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10वें दिन भी जारी CJP का प्रदर्शन: छात्र आत्महत्याओं पर सरकार की ‘संवेदनहीनता’ का आरोप, सोनम वांगचुक का अनशन दूसरे दिन जारी

राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 29 जून 2026

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्र आत्महत्याओं, परीक्षा व्यवस्था में कथित अनियमितताओं और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर चल रहा कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का विरोध प्रदर्शन सोमवार को दसवें दिन में प्रवेश कर गया। इस दौरान पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने केंद्र सरकार पर छात्र आत्महत्याओं के मामलों को लेकर संवेदनहीन रवैया अपनाने का आरोप लगाया। वहीं, लद्दाख के सामाजिक कार्यकर्ता और पर्यावरणविद् सोनम वांगचुक का आमरण अनशन भी दूसरे दिन जारी रहा।

प्रदर्शन के दौरान अभिजीत दिपके ने हाल के महीनों में सामने आए छात्र आत्महत्या के मामलों का उल्लेख करते हुए कहा कि कई परिवार आज भी न्याय की प्रतीक्षा कर रहे हैं। उन्होंने प्रदीप मेघवाल, आकांक्षा चतुर्वेदी, अमायरा कुमार और कहान पटेल जैसे छात्रों के नाम लेते हुए आरोप लगाया कि इन परिवारों के प्रति सरकार ने कोई संवेदनशीलता नहीं दिखाई। उनका दावा था कि अब तक सरकार की ओर से किसी वरिष्ठ प्रतिनिधि ने इन परिवारों से संपर्क कर शोक या संवेदना तक व्यक्त नहीं की।

दिपके ने कहा कि परीक्षा प्रणाली में लगातार सामने आ रही कथित गड़बड़ियां, छात्रों पर बढ़ता मानसिक दबाव और आत्महत्या जैसी घटनाएं देश की शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े करती हैं। उनका आरोप था कि सरकार इन मुद्दों पर जवाबदेही तय करने के बजाय उन्हें नजरअंदाज कर रही है। उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग दोहराते हुए शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार की आवश्यकता बताई।

इधर, जंतर-मंतर पर मौजूद सोनम वांगचुक का अनशन भी दूसरे दिन जारी रहा। वांगचुक ने लोगों से आंदोलन का समर्थन करने और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज बुलंद करने की अपील की। उन्होंने कहा कि उनका अनशन केवल एक संगठन के समर्थन तक सीमित नहीं है, बल्कि लद्दाख से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों, छात्रों की समस्याओं और लोकतांत्रिक जवाबदेही की मांग का भी प्रतीक है।

प्रदर्शन स्थल पर विभिन्न सामाजिक संगठनों और राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों ने भी पहुंचकर समर्थन व्यक्त किया। वामपंथी नेता बृंदा करात और माकपा महासचिव एम. ए. बेबी भी प्रदर्शन स्थल पर पहुंचे और आंदोलनकारियों के साथ एकजुटता दिखाई। उन्होंने शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर बल दिया।

पिछले कुछ समय से देश में विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं, मूल्यांकन प्रक्रिया और परीक्षा प्रबंधन को लेकर लगातार विवाद सामने आते रहे हैं। परीक्षा में कथित अनियमितताओं और छात्रों पर बढ़ते मानसिक दबाव को लेकर कई छात्र संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने चिंता व्यक्त की है। इसी पृष्ठभूमि में यह आंदोलन शुरू किया गया, जो अब लगातार लंबा होता जा रहा है।

हालांकि, केंद्र सरकार ने इन आरोपों पर विस्तृत प्रतिक्रिया नहीं दी है। सरकार पहले भी कह चुकी है कि परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं तथा अनियमितताओं के मामलों में संबंधित एजेंसियों द्वारा जांच की जा रही है।

फिलहाल जंतर-मंतर पर आंदोलन जारी है और प्रदर्शनकारी अपनी मांगों पर कायम हैं। आंदोलनकारियों का कहना है कि जब तक छात्र आत्महत्याओं के मामलों में जवाबदेही तय नहीं होती, शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए ठोस कदम नहीं उठाए जाते और प्रभावित परिवारों को न्याय नहीं मिलता, तब तक उनका विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा।

यह आंदोलन अब केवल परीक्षा संबंधी विवादों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य, संस्थागत जवाबदेही और सरकार की संवेदनशीलता जैसे व्यापक मुद्दों को भी राष्ट्रीय बहस के केंद्र में ले आया है।

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