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चीन की आर्थिक रफ्तार पड़ी धीमी, विकास दर लक्ष्य से नीचे; घरेलू मांग और ईरान युद्ध का असर

अंतरराष्ट्रीय/अर्थव्यवस्था | ABC NATIONAL NEWS | बीजिंग | 16 जुलाई 2026

दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था चीन की विकास रफ्तार दूसरी तिमाही में उम्मीद से अधिक धीमी पड़ गई है। अप्रैल से जून 2026 के बीच चीन की अर्थव्यवस्था केवल 4.3% की दर से बढ़ी, जो पहली तिमाही के 5% और सरकार के 4.5% से 5% के वार्षिक लक्ष्य से भी कम है। यह 2022 के बाद सबसे कमजोर तिमाही वृद्धि दर्ज की गई है।

चीन के राष्ट्रीय सांख्यिकी ब्यूरो (NBS) के अनुसार, कमजोर घरेलू मांग, रियल एस्टेट सेक्टर की सुस्ती और ईरान युद्ध के कारण बढ़ी ऊर्जा लागत ने आर्थिक गतिविधियों पर दबाव बनाया। ब्यूरो ने माना कि अर्थव्यवस्था के सामने बाहरी अनिश्चितताएं बढ़ी हैं और उत्पादन तथा मांग के बीच असंतुलन बना हुआ है।

हालांकि, चीन के निर्यात क्षेत्र ने मजबूत प्रदर्शन किया है। जून में देश का निर्यात पिछले वर्ष की तुलना में 27% बढ़ा। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) डेटा सेंटरों के लिए सेमीकंडक्टरों की बढ़ती वैश्विक मांग और इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) के रिकॉर्ड निर्यात ने विदेशी व्यापार को मजबूती दी। जून में पहली बार चीन ने एक महीने में 10 लाख से अधिक वाहन निर्यात किए।

इसके बावजूद घरेलू अर्थव्यवस्था कमजोर बनी हुई है। नए घरों की कीमतों में लगातार गिरावट जारी है, जबकि उपभोक्ता खर्च में मामूली सुधार देखने को मिला। जून में खुदरा बिक्री 1% बढ़ी, जो मई के मुकाबले बेहतर रही, लेकिन मांग अब भी अपेक्षित स्तर तक नहीं पहुंच सकी है।

बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि ईरान युद्ध के कारण कच्चे तेल और अन्य कच्चे माल की कीमतें बढ़ने से चीनी उद्योगों की लागत बढ़ी है। कमजोर घरेलू मांग के कारण कंपनियां बढ़ी हुई लागत का पूरा बोझ उपभोक्ताओं पर नहीं डाल पा रही हैं, जिससे मुनाफे पर दबाव बढ़ रहा है।

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वहीं कुछ अर्थशास्त्रियों का मानना है कि चीन की सरकार ने इस वर्ष विकास लक्ष्य पहले ही कम कर दिया था, इसलिए अब वास्तविक आर्थिक स्थिति को आधिकारिक आंकड़ों में अधिक स्पष्ट रूप से दिखाया जा रहा है। उनके अनुसार, यह अचानक आई गिरावट नहीं, बल्कि पहले से मौजूद आर्थिक सुस्ती की स्वीकारोक्ति भी हो सकती है।

चीन के लिए आने वाले महीनों में सबसे बड़ी चुनौती घरेलू मांग को मजबूत करना, रियल एस्टेट संकट से उबरना और वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव के बीच आर्थिक गति बनाए रखना होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ईरान युद्ध लंबा खिंचता है और ऊर्जा कीमतें ऊंची बनी रहती हैं, तो चीन की अर्थव्यवस्था पर दबाव और बढ़ सकता है।

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