राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 22 जुलाई 2026
राष्ट्रीय राजधानी में CJP के “चलो संसद” प्रदर्शन के दौरान हुई पुलिस की हिंसक कार्रवाई को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट ने बुधवार को महत्वपूर्ण आदेश जारी किया। अदालत ने केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस को निर्देश दिया कि घटना से जुड़े CCTV फुटेज, वीडियो रिकॉर्डिंग और अन्य सभी प्रासंगिक दस्तावेज सुरक्षित रखे जाएं, ताकि भविष्य की न्यायिक प्रक्रिया में उनका इस्तेमाल किया जा सके।
मुख्य न्यायाधीश डी.के. उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की खंडपीठ ने दो याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया। इन याचिकाओं में प्रदर्शन के दौरान कथित पुलिस बल प्रयोग की अदालती निगरानी में विशेष जांच दल (SIT) से जांच कराने की मांग की गई है।
अदालत ने केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस से जवाब भी मांगा है। साथ ही स्पष्ट किया कि सभी रिकॉर्ड दिल्ली पुलिस या केंद्र सरकार द्वारा जारी मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) के अनुसार सुरक्षित रखे जाएं। मामले की अगली सुनवाई 11 सितंबर को होगी।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता एन. हरिहरन ने दावा किया कि जंतर-मंतर से शुरू हुआ प्रदर्शन पूरी तरह शांतिपूर्ण था, लेकिन बाद में प्रदर्शनकारियों पर अत्यधिक बल प्रयोग किया गया। उनका आरोप था कि पुलिस ने बिना पर्याप्त चेतावनी दिए कार्रवाई की, जिससे बड़ी संख्या में लोग घायल हुए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि महिला प्रदर्शनकारियों के साथ दुर्व्यवहार हुआ और कई लोगों को गंभीर चोटें आईं। याचिका में संबंधित पुलिस अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने और स्वतंत्र जांच की मांग की गई है।
वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह ने अदालत से कहा कि 20 जुलाई को प्रदर्शनकारियों की संख्या जरूर बढ़ी थी, लेकिन प्रदर्शन शांतिपूर्ण बना रहा। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस और सादे कपड़ों में मौजूद कुछ लोगों ने बिना उकसावे के प्रदर्शनकारियों पर हमला किया।
एक अन्य वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन ने अदालत में दावा किया कि पुलिस कार्रवाई में कुछ लोग वर्दी में नहीं थे। उन्होंने आरोप लगाया कि एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने एक महिला के साथ मारपीट की। उन्होंने अदालत को बताया कि उन्होंने घटना से जुड़े 100 से अधिक वीडियो देखे हैं, जिनमें कथित तौर पर लाठीचार्ज, आंसू गैस के इस्तेमाल और महिलाओं सहित प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग के दृश्य दिखाई देते हैं।
हालांकि दिल्ली पुलिस ने इन सभी आरोपों का खंडन किया। केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता, जबकि दिल्ली पुलिस की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता एस.वी. राजू ने अदालत को बताया कि प्रदर्शन हिंसक हो गया था और प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर पथराव किया, जिसमें कई पुलिसकर्मी घायल हुए। उन्होंने यह भी कहा कि याचिकाएं सोशल मीडिया पर उपलब्ध चुनिंदा वीडियो के आधार पर दायर की गई हैं और यदि किसी व्यक्ति को कोई शिकायत है तो वह कानून के तहत मजिस्ट्रेट के समक्ष जा सकता है।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा कि यह मामला किसी एक व्यक्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि व्यापक सार्वजनिक महत्व का है। इसी वजह से अदालत ने नोटिस जारी करते हुए घटना से जुड़े सभी इलेक्ट्रॉनिक और दस्तावेजी साक्ष्य सुरक्षित रखने का निर्देश दिया, ताकि मामले की निष्पक्ष सुनवाई सुनिश्चित की जा सके।




