राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 16 जुलाई 2026
सुप्रीम कोर्ट ने विरासत में मिली कृषि भूमि की बिक्री को लेकर एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम, 1956 की धारा 22 के तहत मिलने वाला ‘पहले खरीदने का अधिकार’ (Right of Pre-emption) खेती की जमीन पर भी लागू होगा। अदालत ने कहा कि यदि कोई सह-उत्तराधिकारी विरासत में मिली कृषि भूमि में अपना हिस्सा बेचना चाहता है, तो सबसे पहले उसी परिवार के अन्य क्लास-वन उत्तराधिकारियों को उसे खरीदने का अवसर देना होगा।
सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि धारा 22 का उद्देश्य परिवार की संयुक्त विरासत को बाहरी लोगों के हाथों में जाने से बचाना है। इसलिए कृषि भूमि को इस अधिकार से अलग नहीं किया जा सकता। अदालत के अनुसार, यदि किसी सह-उत्तराधिकारी ने अपना हिस्सा बेचने का निर्णय लिया है, तो अन्य सह-उत्तराधिकारियों को प्राथमिकता के आधार पर उसे खरीदने का वैधानिक अधिकार मिलेगा।
यह फैसला उन हजारों परिवारों के लिए अहम माना जा रहा है, जहां विरासत में मिली कृषि भूमि के बंटवारे या बिक्री को लेकर विवाद होते रहते हैं। अब यदि परिवार का कोई सदस्य अपनी हिस्सेदारी किसी बाहरी व्यक्ति को बेचना चाहता है, तो पहले उसे परिवार के अन्य पात्र उत्तराधिकारियों को खरीदने का अवसर देना होगा। यदि वे निर्धारित शर्तों पर खरीदने के इच्छुक नहीं हैं, तभी संपत्ति किसी बाहरी व्यक्ति को बेची जा सकेगी।
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, यह फैसला पारिवारिक संपत्ति को सुरक्षित रखने और उत्तराधिकार संबंधी विवादों को कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जाएगा। साथ ही, यह स्पष्ट करता है कि हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम की धारा 22 केवल आवासीय या अन्य संपत्तियों तक सीमित नहीं है, बल्कि कृषि भूमि पर भी समान रूप से लागू होती है।
सुप्रीम कोर्ट के इस निर्णय से देशभर में विरासत में मिली कृषि भूमि की खरीद-बिक्री से जुड़े मामलों पर व्यापक प्रभाव पड़ने की संभावना है और भविष्य में ऐसे मामलों में अदालतों के लिए यह एक महत्वपूर्ण कानूनी मिसाल भी बनेगा।




