Home » International » ईरान युद्ध से सऊदी की बदली रणनीति, अमेरिका पर भरोसा क्यों डगमगाया?

ईरान युद्ध से सऊदी की बदली रणनीति, अमेरिका पर भरोसा क्यों डगमगाया?

अंतरराष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | रियाद | 16 जुलाई 2026

ईरान के साथ बढ़ते सैन्य तनाव ने सऊदी अरब की सुरक्षा रणनीति में बड़ा बदलाव ला दिया है। लंबे समय तक अमेरिका की सुरक्षा छतरी पर निर्भर रहने वाला सऊदी अब अपनी रक्षा साझेदारियों में विविधता ला रहा है। इसी बीच, ताइवान से रिकॉर्ड संख्या में ड्रोन खरीद और पाकिस्तान, यूक्रेन तथा ग्रीस जैसे देशों के साथ बढ़ता रक्षा सहयोग इस बदलाव की स्पष्ट तस्वीर पेश कर रहा है।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, जून 2026 में सऊदी अरब ने ताइवान से करीब 4.72 करोड़ डॉलर के ड्रोन खरीदे। यह जून 2023 के बाद किसी भी देश द्वारा एक महीने में की गई सबसे बड़ी खरीद मानी जा रही है। रिपोर्ट के अनुसार, सऊदी ने करीब 3,260 ड्रोन खरीदे और प्रत्येक ड्रोन के लिए अन्य देशों की तुलना में लगभग 10 गुना अधिक कीमत चुकाई। इन ड्रोन का उपयोग औद्योगिक और सैन्य दोनों उद्देश्यों के लिए किया जा सकता है।

हालांकि सऊदी अरब और ईरान के बीच दशकों पुराना तनाव रहा है, लेकिन हालिया संघर्ष में रियाद ने सीधे सैन्य टकराव से दूरी बनाए रखी। विशेषज्ञों का मानना है कि इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि सऊदी नेतृत्व को आशंका है कि यदि वह सीधे युद्ध में शामिल होता है तो उसे ईरानी जवाबी हमलों का बड़ा खतरा झेलना पड़ सकता है, जबकि अमेरिका की सुरक्षा गारंटी को लेकर पहले जैसा भरोसा नहीं रह गया है।

हालिया संघर्ष के दौरान ईरान और उसके समर्थक समूहों ने खाड़ी क्षेत्र के कई देशों को निशाना बनाया। सऊदी अरब ने दावा किया कि उसकी वायु रक्षा प्रणाली ने सैकड़ों ड्रोन और मिसाइलों को मार गिराया, लेकिन कुछ हमलों में महत्वपूर्ण तेल प्रतिष्ठानों और सैन्य ठिकानों को नुकसान भी पहुंचा। इससे अमेरिकी नेतृत्व वाली रक्षा व्यवस्था की प्रभावशीलता पर सवाल उठे हैं।

इसी पृष्ठभूमि में सऊदी अरब ने अपने रक्षा सहयोग का दायरा बढ़ाना शुरू कर दिया है। पाकिस्तान के साथ हुए रक्षा समझौते के तहत पाकिस्तानी सैनिकों और लड़ाकू विमानों की सऊदी में तैनाती शुरू हो चुकी है। वहीं, यूक्रेन के साथ ड्रोन रोधी तकनीक और रक्षा सहयोग पर दीर्घकालिक समझौता हुआ है। ग्रीस की पैट्रियट मिसाइल प्रणाली भी सऊदी के ऊर्जा प्रतिष्ठानों की सुरक्षा में सक्रिय भूमिका निभा रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि सऊदी अरब अभी भी अमेरिका को अपना प्रमुख सुरक्षा साझेदार मानता है, लेकिन वह अब केवल एक देश पर निर्भर रहने की नीति से बाहर निकल रहा है। उसका उद्देश्य बदलते क्षेत्रीय सुरक्षा माहौल में कई देशों के साथ रक्षा सहयोग बढ़ाकर अपने रणनीतिक विकल्पों को मजबूत करना है।

विश्लेषकों के अनुसार, रियाद की सबसे बड़ी प्राथमिकता ईरान से सीधा युद्ध नहीं, बल्कि अपनी आर्थिक परियोजनाओं, ऊर्जा ढांचे और ‘विजन 2030’ कार्यक्रम को सुरक्षित रखना है। यही कारण है कि सऊदी अरब एक ओर अपनी सैन्य तैयारियां मजबूत कर रहा है, तो दूसरी ओर ईरान के साथ पूर्ण युद्ध से बचने की नीति पर भी कायम है।

0 0 votes
Article Rating
Subscribe
Notify of
guest
0 Comments
Oldest
Newest Most Voted