राष्ट्रीय | पलक राय | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 23 जुलाई 2026
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पेपर लीक के मामलों में फास्ट-ट्रैक कोर्ट बनाने और दोषियों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई का ऐलान किया है, लेकिन जंतर-मंतर पर चल रहा आंदोलन फिलहाल थमता नहीं दिख रहा। प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे Cockroach Janta Party (CJP) ने साफ कहा है कि उनकी सबसे बड़ी मांग अब भी वही है— केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा। संगठन का कहना है कि जब तक यह मांग पूरी नहीं होती, आंदोलन जारी रहेगा।
गुरुवार सुबह से ही जंतर-मंतर पर बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी जुटने लगे। सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई और एहतियात के तौर पर दिल्ली मेट्रो ने 16 मेट्रो स्टेशनों को अगली सूचना तक बंद कर दिया। हालांकि राजीव चौक, मंडी हाउस और सेंट्रल सेक्रेटेरिएट पर इंटरचेंज की सुविधा जारी रखी गई।
इसी बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया पर घोषणा की कि सरकार पेपर लीक के मामलों की सुनवाई के लिए फास्ट-ट्रैक कोर्ट स्थापित करेगी, ताकि दोषियों को जल्द और कड़ी सजा मिल सके। उन्होंने कहा कि युवाओं का भविष्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और जो लोग उनके भविष्य से खिलवाड़ करेंगे, उन्हें बख्शा नहीं जाएगा।
लेकिन CJP ने प्रधानमंत्री की इस घोषणा को पर्याप्त नहीं माना। संगठन के प्रवक्ता सौरव दास ने कहा कि “धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा हमारी गैर-समझौतावादी मांग है।” उनका कहना था कि आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण रहेगा, लेकिन तब तक खत्म नहीं होगा जब तक सरकार जवाबदेही तय नहीं करती।
CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने भी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि दिल्ली बंद करने के बजाय सरकार को शिक्षा मंत्री के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि आंदोलन को बदनाम करने के लिए बाहर से लोगों को भेजा जा रहा है। हालांकि इन आरोपों पर सरकार की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
उधर, अनशन पर बैठे सोनम वांगचुक ने कहा है कि यदि केंद्र सरकार स्पष्ट रूप से यह भरोसा देती है कि आंदोलन में शामिल छात्रों और युवाओं के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं होगी, तो वह अपना अनिश्चितकालीन अनशन समाप्त करने पर विचार करेंगे।
प्रधानमंत्री के बयान के बाद विपक्ष ने भी सरकार को घेरा। राहुल गांधी ने कहा कि सिर्फ फास्ट-ट्रैक कोर्ट की घोषणा काफी नहीं है। उन्होंने तीन मांगें दोहराईं— धर्मेंद्र प्रधान को पद से हटाया जाए, छात्रों से माफी मांगी जाए और प्रदर्शनकारियों पर कथित हमले के जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई हो। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी कहा कि शिक्षा व्यवस्था सरकार के कार्यकाल में कमजोर हुई है और केवल घोषणाओं से समस्या का समाधान नहीं होगा।
इस बीच दिल्ली पुलिस ने बताया कि 22 जुलाई की हिंसा के संबंध में दो एसीपी के गंभीर रूप से घायल होने के मामले में एफआईआर दर्ज की गई है। पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया कि अस्पताल में भर्ती एक छात्रा की मौत की खबर फर्जी है।
मुंबई में भी CJP के समर्थन में हुए प्रदर्शनों को लेकर अब तक 13 एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं। पुलिस के अनुसार, विभिन्न मामलों में करीब 400 लोगों को आरोपी बनाया गया है।
दिल्ली हाई कोर्ट ने बुधवार को सोनम वांगचुक को अस्पताल ले जाने के खिलाफ दायर जनहित याचिका खारिज कर दी थी। अदालत ने कहा कि यह मुद्दा पहले ही सुनवाई के दौरान संतोषजनक ढंग से निपटाया जा चुका है।
कुल मिलाकर, केंद्र सरकार ने पेपर लीक के खिलाफ सख्त कार्रवाई का संदेश दिया है, लेकिन जंतर-मंतर से उठ रही आवाजें बताती हैं कि आंदोलन अब केवल परीक्षा घोटाले तक सीमित नहीं रहा। छात्रों और प्रदर्शनकारियों की मांग अब जवाबदेही तय करने की है, जबकि सरकार कानून और कार्रवाई के जरिए भरोसा बहाल करने की कोशिश कर रही है। फिलहाल, दोनों पक्ष अपने-अपने रुख पर कायम हैं और गतिरोध बना हुआ है।




