अंतरराष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | वॉशिंगटन | 16 जुलाई 2026
अमेरिका में अटॉर्नी जनरल पद के लिए नामित और फिलहाल कार्यवाहक अटॉर्नी जनरल टॉड ब्लांश सीनेट की न्यायिक समिति के सामने पुष्टि सुनवाई (Confirmation Hearing) में विपक्ष के तीखे सवालों के घेरे में आ गए। सुनवाई के दौरान ब्लांश ने पहली बार स्वीकार किया कि जेफ्री एपस्टीन फाइलों को जारी करने की प्रक्रिया में “गलतियां हुई थीं” और इसकी जिम्मेदारी भी उन्होंने ली।
डेमोक्रेट सांसदों ने ब्लांश पर आरोप लगाया कि वह पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बेहद करीबी रहे हैं और ऐसे में न्याय विभाग (DOJ) को स्वतंत्र रूप से चलाने में सक्षम नहीं होंगे। न्यू जर्सी के सीनेटर कोरी बुकर ने कहा कि 1,200 से अधिक वर्तमान और पूर्व न्याय विभाग अधिकारियों ने ब्लांश की नियुक्ति का विरोध किया है क्योंकि उन्हें उनकी स्वतंत्रता पर संदेह है।
सुनवाई के दौरान जेफ्री एपस्टीन मामले पर भी तीखी बहस हुई। सीनेटर बुकर ने सवाल उठाया कि ब्लांश ने एपस्टीन की सहयोगी घिसलेन मैक्सवेल से तो मुलाकात की, लेकिन पीड़ितों से मिलने से इनकार क्यों किया। उन्होंने यह भी पूछा कि क्या मैक्सवेल से पूछताछ के बाद किसी नए आरोपी के खिलाफ कार्रवाई हुई या उसे किसी तरह की राहत देने पर चर्चा हुई। ब्लांश ने अधिकांश सवालों के जवाब “नहीं” में दिए और कहा कि उन्होंने किसी प्रकार की रियायत या सजा में राहत पर चर्चा नहीं की।
हवाई की डेमोक्रेट सीनेटर मैजी हिरोनो ने ब्लांश पर आरोप लगाया कि वे ट्रंप के राजनीतिक विरोधियों के खिलाफ कार्रवाई का समर्थन करते हैं। हालांकि ब्लांश ने साफ कहा कि राष्ट्रपति को कानून के दायरे में न्याय विभाग का नेतृत्व करने का अधिकार है, लेकिन किसी राजनीतिक विरोधी को निशाना बनाने का नहीं। उन्होंने यह भी कहा कि न्यायाधीशों को केवल फैसलों के कारण महाभियोग का सामना नहीं करना चाहिए।
गर्भपात की दवा मिफेप्रिस्टोन को लेकर भी सुनवाई में सवाल उठे। रिपब्लिकन सांसदों ने डाक के जरिए भेजी जाने वाली गर्भपात की दवाओं पर सख्ती की मांग की। ब्लांश ने कहा कि विदेशों से भी ऐसी दवाएं अमेरिका पहुंच रही हैं और न्याय विभाग इस पर सख्त कार्रवाई करेगा। उन्होंने भरोसा दिलाया कि महिलाओं की सुरक्षा और कानून के पालन के लिए उपलब्ध सभी संसाधनों का इस्तेमाल किया जाएगा।
सुनवाई में ट्रंप के तीसरे कार्यकाल को लेकर भी सवाल पूछा गया। डेलावेयर के डेमोक्रेट सीनेटर क्रिस कून्स ने पूछा कि क्या ट्रंप 2028 में तीसरी बार राष्ट्रपति पद का चुनाव लड़ सकते हैं। इस पर ब्लांश ने स्पष्ट जवाब दिया कि अमेरिकी संविधान के अनुसार ट्रंप तीसरे कार्यकाल के लिए पात्र नहीं हैं।
एफबीआई निदेशक काश पटेल को लेकर भी तीखी बहस हुई। डेमोक्रेट सांसदों ने उनके कामकाज और कथित विवादों पर सवाल उठाए, लेकिन ब्लांश ने उनका बचाव करते हुए कहा कि उन्हें काश पटेल पर पूरा भरोसा है और वे अपना काम पूरी जिम्मेदारी से कर रहे हैं।
ईरानी शरणार्थियों को लेकर भी सुनवाई में सवाल उठे। ब्लांश ने कहा कि अमेरिका किसी व्यक्ति को ऐसे देश वापस नहीं भेजेगा जहां उसे प्रताड़ना या यातना का खतरा हो। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि यदि किसी मामले में जांच की आवश्यकता होगी तो न्याय विभाग कानून के अनुसार कार्रवाई करेगा।
सुनवाई के दौरान रिपब्लिकन सांसदों ने ब्लांश के कामकाज की सराहना भी की। उनका दावा था कि कार्यवाहक अटॉर्नी जनरल के रूप में उन्होंने स्वास्थ्य बीमा धोखाधड़ी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की, अवैध प्रवास से जुड़े मामलों में तेजी लाई और कई महत्वपूर्ण कानूनी फैसलों को आगे बढ़ाया।
अब सीनेट की मंजूरी मिलने के बाद ही यह तय होगा कि टॉड ब्लांश अमेरिका के स्थायी अटॉर्नी जनरल बनेंगे या नहीं। लेकिन सुनवाई ने यह साफ कर दिया कि उनकी नियुक्ति को लेकर अमेरिकी राजनीति में गहरा मतभेद बना हुआ है।




