राष्ट्रीय | महेंद्र सिंह | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 25 जुलाई 2026
NEET पेपर लीक और देशभर में परीक्षा व्यवस्था को लेकर जारी छात्र आंदोलन के बीच केंद्र सरकार ने शुक्रवार को एक साथ कई बड़े फैसले लिए। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) में बड़े स्तर पर कार्रवाई करते हुए 47 अधिकारियों की सेवाएं समाप्त कर दी गई हैं, जबकि इनमें से कुछ अधिकारियों के खिलाफ कानूनी और आपराधिक कार्रवाई भी की जाएगी। इसके साथ ही केंद्रीय मंत्रिमंडल ने Public Examinations (Prevention of Unfair Means) Act, 2024 को और सख्त बनाने के लिए संशोधन प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। प्रस्तावित बदलावों में पेपर लीक और संगठित परीक्षा धांधली के मामलों में कठोर सजा के साथ समयबद्ध सुनवाई की व्यवस्था शामिल होगी। सरकार की यह कार्रवाई ऐसे समय सामने आई है जब NEET-UG पेपर लीक और दूसरी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर छात्रों का गुस्सा लगातार बढ़ रहा है और दिल्ली के जंतर-मंतर से शुरू हुआ आंदोलन देश के कई हिस्सों तक पहुंच चुका है। सरकार पर परीक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता बहाल करने के साथ यह बताने का दबाव भी बढ़ रहा था कि गड़बड़ियों के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ वास्तव में क्या कार्रवाई की गई है।
NTA के 47 अधिकारियों को हटाने का फैसला इसी दिशा में अब तक की सबसे बड़ी प्रशासनिक कार्रवाइयों में से एक माना जा रहा है। सरकार परीक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार के तहत NTA के कामकाज में भी बदलाव कर रही है और जिन अधिकारियों की भूमिका गंभीर पाई गई है, उनके मामलों को केवल सेवा समाप्ति तक सीमित नहीं रखा जाएगा। कुछ अधिकारियों के खिलाफ कानूनी और आपराधिक कार्रवाई भी आगे बढ़ाई जाएगी। इस कार्रवाई का राजनीतिक महत्व भी है, क्योंकि पिछले कई दिनों से आंदोलनकारी छात्र यह सवाल उठा रहे थे कि यदि परीक्षा व्यवस्था में इतने बड़े स्तर पर गड़बड़ी हुई है तो इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर क्या कार्रवाई हुई। अब 47 अधिकारियों को बाहर करके सरकार ने यह संदेश देने की कोशिश की है कि परीक्षा प्रणाली में जवाबदेही तय करने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और NTA के भीतर भी बड़े स्तर पर सफाई की जा रही है।
इसी के साथ केंद्रीय मंत्रिमंडल ने पेपर लीक के खिलाफ बने मौजूदा कानून को और मजबूत करने का फैसला किया है। Public Examinations (Prevention of Unfair Means) Act, 2024 में प्रस्तावित संशोधनों के जरिए सजा को अधिक कठोर बनाने और मामलों की सुनवाई समयबद्ध तरीके से पूरी करने की व्यवस्था की जाएगी। सरकार का मानना है कि केवल आरोपियों की गिरफ्तारी पर्याप्त नहीं है, बल्कि परीक्षा माफिया और संगठित गिरोहों के खिलाफ ऐसी व्यवस्था जरूरी है जिसमें मुकदमे वर्षों तक अदालतों में लंबित न रहें और दोषियों को तेजी से सजा मिल सके। पेपर लीक को संगठित अपराध की तरह अंजाम देने वाले नेटवर्क पर प्रभावी कार्रवाई के लिए कानूनी प्रावधानों को मजबूत करने की तैयारी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी छात्रों को भरोसा दिला चुके हैं कि उनके भविष्य से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई होगी। पेपर लीक से जुड़े मामलों के लिए फास्ट-ट्रैक व्यवस्था की दिशा में भी कदम उठाए जा रहे हैं।
