राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 5 जुलाई 2026
अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे को लेकर उठे विवाद के बीच अब श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को सूचना के अधिकार (RTI) कानून के दायरे में लाने की मांग तेज हो गई है। मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (CPI-M) के राज्यसभा सांसद जॉन ब्रिटास ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर सरकार से इस मुद्दे पर दोबारा विचार करने की अपील की है।
जॉन ब्रिटास का कहना है कि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को केवल इसलिए RTI से बाहर नहीं रखा जा सकता कि उसे एक स्वायत्त संस्था बताया जाता है। उनका तर्क है कि इस ट्रस्ट का गठन सरकार द्वारा स्वीकृत योजना के तहत हुआ है, संसद के कानून के जरिए अधिग्रहित भूमि इसे सौंपी गई है और इसके प्रशासनिक ढांचे में सरकार की ओर से कार्यरत आईएएस अधिकारियों को भी शामिल किया गया है।
उन्होंने अपने पत्र में कहा कि जिस संस्था से करोड़ों लोगों की आस्था जुड़ी हो, उसे पारदर्शिता और जवाबदेही के सबसे ऊंचे मानकों का पालन करना चाहिए। उनका कहना है कि जनता का विश्वास तभी मजबूत होगा, जब ट्रस्ट के कामकाज में पूरी पारदर्शिता दिखाई दे।
जॉन ब्रिटास ने यह भी कहा कि सरकार को अपने पुराने रुख पर फिर से विचार करना चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट भी सूचना के अधिकार कानून के तहत जवाबदेह बने। उन्होंने अपने पत्र की प्रति सोशल मीडिया पर भी साझा की है।
गौरतलब है कि हाल के दिनों में राम मंदिर में चढ़ावे और दान से जुड़ी कथित गड़बड़ियों को लेकर राजनीतिक और कानूनी बहस तेज हो गई है। विपक्षी दल लगातार ट्रस्ट के कामकाज और वित्तीय लेन-देन में अधिक पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं। वहीं, ट्रस्ट की ओर से पहले भी सभी आरोपों से इनकार किया गया है और जांच में सहयोग की बात कही गई है।
अब देखना होगा कि केंद्र सरकार इस मांग पर क्या रुख अपनाती है। फिलहाल राम मंदिर ट्रस्ट को RTI के दायरे में लाने का मुद्दा राष्ट्रीय स्तर पर नई राजनीतिक और कानूनी चर्चा का विषय बन गया है।




