अंतरराष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | तेहरान/वॉशिंगटन | 10 जुलाई 2026
पश्चिम एशिया में एक बार फिर युद्ध जैसे हालात बन गए हैं। ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार से ठीक पहले अमेरिका और ईरान के बीच लगातार दूसरे दिन भीषण सैन्य कार्रवाई हुई। दोनों देशों ने एक-दूसरे पर हमले किए, जिससे पूरे क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है। इस नई लड़ाई ने अप्रैल में हुए युद्धविराम और जून में हुए अमेरिका-ईरान समझौते पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
अमेरिकी सेना ने दावा किया कि उसने ईरान के करीब 90 सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। इन हमलों में मिसाइल लॉन्चर, ड्रोन ठिकाने, एयर डिफेंस सिस्टम और अन्य सैन्य सुविधाओं को निशाना बनाया गया। अमेरिका का कहना है कि यह कार्रवाई हॉर्मुज जलडमरूमध्य में अंतरराष्ट्रीय जहाजों पर हुए हमलों के जवाब में की गई है और इसका उद्देश्य समुद्री व्यापार की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
दूसरी ओर ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई करते हुए क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी हितों और उसके सहयोगी देशों को निशाना बनाया। ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार ईरान ने कुवैत, कतर, बहरीन और जॉर्डन की दिशा में मिसाइल और ड्रोन हमले किए। कई जगह एयर डिफेंस सिस्टम सक्रिय हुए और मिसाइलों को हवा में ही मार गिराया गया। बहरीन और जॉर्डन में कई बार हवाई हमले के सायरन बजाए गए, जिससे लोगों में दहशत फैल गई।
ईरान के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार अमेरिकी हमलों में अब तक कम से कम 14 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 78 लोग घायल हुए हैं। वहीं ईरानी मीडिया ने दावा किया कि दक्षिणी ईरान के बुशेहर क्षेत्र और तेहरान-मशहद रेलवे लाइन के पास भी अमेरिकी हमले हुए। बुशेहर में ईरान का प्रमुख परमाणु ऊर्जा संयंत्र स्थित है। हालांकि अमेरिका ने परमाणु संयंत्र पर सीधे हमले की पुष्टि नहीं की है।
खामेनेई के अंतिम संस्कार के कारण पूरे ईरान में सुरक्षा व्यवस्था बेहद कड़ी कर दी गई है। उनका पार्थिव शरीर मशहद पहुंच चुका है, जहां लाखों लोग अंतिम दर्शन के लिए जुटे हैं। अंतिम यात्रा के दौरान बड़ी संख्या में समर्थकों ने अमेरिका और इज़राइल के खिलाफ नारे लगाए और बदले की मांग की। खामेनेई की फरवरी में हुए अमेरिकी-इज़राइली हवाई हमलों में मौत हुई थी।
इस बीच ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराकची ने अमेरिका को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि सैन्य कार्रवाई जारी रही तो उसका कड़ा जवाब दिया जाएगा। उन्होंने ओमान, तुर्किये और कतर के नेताओं से बातचीत कर क्षेत्र में तनाव कम करने और कूटनीतिक समाधान तलाशने की अपील भी की।
कतर ने भी अमेरिका और ईरान दोनों से संयम बरतने और जून में हुए समझौते को लागू करने का आग्रह किया है। वहीं लेबनान में अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल इज़राइल की सैन्य वापसी से जुड़े समझौते की निगरानी के लिए पहुंचने वाला है।
हॉर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर भी विवाद लगातार गहराता जा रहा है। ईरान ने दोहराया है कि यह समुद्री मार्ग उसकी शर्तों के अनुसार ही पूरी तरह खोला जाएगा, जबकि अमेरिका का कहना है कि वह किसी भी कीमत पर इस अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग में जहाजों की आवाजाही बाधित नहीं होने देगा।
विश्लेषकों का मानना है कि यदि दोनों देशों के बीच सैन्य कार्रवाई इसी तरह जारी रही, तो इसका असर केवल पश्चिम एशिया तक सीमित नहीं रहेगा। वैश्विक तेल आपूर्ति, समुद्री व्यापार और अंतरराष्ट्रीय बाजार पर भी इसका गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। फिलहाल पूरी दुनिया की नजर इस बात पर टिकी है कि क्या दोनों देश फिर से बातचीत की मेज पर लौटेंगे या यह संघर्ष एक बड़े क्षेत्रीय युद्ध का रूप ले लेगा।




