अंतरराष्ट्रीय | अमित भास्कर | ABC NATIONAL NEWS | वॉशिंगटन/तेहरान | 23 जुलाई 2026
मध्य-पूर्व में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने अब एक नया और खतरनाक मोड़ ले लिया है। यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने गुरुवार को दावा किया कि उन्होंने लाल सागर में दो सऊदी तेल टैंकरों को निशाना बनाया है। इसके बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें तेज़ी से बढ़कर 98 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गईं और 100 डॉलर के करीब पहुंचने लगीं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि हालात नहीं सुधरे तो वैश्विक ऊर्जा संकट और गहरा सकता है।
हूती विद्रोहियों ने कुछ दिन पहले ही सऊदी जहाजों के खिलाफ समुद्री नाकेबंदी का ऐलान किया था। अब दो तेल टैंकरों पर हमले के दावे के बाद लाल सागर में जहाजरानी को लेकर नई चिंता पैदा हो गई है। समुद्री सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, एक टैंकर में आग लगने की भी सूचना है, जबकि दूसरे जहाज को भी निशाना बनाए जाने का दावा किया गया है।
उधर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी है कि यदि भविष्य में होरमुज़ जलडमरूमध्य में हूती संगठन किसी जहाज पर हमला करता है तो उसका जिम्मेदार सीधे ईरान को माना जाएगा। ट्रंप ने कहा कि ऐसी किसी भी घटना पर अमेरिका ईरान और हूतियों दोनों के खिलाफ कड़ी सैन्य कार्रवाई करेगा। उनका आरोप है कि हूती संगठन ईरान के समर्थन और निर्देश पर काम करता है।
इस बीच अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि ईरान समझौते के लिए “गिड़गिड़ा रहा है”, लेकिन अभी तक वह अपनी नीति बदलने को तैयार नहीं है। उन्होंने ट्रंप की रणनीति को “आंख के बदले आंख” बताते हुए कहा कि यदि ईरान अमेरिकी हितों या उसके सहयोगियों को निशाना बनाएगा तो जवाब भी उसी स्तर पर दिया जाएगा।
वहीं, ईरान ने अमेरिकी बयानों को अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया है। ईरानी विदेश मंत्रालय ने ट्रंप की उन चेतावनियों की कड़ी आलोचना की है, जिनमें उन्होंने ईरान के पुलों और बिजली संयंत्रों पर हमले की बात कही थी। तेहरान का कहना है कि नागरिक ढांचे को निशाना बनाना युद्ध अपराध की श्रेणी में आ सकता है।
तनाव के बीच गुरुवार को ईरान ने जॉर्डन की दिशा में चार मिसाइलें दागीं, जिनमें से तीन को जॉर्डन की सेना ने हवा में ही मार गिराने का दावा किया। दूसरी ओर, ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार, अमेरिका के ताजा हमलों में इराक सीमा के पास दो लोगों की मौत हुई है। ईरान के स्वास्थ्य मंत्रालय का कहना है कि 6 जुलाई से अब तक अमेरिकी हमलों में 53 लोगों की जान जा चुकी है।
बढ़ते संकट का असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी दिखाई देने लगा है। तेल की कीमतों में उछाल से परिवहन लागत और ईंधन की कीमतें बढ़ने की आशंका है। समुद्री बीमा कंपनियां भी अब होरमुज़ जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों के लिए नए जोखिमों का आकलन कर रही हैं। कुछ बीमा कंपनियों ने संकेत दिया है कि यदि जहाज ईरान को किसी प्रकार का शुल्क देते हैं तो उनका बीमा रद्द किया जा सकता है।
इसी बीच अमेरिका और सऊदी अरब के बीच हुए असैन्य परमाणु सहयोग समझौते पर भी नया विवाद खड़ा हो गया है। राष्ट्रपति ट्रंप ने समझौते पर नई शर्त जोड़ते हुए कहा है कि इसकी अंतिम मंजूरी तभी होगी, जब सऊदी अरब ‘अब्राहम अकॉर्ड्स’ में शामिल होगा और इज़राइल के साथ संबंध सामान्य करेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि लाल सागर और होरमुज़ जलडमरूमध्य दोनों में बढ़ता तनाव वैश्विक व्यापार, ऊर्जा आपूर्ति और क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती बनता जा रहा है। यदि कूटनीतिक प्रयास सफल नहीं हुए तो यह संघर्ष पूरे पश्चिम एशिया को और बड़े संकट की ओर धकेल सकता है।




