अंतरराष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | तेहरान/वॉशिंगटन | 16 जुलाई 2026
अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। ताजा घटनाक्रम में ईरान ने चेतावनी दी है कि यदि अमेरिका ने अपने सैन्य हमले और नाकेबंदी जारी रखी, तो वह होरमुज जलडमरूमध्य के अलावा क्षेत्र के अन्य महत्वपूर्ण तेल और गैस निर्यात मार्गों को भी बंद कर सकता है। इस बीच अमेरिकी सेना ने बुधवार को ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर ड्रोन, लड़ाकू विमानों और नौसैनिक बलों की मदद से नए हमले किए।
ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड (IRGC) ने कहा कि जब तक अमेरिका अपने “आक्रामक कदम” बंद नहीं करता, तब तक होरमुज जलडमरूमध्य बंद रहेगा। साथ ही अमेरिका और उसके सहयोगी देशों के हितों से जुड़े अन्य ऊर्जा निर्यात मार्गों को भी बंद करने की चेतावनी दी गई है। हालांकि ईरान ने यह स्पष्ट नहीं किया कि वह किन अन्य मार्गों को निशाना बना सकता है।
उधर अमेरिकी सेना की सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने दावा किया कि बुधवार सुबह 90 मिनट तक चले सैन्य अभियान में ईरान के ग्रेटर तुंब द्वीप पर स्थित तटीय रक्षा प्रणाली, क्रूज मिसाइल भंडारण केंद्र और लॉन्च साइटों को निशाना बनाया गया। अमेरिकी सेना का कहना है कि इन हमलों का उद्देश्य ईरान की उस क्षमता को कमजोर करना है, जिससे वह होरमुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक जहाजों पर हमला कर सके।
इससे पहले भी रातभर लगभग सात घंटे तक अमेरिकी सेना ने ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर हवाई हमले किए थे। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर चेतावनी दी है कि यदि ईरान बातचीत की मेज पर वापस नहीं लौटा, तो अगले सप्ताह उसके बिजली संयंत्रों और प्रमुख पुलों को भी निशाना बनाया जाएगा।
तनाव बढ़ने के साथ अमेरिका ने एक बार फिर ईरानी बंदरगाहों की समुद्री नाकेबंदी लागू कर दी है। इस नाकेबंदी के तहत जहाजों के ईरानी बंदरगाहों तक आने-जाने पर रोक लगा दी गई है। यह नाकेबंदी पिछले महीने हुए अस्थायी समझौते के तहत हटाई गई थी, लेकिन होरमुज जलडमरूमध्य को लेकर बढ़ते विवाद के बाद इसे फिर से लागू कर दिया गया।
नाकेबंदी के जवाब में ईरान ने भी कड़ा रुख अपनाया है। सरकारी मीडिया के अनुसार, ईरानी सेना ने जॉर्डन, कुवैत और बहरीन में अमेरिकी ठिकानों पर अलग-अलग हमले किए। हालांकि इन तीनों देशों ने दावा किया कि उनकी वायु रक्षा प्रणालियों ने ईरान की ओर से दागे गए ड्रोन और मिसाइलों को सफलतापूर्वक मार गिराया।
होरमुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक मार्गों में से एक है। वैश्विक स्तर पर तेल और प्राकृतिक गैस का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से होकर गुजरता है। इसलिए इस क्षेत्र में बढ़ता सैन्य तनाव केवल पश्चिम एशिया तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर पूरी दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।
लगातार बढ़ते हमलों और जवाबी कार्रवाइयों के बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल दर्ज किया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह संघर्ष और गहराया तथा ऊर्जा आपूर्ति बाधित हुई, तो दुनिया भर में ईंधन की कीमतों और महंगाई पर इसका व्यापक असर पड़ सकता है।




