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ऑफिस से समोसा-वड़ा पाव हटाकर फल रखवाए, बेंगलुरु की कर्मचारी के फैसले पर सोशल मीडिया दो धड़ों में बंटा

ट्रेंडिंग/ लाइफस्टाइल/ स्वास्थ्य | ABC NATIONAL NEWS | बेंगलुरु | 17 जुलाई 2026

बेंगलुरु की एक कर्मचारी का अपने ऑफिस में शाम के नाश्ते को लेकर लिया गया फैसला सोशल मीडिया पर बड़ी बहस का विषय बन गया है। कर्मचारी ने ऑफिस प्रशासन को मनाकर समोसा और वड़ा पाव की जगह फलों को शाम के नाश्ते में शामिल करा दिया। इसके बाद इंटरनेट पर लोगों की राय दो हिस्सों में बंट गई। कुछ लोगों ने इसे स्वास्थ्य के लिए बेहतर कदम बताया, जबकि कई लोगों ने कहा कि कर्मचारियों पर स्वस्थ भोजन थोपना सही नहीं है।

यह पूरा मामला तब शुरू हुआ, जब एक्स (X) यूजर आइना नारंग ने अपने ऑफिस पैंट्री की एक तस्वीर साझा की। तस्वीर में केले, आम और खरबूजे जैसे कटे हुए फलों के डिब्बे रखे हुए दिखाई दे रहे थे। उन्होंने पोस्ट में लिखा, “ऑफिस एडमिन को मना लिया कि शाम के नाश्ते में वड़ा पाव और समोसे की जगह फल दिए जाएं।” मजाकिया अंदाज में उन्होंने यह भी लिखा कि उनका अगला लक्ष्य ऑफिस के स्नैक काउंटर को बदलना है।

यह पोस्ट देखते ही देखते वायरल हो गई और इसे 11 लाख से अधिक बार देखा गया। इसके बाद सोशल मीडिया पर स्वस्थ खान-पान और व्यक्तिगत पसंद को लेकर बहस शुरू हो गई।

कई लोगों ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि तले हुए खाद्य पदार्थ रोज़ाना नहीं, बल्कि कभी-कभार ही खाने चाहिए। एक यूजर ने लिखा कि भारतीय खान-पान की परंपरा में समोसा जैसे स्नैक्स रोज़ खाने की संस्कृति पहले नहीं थी और इन्हें सप्ताह में एक-दो बार तक सीमित रखना बेहतर है।

एक अन्य यूजर ने लिखा कि अच्छा भोजन बेहतर काम करने में मदद करता है और ऑफिस में स्वस्थ विकल्प उपलब्ध कराना स्वागत योग्य कदम है।

कुछ लोगों ने पोषण के नजरिए से भी इस फैसले का समर्थन किया। उनका कहना था कि एक समोसा या वड़ा पाव में लगभग 300 कैलोरी होती हैं और इसे खाने से कई बार पूरी एक्सरसाइज का फायदा खत्म हो जाता है। हालांकि कुछ लोगों ने सुझाव दिया कि फलों के साथ उबला अंडा या ऑमलेट जैसे प्रोटीनयुक्त विकल्प भी बेहतर हो सकते हैं।

दूसरी ओर, कई लोगों ने कटे हुए फलों की स्वच्छता पर सवाल उठाए। उनका कहना था कि बड़ी मात्रा में पहले से कटे फल यदि सही तरीके से तैयार और सुरक्षित न रखे जाएं, तो स्वास्थ्य के लिए जोखिम पैदा कर सकते हैं। कुछ लोगों ने सुझाव दिया कि कटे हुए फलों की बजाय पूरे फल दिए जाने चाहिए, ताकि स्वच्छता को लेकर संदेह न रहे।

बहस का सबसे बड़ा मुद्दा कर्मचारियों की पसंद की स्वतंत्रता रहा। कई यूजर्स ने कहा कि स्वस्थ भोजन का विकल्प देना अच्छी बात है, लेकिन किसी एक विकल्प को सभी पर थोपना उचित नहीं है। एक यूजर ने लिखा, “मुझे यह चुनने का अधिकार होना चाहिए कि मैं क्या खाना चाहता हूं। स्वास्थ्य के नाम पर किसी एक विकल्प को सभी पर थोपना सही नहीं है।”

एक अन्य यूजर ने लिखा, “स्वस्थ भोजन कितना भी अच्छा क्यों न हो, उसे किसी की इच्छा के विरुद्ध नहीं परोसा जाना चाहिए।” वहीं कुछ लोगों ने हल्के-फुल्के अंदाज में लिखा कि अगर वे ऑफिस में समोसे की उम्मीद लेकर जाएं और वहां फल मिलें, तो उनका पूरा मूड खराब हो जाएगा।

यह वायरल पोस्ट अब सिर्फ समोसे और फलों की बहस तक सीमित नहीं रह गई है। इसने कार्यस्थल पर स्वास्थ्य, व्यक्तिगत पसंद, पोषण और कर्मचारी कल्याण जैसे मुद्दों पर भी नई चर्चा छेड़ दी है। सवाल यह है कि क्या ऑफिस में स्वस्थ विकल्प देना पर्याप्त है या कर्मचारियों को अपनी पसंद का नाश्ता चुनने की आज़ादी भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।

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