सरकार के ये फैसले ऐसे वक्त आए हैं जब 20 जुलाई के ‘संसद चलो’ मार्च और उसके दौरान हुई पुलिस कार्रवाई के बाद छात्र आंदोलन और तेज हो गया है। दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन जारी है और Cockroach Janta Party (CJP) ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को अपनी प्रमुख मांग बना रखा है। शुक्रवार को सरकार और CJP के प्रतिनिधियों के बीच करीब दो घंटे तक बातचीत भी हुई। सरकार की ओर से केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और डॉ. जितेंद्र सिंह शामिल हुए, जबकि CJP की ओर से सौरव दास और आशुतोष रांका ने छात्रों की मांगें रखीं। बातचीत में परीक्षा सुधार से जुड़े पांच सुझावों और तीन प्रमुख मांगों पर चर्चा हुई। CJP के अनुसार, प्रभावित परिवारों को मुआवजा देने और शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई नहीं करने के मुद्दों पर सरकार ने सकारात्मक रुख दिखाया है, हालांकि सरकार की ओर से इन पर अंतिम निर्णय की घोषणा अभी नहीं हुई है।
सबसे बड़ा गतिरोध धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को लेकर बना हुआ है। CJP ने इसे ‘नॉन-नेगोशिएबल’ बताते हुए साफ कर दिया है कि NTA अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई, पेपर लीक कानून में संशोधन और परीक्षा सुधारों की घोषणाओं के बावजूद वह शिक्षा मंत्री की राजनीतिक जवाबदेही की मांग से पीछे नहीं हटेगी। संगठन ने सरकार को इस मुद्दे पर विचार करने के लिए शनिवार दोपहर तक का समय दिया है। जेपी नड्डा ने भी कहा है कि सरकार CJP की मांगों और परीक्षा सुधार संबंधी सुझावों पर विचार करेगी और शनिवार को दोनों पक्षों की फिर बैठक होगी। इस कारण अब छात्र आंदोलन की दिशा काफी हद तक शनिवार की बातचीत और धर्मेंद्र प्रधान को लेकर सरकार के रुख पर निर्भर करेगी।
सरकार के सामने अब दोहरी चुनौती है। एक तरफ उसे यह भरोसा बहाल करना है कि देश की सबसे महत्वपूर्ण प्रतियोगी परीक्षाएं सुरक्षित, निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से आयोजित की जा सकती हैं, वहीं दूसरी तरफ आंदोलन कर रहे लाखों युवाओं के बीच पैदा हुए अविश्वास को भी दूर करना है। 47 NTA अधिकारियों की बर्खास्तगी और पेपर लीक कानून को सख्त करने का फैसला यह संकेत जरूर देता है कि सरकार अब परीक्षा संकट को केवल एक पेपर लीक या एक परीक्षा तक सीमित मामला नहीं मान रही है। लेकिन आंदोलनकारी छात्रों का सवाल प्रशासनिक कार्रवाई से आगे राजनीतिक जवाबदेही तक पहुंच चुका है। यही कारण है कि शुक्रवार को सरकार की बड़ी कार्रवाई के बावजूद जंतर-मंतर का आंदोलन खत्म नहीं हुआ है।
अब शनिवार का दिन निर्णायक हो सकता है। एक तरफ केंद्र ने NTA में बड़ी कार्रवाई करके और कानून को सख्त बनाने का रास्ता खोलकर छात्रों के सामने अपनी कार्रवाई का खाका रख दिया है, दूसरी तरफ CJP ने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को आंदोलन की निर्णायक शर्त बना दिया है। अगर शनिवार की बातचीत में इस मुद्दे पर कोई रास्ता निकलता है तो पिछले कई सप्ताह से जारी आंदोलन में बड़ा मोड़ आ सकता है। लेकिन यदि गतिरोध कायम रहता है तो 47 अधिकारियों की बर्खास्तगी और कानून में बदलाव जैसे बड़े फैसलों के बावजूद सरकार को जंतर-मंतर से उठ रही राजनीतिक जवाबदेही की मांग का सामना करना पड़ सकता है।




