अंतरराष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | वॉशिंगटन | 16 जुलाई 2026
दुनिया की दो सबसे बड़ी महाशक्तियों अमेरिका और चीन के बीच बढ़ती वैश्विक प्रतिस्पर्धा के बीच एक नया अंतरराष्ट्रीय सर्वे सामने आया है। अमेरिका स्थित प्रतिष्ठित शोध संस्था प्यू रिसर्च सेंटर (Pew Research Center) के ताजा अध्ययन के अनुसार, पहली बार दुनिया के अधिक देशों में लोगों की राय अमेरिका की तुलना में चीन के पक्ष में दिखाई दी है। सर्वे में शामिल 36 देशों में से 25 देशों के लोगों ने चीन के प्रति अमेरिका से अधिक सकारात्मक दृष्टिकोण व्यक्त किया।
प्यू रिसर्च सेंटर ने फरवरी से मई 2026 के बीच 36 देशों के 42 हजार से अधिक लोगों से बातचीत कर यह अध्ययन तैयार किया। रिपोर्ट के मुताबिक, चीन के प्रति सकारात्मक सोच कई देशों में अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गई है, जबकि अमेरिका के प्रति लोगों का भरोसा और सकारात्मक धारणा लगातार कमजोर हुई है।
रिपोर्ट के अनुसार, स्पेन, इटली, इंडोनेशिया, ग्रीस और कनाडा जैसे देशों में चीन के प्रति समर्थन में सबसे बड़ा बदलाव देखा गया। वहीं केवल छह देशों—भारत, जापान, दक्षिण कोरिया, पोलैंड, फिलीपींस और इजरायल—में अब भी अमेरिका को चीन से अधिक सकारात्मक नजरिए से देखा जाता है।
सर्वे में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग को लेकर भी लोगों की राय जानी गई। दोनों नेताओं पर भरोसे का स्तर अपेक्षाकृत कम रहा, लेकिन अधिकांश देशों में शी जिनपिंग को ट्रंप की तुलना में अधिक भरोसेमंद माना गया। पाकिस्तान में शी जिनपिंग पर सबसे अधिक 83 प्रतिशत लोगों ने भरोसा जताया, जबकि जापान में यह आंकड़ा केवल 7 प्रतिशत रहा। दूसरी ओर ट्रंप को सबसे अधिक समर्थन फिलीपींस में 68 प्रतिशत और सबसे कम वेस्ट बैंक तथा पूर्वी यरुशलम में केवल 4 प्रतिशत लोगों का मिला।
रिपोर्ट का एक महत्वपूर्ण निष्कर्ष यह भी है कि दुनिया के कई देशों में लोग अमेरिका की तुलना में चीन को दूसरे देशों के आंतरिक मामलों में कम दखल देने वाला देश मानते हैं। सर्वे में शामिल देशों के औसतन 75 प्रतिशत लोगों का मानना था कि अमेरिका अन्य देशों के मामलों में काफी हस्तक्षेप करता है, जबकि चीन के बारे में ऐसा मानने वालों की संख्या 45 प्रतिशत रही।
हालांकि व्यक्तिगत स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक अधिकारों के मामले में अमेरिका अब भी चीन से आगे माना गया है। अधिकांश लोगों का मानना है कि अमेरिकी सरकार अपने नागरिकों की व्यक्तिगत स्वतंत्रता का चीन की तुलना में अधिक सम्मान करती है, लेकिन दोनों देशों के बीच यह अंतर पहले की तुलना में कम हुआ है।
रिपोर्ट के अनुसार, मध्यम आय वाले देशों में चीन के प्रति सकारात्मक सोच अधिक देखने को मिली, जबकि विकसित और समृद्ध देशों में चीन को लेकर संदेह अपेक्षाकृत ज्यादा रहा। हालांकि सिंगापुर इस प्रवृत्ति का अपवाद रहा, जहां उच्च प्रति व्यक्ति आय होने के बावजूद चीन के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण दर्ज किया गया। एशिया-प्रशांत क्षेत्र में पाकिस्तान चीन का सबसे बड़ा समर्थक और जापान सबसे बड़ा आलोचक बनकर सामने आया।
विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिकी विदेश नीति में लगातार बदलाव, सैन्य हस्तक्षेप और वैश्विक तनावों ने कई देशों को असहज किया है। वहीं चीन ने विशेष रूप से विकासशील देशों में निवेश, बुनियादी ढांचे और आर्थिक सहयोग के जरिए अपनी छवि मजबूत करने का प्रयास किया है। हालांकि विश्लेषकों का यह भी कहना है कि चीन की बढ़ती स्वीकार्यता का अर्थ यह नहीं है कि उसकी नीतियों या नेतृत्व को लेकर सभी देशों की चिंताएं खत्म हो गई हैं।
यह सर्वे ऐसे समय सामने आया है जब अमेरिका और चीन के बीच व्यापार, तकनीक, सुरक्षा और वैश्विक प्रभाव को लेकर प्रतिस्पर्धा लगातार तेज हो रही है। ऐसे में यह रिपोर्ट संकेत देती है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जनमत का संतुलन धीरे-धीरे बदल रहा है और वैश्विक राजनीति में चीन की स्वीकार्यता पहले की तुलना में अधिक मजबूत होती दिखाई दे रही है।




