनिया के सबसे बड़े व्यापारिक साझेदारों में शामिल हैं, इसलिए इनके बीच शुल्क युद्ध का असर केवल दोनों पक्षों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि वैश्विक बाजार, निवेश और बहुराष्ट्रीय कंपनियों की रणनीतियों पर भी पड़ सकता है।

ट्रंप का यह रुख उनकी व्यापक व्यापार नीति से भी मेल खाता है, जिसमें टैरिफ को केवल आर्थिक सुरक्षा के साधन के रूप में नहीं बल्कि दूसरे देशों पर दबाव बनाने के औजार के रूप में भी इस्तेमाल किया जाता रहा है। उनके प्रशासन का तर्क है कि यदि कोई देश या व्यापारिक समूह अमेरिकी कंपनियों, उत्पादों या निर्यातकों के साथ भेदभाव करता है तो अमेरिका जवाबी शुल्क के जरिए अपने आर्थिक हितों की रक्षा करेगा। यूरोपीय संघ के खिलाफ Section 301 जांच की घोषणा इसी नीति का नया और महत्वपूर्ण विस्तार हो सकती है।

फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि Section 301 की जांच कितनी जल्दी आगे बढ़ती है और ट्रंप प्रशासन यूरोपीय संघ पर कितना टैरिफ लगाने का फैसला करता है। यदि अमेरिकी राष्ट्रपति अपनी चेतावनी को वास्तविक शुल्क में बदलते हैं और यूरोप जवाबी कदम उठाता है तो दुनिया की दो सबसे बड़ी आर्थिक शक्तियों के बीच नया व्यापारिक संघर्ष शुरू हो सकता है। Google पर जुर्माने से शुरू हुआ मौजूदा विवाद इसलिए अब केवल एक टेक कंपनी और यूरोपीय नियामकों की लड़ाई नहीं रह गया है; यह अमेरिका और यूरोप के बीच व्यापार, डिजिटल नियमन और आर्थिक संप्रभुता को लेकर एक बड़े टकराव की भूमिका तैयार कर सकता है।

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