राष्ट्रीय | आलोक रंजन | ABC NATIONAL NEWS | प्रयागराज | 22 जुलाई 2026
अयोध्या के राम मंदिर में श्रद्धालुओं के दान में कथित गड़बड़ी के मामले पर इलाहाबाद हाई कोर्ट ने बुधवार को बेहद कड़ी टिप्पणी की। न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन ने कहा कि यदि राम मंदिर जैसे आस्था के केंद्र में चढ़ावे की कथित चोरी से भी किसी को शर्म महसूस नहीं होती, तो फिर ऐसे लोगों को किसी भी बात से शर्मिंदा नहीं किया जा सकता।
मामले की सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति श्रीधरन ने देश में भ्रष्टाचार की स्थिति पर भी गंभीर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्थानों में व्याप्त भ्रष्टाचार लगातार बढ़ता जा रहा है और राम मंदिर में दान की कथित हेराफेरी जैसी घटनाएं ईमानदारी के स्तर में आई गिरावट का सबसे चिंताजनक उदाहरण हैं।
न्यायालय ने टिप्पणी की कि जिस समाज में भगवान के नाम पर चढ़ाए गए दान तक में कथित अनियमितताएं होने लगें, वहां नैतिक मूल्यों पर गंभीर प्रश्न खड़े होते हैं। अदालत ने कहा कि ऐसी घटनाएं केवल आर्थिक अपराध नहीं हैं, बल्कि समाज के नैतिक चरित्र पर भी गहरा आघात करती हैं।
सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन ने भ्रष्टाचार के मामलों में सख्त सजा की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उन्होंने अपनी व्यक्तिगत राय रखते हुए कहा कि भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (Prevention of Corruption Act) के तहत आने वाले गंभीर मामलों में मृत्युदंड जैसे कठोर दंड पर भी विचार किया जाना चाहिए। हालांकि यह न्यायाधीश की मौखिक टिप्पणी थी, कोई न्यायिक आदेश नहीं।
यह मामला अयोध्या स्थित राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा दिए गए दान में कथित गबन और वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों से जुड़ा है। मामले की न्यायिक प्रक्रिया फिलहाल जारी है और आरोपों पर अंतिम फैसला आना बाकी है।
इलाहाबाद हाई कोर्ट की इन टिप्पणियों ने भ्रष्टाचार और सार्वजनिक जीवन में जवाबदेही को लेकर एक बार फिर बहस तेज कर दी है। हालांकि अदालत की मौखिक टिप्पणियां अंतिम फैसला नहीं मानी जातीं, फिर भी न्यायपालिका की ओर से भ्रष्टाचार पर व्यक्त की गई इस कड़ी नाराजगी को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।




