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MSP से भी कम दाम पर इथेनॉल कंपनियों को मिलेगा सरकारी चावल! नई OMSS नीति पर उठे बड़े सवाल

राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 4 जुलाई 2026

केंद्र सरकार ने वर्ष 2026-27 के लिए ओपन मार्केट सेल स्कीम (OMSS) की नई नीति जारी कर दी है। इस नीति के तहत भारतीय खाद्य निगम (FCI) के भंडार से इथेनॉल उत्पादन के लिए चावल 31 अक्टूबर 2026 तक ₹2,320 प्रति क्विंटल और उसके बाद ₹2,390 प्रति क्विंटल की आरक्षित कीमत पर उपलब्ध कराया जाएगा। यह दर न केवल वर्ष 2026-27 के धान के ₹2,441 प्रति क्विंटल MSP से कम है, बल्कि पिछले सीजन 2025-26 में किसानों से खरीदे गए ₹2,369 प्रति क्विंटल MSP से भी नीचे है।

₹4,100 लागत वाला चावल ₹2,320 में बेचने पर बहस

विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार धान खरीदने के बाद मिलिंग, भंडारण, परिवहन और अन्य खर्च भी वहन करती है। इन सभी खर्चों को जोड़ने पर चावल की अनुमानित आर्थिक लागत करीब ₹4,100 प्रति क्विंटल बैठती है। ऐसे में लगभग आधी कीमत पर इथेनॉल डिस्टिलरियों को चावल उपलब्ध कराने के फैसले ने नई बहस छेड़ दी है।

किसानों की आय बढ़ेगी या इथेनॉल उद्योग को मिलेगा फायदा?

नीति को लेकर सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जब सरकार स्वयं धान के MSP से कम कीमत पर चावल बेच रही है, तो किसानों को बेहतर मूल्य दिलाने का दावा कैसे पूरा होगा। सरकार लगातार इथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम को किसानों की आय बढ़ाने वाला कदम बताती रही है, लेकिन नई व्यवस्था पर कृषि क्षेत्र के जानकार सवाल उठा रहे हैं कि इसका वास्तविक लाभ किसानों को मिलेगा या इथेनॉल उद्योग को।

पुराने और टूटे चावल को प्राथमिकता देने की बात

सरकार ने OMSS नीति में यह भी कहा है कि इथेनॉल डिस्टिलरियों को आपूर्ति के लिए जहां तक संभव हो पुराने या टूटे (Broken) चावल का उपयोग किया जाएगा। साथ ही, इथेनॉल उत्पादन के लिए कितना चावल जारी किया जाएगा, इसका अंतिम निर्णय मंत्रियों की समिति करेगी।

सरकार के पास रिकॉर्ड भंडार, लेकिन बढ़ीं नई चिंताएँ

नई नीति ऐसे समय आई है जब FCI के पास गेहूं और चावल का पर्याप्त भंडार मौजूद है। वहीं कमजोर मानसून, अल नीनो की आशंका, वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और खाद्य महंगाई जैसी चुनौतियां भी सामने हैं। ऐसे में सार्वजनिक भंडार से कम कीमत पर चावल बेचने के निर्णय को लेकर खाद्य सुरक्षा, बाजार कीमतों और भविष्य की कृषि नीति पर व्यापक चर्चा शुरू हो गई है।

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