लाइफस्टाइल/ स्वास्थ्य | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 16 जुलाई 2026
आजकल कैफे और रेस्टोरेंट में तेजी से लोकप्रिय हो रही बोबा टी (बबल टी) स्वाद और ट्रेंड के कारण युवाओं की पहली पसंद बनती जा रही है। ताइवान से शुरू हुई यह ड्रिंक अब दुनिया भर में कई फ्लेवर में उपलब्ध है। इसे आमतौर पर चाय, दूध, चीनी और टैपिओका पर्ल्स (स्टार्च से बनी छोटी गोलियां) मिलाकर तैयार किया जाता है। हालांकि, स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि इसका नियमित सेवन फायदे से ज्यादा नुकसान पहुंचा सकता है।
बोबा टी में कैलोरी, चीनी और कार्बोहाइड्रेट की मात्रा काफी अधिक होती है। इसे पीने से शरीर को तुरंत ऊर्जा तो मिलती है, लेकिन बार-बार सेवन करने पर वजन बढ़ने, मोटापे, इंसुलिन रेजिस्टेंस और टाइप-2 डायबिटीज का खतरा बढ़ सकता है। अधिक चीनी का सेवन नॉन-अल्कोहोलिक फैटी लीवर डिजीज (NAFLD) जैसी गंभीर समस्या का कारण भी बन सकता है।
विशेषज्ञ बताते हैं कि बोबा टी में विटामिन और खनिज बहुत कम मात्रा में होते हैं। इसमें फोलेट, कैल्शियम और आयरन जैसे पोषक तत्व सीमित मात्रा में मिलते हैं, इसलिए इसे पौष्टिक पेय नहीं माना जाता। वहीं, यदि बोबा टी ग्रीन टी, ब्लैक टी या ऊलोंग टी के आधार पर बनाई गई हो और उसमें चीनी कम हो, तो उसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट हृदय रोग, डायबिटीज और कुछ प्रकार के कैंसर के जोखिम को कम करने में सहायक हो सकते हैं।
कुछ शोधों में यह भी संकेत मिले हैं कि लंबे समय तक अत्यधिक मीठे पेय पदार्थों का सेवन याददाश्त और सोचने-समझने की क्षमता पर भी नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है। हालांकि, इस संबंध में अभी और वैज्ञानिक अध्ययन की आवश्यकता है।
अगर आप बोबा टी पीना चाहते हैं, तो इसे अधिक हेल्दी बनाया जा सकता है। घर पर तैयार करते समय रिफाइंड शुगर की जगह शहद या खजूर जैसे प्राकृतिक स्वीटनर का उपयोग करें। टैपिओका पर्ल्स की जगह चिया सीड्स, साबूदाना या फ्रूट जेली का इस्तेमाल किया जा सकता है। इसी तरह फुल क्रीम दूध की बजाय बादाम, ओट या सोया मिल्क बेहतर विकल्प हो सकते हैं। यदि कैफे में ऑर्डर कर रहे हैं, तो कम चीनी और हेल्दी विकल्प चुनने की सलाह दी जाती है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि कभी-कभार शौक के लिए बोबा टी पीना सामान्य तौर पर बड़ी समस्या नहीं है, लेकिन इसे रोजमर्रा की आदत बना लेना स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है। संतुलित मात्रा और स्वस्थ विकल्प अपनाकर इसके संभावित जोखिमों को काफी हद तक कम किया जा सकता है।




