राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 21 जुलाई 2026
पेपर लीक और NEET विवाद को लेकर चल रहा छात्र आंदोलन मंगलवार को और व्यापक होता दिखाई दिया। एक ओर हजारों छात्र और समर्थक दोबारा जंतर-मंतर पहुंचकर प्रदर्शन में शामिल हुए, वहीं दूसरी ओर कांग्रेस नेता राहुल गांधी के नेतृत्व में विपक्षी सांसदों ने प्रधानमंत्री आवास के बाहर धरना शुरू कर दिया। इसी बीच दिल्ली हाईकोर्ट ने सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को उनकी पसंद के निजी अस्पताल मेडांटा में स्थानांतरित करने की अनुमति दे दी।

सोमवार को संसद मार्च के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई के बावजूद मंगलवार को जंतर-मंतर पर बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी जुटे। बारिश के बीच भी लोगों का आना लगातार जारी रहा। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि पुलिस की कार्रवाई ने आंदोलन को कमजोर करने के बजाय और मजबूत कर दिया है।
उधर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस सांसद प्रधानमंत्री आवास के बाहर धरने पर बैठ गए। बाद में समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव, एनसीपी (शरद पवार गुट) की सांसद सुप्रिया सुले सहित कई विपक्षी नेताओं ने भी धरने में हिस्सा लिया। कांग्रेस ने सरकार के सामने चार प्रमुख मांगें रखीं—गृह मंत्री अमित शाह का संसद में बयान, पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था पर चर्चा, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा तथा छात्रों से सार्वजनिक माफी।
धरने के दौरान दिल्ली पुलिस ने कांग्रेस के कई नेताओं और कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया। वहीं केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन और केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने राहुल गांधी से धरना समाप्त करने की अपील की। बाद में जितेंद्र सिंह ने आरोप लगाया कि सरकार संसद में चर्चा के लिए तैयार थी, लेकिन कांग्रेस ने अपनी मांगें बदल दीं। दूसरी ओर राहुल गांधी ने सरकार पर युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने और छात्रों के साथ बल प्रयोग का आरोप लगाया।
इस बीच दिल्ली हाईकोर्ट ने सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि आंगमो की याचिका पर सुनवाई करते हुए वांगचुक को सफदरजंग अस्पताल से मेडांटा अस्पताल स्थानांतरित करने की अनुमति दे दी। केंद्र सरकार ने अदालत में कहा कि उसे निजी अस्पताल में स्थानांतरण पर कोई आपत्ति नहीं है, बशर्ते वांगचुक चिकित्सकीय निगरानी में रहें। अदालत के फैसले का स्वागत करते हुए गीतांजलि आंगमो ने कहा कि यह प्रत्येक नागरिक के अपने डॉक्टर और अस्पताल चुनने के अधिकार की पुष्टि है।
जंतर-मंतर पर पहुंचे CJP संयोजक अभिजीत दीपके ने आरोप लगाया कि सरकार ने बातचीत के नाम पर उनका समय बर्बाद किया। उनका कहना था कि केंद्रीय मंत्री जे.पी. नड्डा से हुई बैठक का कोई ठोस परिणाम नहीं निकला। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि हिरासत में लिए गए छात्रों को उनके वकीलों से मिलने नहीं दिया गया तो संगठन मंगलवार रात दिल्ली पुलिस मुख्यालय के बाहर शांतिपूर्ण धरना देगा।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा ने मंगलवार को राम मनोहर लोहिया और लेडी हार्डिंग अस्पताल का दौरा कर घायल छात्रों की स्थिति की जानकारी ली। सूत्रों के अनुसार उन्होंने अधिकारियों से उपचार व्यवस्था की समीक्षा की और घायलों को बेहतर चिकित्सा उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।
दिल्ली पुलिस ने संसद मार्च के दौरान हिंसा, तोड़फोड़ और अन्य घटनाओं के संबंध में अब तक चार एफआईआर दर्ज करने की पुष्टि की है। पुलिस सूत्रों के अनुसार दो और मामले दर्ज किए जा सकते हैं। इन मामलों में हिंसा, सरकारी संपत्ति को नुकसान, ड्रोन उड़ाने और कथित साजिश जैसी धाराएं शामिल हैं।
देश के अन्य हिस्सों में भी आंदोलन का असर दिखाई दिया। हैदराबाद में छात्र संगठनों ने “चलो लोक भवन” मार्च निकालकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को हटाने की मांग की, जबकि चेन्नई में रैपर अरिवु को सचिवालय के पास NEET के विरोध में प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिया गया। कई विपक्षी दलों के नेताओं, कलाकारों और सामाजिक संगठनों ने भी छात्रों के आंदोलन के समर्थन में बयान दिए।
उधर शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) ने अपने मुखपत्र में आंदोलन का समर्थन करते हुए इसे “क्रांति की शुरुआत” बताया, जबकि सरकार का कहना है कि वह पेपर लीक के दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई कर रही है और छात्रों के भविष्य की रक्षा उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता है।
पेपर लीक, छात्र आंदोलन और पुलिस कार्रवाई को लेकर राजनीतिक टकराव अब संसद, अदालत और सड़कों तक फैल चुका है। ऐसे में मानसून सत्र के दौरान यह मुद्दा सरकार और विपक्ष के बीच सबसे बड़ा राजनीतिक संघर्ष बना रहने के संकेत दे रहा है।




