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अमेरिका में इथेनॉल पर सख्त नियम, भारत की नीति पर उठता सवाल

राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 4 जुलाई 2026

भारत में पेट्रोल में इथेनॉल मिश्रण बढ़ाने की सरकारी नीति के बीच अब सोशल मीडिया पर इस मुद्दे को लेकर नई बहस छिड़ गई है। कई विशेषज्ञों और सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं ने दावा किया है कि अमेरिका में इथेनॉल के इस्तेमाल को लेकर स्पष्ट तकनीकी और कानूनी सीमाएं तय हैं, जबकि भारत में भी ऐसी पारदर्शिता और स्पष्ट दिशा-निर्देशों की आवश्यकता है। इसी क्रम में केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी और पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी को टैग करते हुए कई पोस्ट साझा की जा रही हैं।

अमेरिका में अलग-अलग वाहनों के लिए अलग नियम

उपलब्ध जानकारी के अनुसार, अमेरिका की पर्यावरण संरक्षण एजेंसी (EPA) ने वाहनों की तकनीकी क्षमता के आधार पर इथेनॉल मिश्रण की अलग-अलग सीमाएं निर्धारित की हैं। सामान्य पेट्रोल कारों के लिए अधिकतम 10 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रण (E10) मान्य है, जबकि वर्ष 2001 और उसके बाद निर्मित कारों, एसयूवी और हल्के ट्रकों में 15 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रण (E15) के उपयोग की अनुमति है। वहीं 85 प्रतिशत तक इथेनॉल मिश्रण (E85) केवल विशेष रूप से डिजाइन किए गए फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों (FFVs) के लिए ही अनुमत है।

सामान्य कारों में E85 के उपयोग पर रोक

अमेरिकी नियमों के अनुसार, सामान्य (Non-Flex Fuel) वाहनों में E85 का उपयोग नहीं किया जा सकता, क्योंकि इससे इंजन और फ्यूल सिस्टम को नुकसान पहुंचने की आशंका रहती है। इसी कारण वहां इथेनॉल मिश्रण का उपयोग वाहन की तकनीकी क्षमता के अनुरूप ही किया जाता है।

भारत में नीति को लेकर उठे सवाल

सोशल मीडिया पर साझा किए जा रहे संदेशों में सवाल उठाया जा रहा है कि यदि अमेरिका जैसे देश में अलग-अलग वाहनों के लिए अलग इथेनॉल मानक लागू हैं, तो भारत में इथेनॉल मिश्रण बढ़ाने की नीति के दौरान सभी प्रकार के वाहनों की तकनीकी क्षमता और उपभोक्ताओं के हितों का किस प्रकार आकलन किया गया है। कुछ लोगों ने इस विषय पर सार्वजनिक तकनीकी प्रदर्शन और वैज्ञानिक परीक्षण की भी मांग की है।

सरकार इथेनॉल मिश्रण को दे रही है बढ़ावा

केंद्र सरकार लंबे समय से पेट्रोल में इथेनॉल मिश्रण बढ़ाने की नीति पर काम कर रही है। सरकार का कहना है कि इससे कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम होगी, किसानों को अतिरिक्त आय मिलेगी और पर्यावरण प्रदूषण में भी कमी आएगी। भारत ने निर्धारित समय से पहले 20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रण (E20) का लक्ष्य हासिल करने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति का दावा भी किया है।

तकनीकी जागरूकता पर जोर

विशेषज्ञों का मानना है कि इथेनॉल मिश्रण को लेकर उपभोक्ताओं में तकनीकी जागरूकता बढ़ाना आवश्यक है। वाहन निर्माता कंपनियों, तेल विपणन कंपनियों और सरकार को यह स्पष्ट रूप से बताना चाहिए कि कौन-सा वाहन किस स्तर के इथेनॉल मिश्रण के लिए उपयुक्त है, ताकि वाहन मालिक किसी भी तरह की तकनीकी समस्या से बच सकें। साथ ही, इस विषय पर तथ्यों और आधिकारिक दिशानिर्देशों के आधार पर सार्वजनिक संवाद भी आवश्यक माना जा रहा है।

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