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UN रिपोर्ट का बड़ा दावा: गाज़ा में बच्चों की टारगेट किलिंग ‘नरसंहार की बड़ी योजना’ का हिस्सा हो सकती है

अंतरराष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 30 जून 2026

गाज़ा में जारी युद्ध को लेकर संयुक्त राष्ट्र (UN) की एक स्वतंत्र जांच समिति ने बेहद गंभीर टिप्पणी की है। समिति के अध्यक्ष और भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश जस्टिस एस. मुरलीधर ने कहा है कि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर यह मानने के उचित कारण हैं कि फिलिस्तीनी बच्चों को निशाना बनाकर की जा रही हत्याएं व्यापक नरसंहार (Genocide) की एक बड़ी योजना का हिस्सा हो सकती हैं।

एक साक्षात्कार में जस्टिस मुरलीधर ने कहा कि जब किसी बच्चे को “आतंकवादी” का ठप्पा लगा दिया जाता है, तो वह सुरक्षा बलों के लिए “आसान निशाना” बन जाता है। उन्होंने कहा कि इस तरह की सोच अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून और मानवाधिकारों के लिए बेहद खतरनाक है।

संयुक्त राष्ट्र की स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय जांच समिति की रिपोर्ट के अनुसार, 7 अक्टूबर 2023 के बाद से गाज़ा और अन्य कब्जे वाले फिलिस्तीनी क्षेत्रों में इज़रायली सुरक्षा बलों की कार्रवाई के दौरान कम से कम 20,179 बच्चों की मौत हुई है, जबकि 44,143 से अधिक बच्चे घायल हुए हैं। रिपोर्ट में महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों को सबसे अधिक प्रभावित वर्ग बताया गया है।

जस्टिस मुरलीधर ने कहा कि जांच के दौरान ऐसे कई पैटर्न सामने आए हैं, जो यह संकेत देते हैं कि नागरिक आबादी, विशेषकर बच्चों को व्यवस्थित तरीके से निशाना बनाया गया। उन्होंने कहा कि यदि किसी संघर्ष में बच्चों की इतनी बड़ी संख्या में मौतें और घायल होने की घटनाएं सामने आती हैं, तो अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए इनकी निष्पक्ष जांच करना आवश्यक हो जाता है।

उन्होंने यह भी कहा कि संयुक्त राष्ट्र की जांच समिति का उद्देश्य किसी राजनीतिक पक्ष का समर्थन करना नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय कानून के संभावित उल्लंघनों की निष्पक्ष जांच करना है। समिति उपलब्ध साक्ष्यों, गवाहों के बयान और अन्य प्रमाणों के आधार पर अपनी रिपोर्ट तैयार करती है।

इज़रायल लगातार यह कहता रहा है कि उसकी सैन्य कार्रवाई का लक्ष्य हमास के ठिकाने हैं और नागरिकों को नुकसान पहुंचाने का कोई उद्देश्य नहीं है। इज़रायली सरकार का आरोप है कि हमास नागरिक इलाकों का इस्तेमाल सैन्य गतिविधियों के लिए करता है, जिससे आम नागरिक भी संघर्ष की चपेट में आ जाते हैं। दूसरी ओर, संयुक्त राष्ट्र और कई अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों ने नागरिकों, विशेषकर बच्चों और महिलाओं की बड़ी संख्या में हुई मौतों पर गंभीर चिंता जताई है।

गाज़ा युद्ध को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहले से ही तीखी बहस जारी है। कई देशों और मानवाधिकार संगठनों ने स्वतंत्र जांच और जवाबदेही की मांग की है, जबकि इज़रायल ने अपने सैन्य अभियान को आत्मरक्षा का अधिकार बताया है।

संयुक्त राष्ट्र की इस टिप्पणी के बाद गाज़ा संघर्ष और इज़रायल की सैन्य कार्रवाई को लेकर वैश्विक बहस और तेज होने की संभावना है। हालांकि, किसी भी पक्ष की कानूनी जिम्मेदारी का अंतिम निर्धारण अंतरराष्ट्रीय न्यायिक और जांच प्रक्रियाओं के पूरा होने के बाद ही होगा।

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