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अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम का निधन, विवादित बयानों से अक्सर रहे सुर्खियों में

अंतरराष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | वॉशिंगटन | 12 जुलाई 2026

अमेरिका के वरिष्ठ रिपब्लिकन सीनेटर और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के करीबी सहयोगी लिंडसे ग्राहम का 71 वर्ष की आयु में संक्षिप्त बीमारी के बाद निधन हो गया। उनके कार्यालय ने आधिकारिक बयान जारी कर इस खबर की पुष्टि की। ग्राहम अपने लंबे राजनीतिक जीवन के दौरान विदेश नीति और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े आक्रामक रुख के लिए जाने जाते थे और कई बार अपने विवादित बयानों के कारण अंतरराष्ट्रीय सुर्खियों में रहे।

इसी वर्ष जनवरी में ग्राहम ने एक विधेयक का समर्थन किया था, जिसके तहत रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर 500 प्रतिशत तक आयात शुल्क लगाने का प्रावधान था। इस प्रस्ताव में भारत का भी उल्लेख किया गया था। उनका तर्क था कि ऐसे आर्थिक प्रतिबंधों के जरिए रूस की आय पर दबाव बनाया जा सकता है। बाद में उन्होंने दावा किया कि अमेरिकी दबाव के कारण भारत ने रूसी तेल की खरीद में कमी की है और इसे अमेरिकी नीति की सफलता बताया था।

ईरान को लेकर भी ग्राहम का रुख बेहद सख्त रहा। फॉक्स न्यूज को दिए एक साक्षात्कार में उन्होंने तत्कालीन सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई को “आधुनिक हिटलर” और “धार्मिक नाजी” बताया था। उन्होंने राष्ट्रपति ट्रंप से ईरानी नेतृत्व के खिलाफ कठोर कार्रवाई करने की अपील करते हुए कहा था कि क्षेत्र में स्थायी शांति के लिए शीर्ष नेतृत्व को हटाना आवश्यक है। उनके इस बयान की कई देशों और विश्लेषकों ने तीखी आलोचना की थी।

ग्रीनलैंड को लेकर भी ग्राहम का बयान विवादों में रहा। म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन के दौरान उन्होंने कहा था कि “किसके पास ग्रीनलैंड है, इससे मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता।” यूरोपीय देशों की चिंताओं को उन्होंने हल्के अंदाज में खारिज करते हुए कहा था कि अगर कोई चिंतित है तो “एक बीयर पी ले या डॉक्टर के पास चला जाए।”

लिंडसे ग्राहम 2003 से दक्षिण कैरोलिना का प्रतिनिधित्व कर रहे थे और अमेरिकी सीनेट में रक्षा, विदेश नीति तथा राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों में प्रभावशाली आवाज माने जाते थे। उनके निधन के साथ अमेरिकी राजनीति का एक ऐसा चेहरा विदा हो गया, जिसने अपने स्पष्ट, आक्रामक और कई बार विवादास्पद बयानों से वर्षों तक वैश्विक राजनीतिक बहस को प्रभावित किया।

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