राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली/कोट्टायम | 23 जून 2026
केंद्र सरकार में अल्पसंख्यक मामलों के राज्य मंत्री रहे जॉर्ज कुरियन ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया है। राज्यसभा सदस्य के रूप में उनका कार्यकाल समाप्त होने के बाद यह फैसला सामने आया है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इसे केवल एक औपचारिक विदाई नहीं बल्कि बीजेपी की केरल रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है।
बीजेपी सूत्रों के अनुसार जॉर्ज कुरियन ने पार्टी नेतृत्व को स्पष्ट संकेत दिया है कि वे अब केरल की सक्रिय राजनीति और संगठनात्मक जिम्मेदारियों में अधिक भूमिका निभाना चाहते हैं। माना जा रहा है कि आने वाले विधानसभा और स्थानीय निकाय चुनावों को देखते हुए पार्टी दक्षिण भारत, विशेषकर केरल में अपने संगठन को मजबूत करने की तैयारी कर रही है और इसी रणनीति के तहत कुरियन को नई जिम्मेदारी मिल सकती है।
जॉर्ज कुरियन लंबे समय से बीजेपी के प्रमुख ईसाई चेहरों में गिने जाते रहे हैं। केरल में पार्टी के विस्तार अभियान में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। ऐसे समय में जब बीजेपी राज्य में ईसाई समुदाय के बीच अपनी राजनीतिक स्वीकार्यता बढ़ाने का प्रयास कर रही है, कुरियन की वापसी को एक महत्वपूर्ण राजनीतिक संकेत माना जा रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह इस्तीफा केवल संसदीय कार्यकाल समाप्त होने का परिणाम नहीं है। इसके पीछे केरल में पार्टी की दीर्घकालिक राजनीतिक योजना भी हो सकती है। पिछले कुछ वर्षों में बीजेपी ने केरल में अपनी मौजूदगी बढ़ाने के लिए कई नए सामाजिक और राजनीतिक समीकरण बनाने की कोशिश की है। ऐसे में संगठनात्मक अनुभव रखने वाले नेताओं को राज्य में वापस भेजना उसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
दिलचस्प बात यह है कि केरल में राजनीतिक मुकाबला पारंपरिक रूप से वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (LDF) और यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) के बीच रहा है। बीजेपी अभी तक राज्य में बड़ी चुनावी सफलता हासिल नहीं कर पाई है, लेकिन पार्टी लगातार अपना जनाधार बढ़ाने के प्रयास में जुटी हुई है। जॉर्ज कुरियन जैसे नेताओं को संगठन में अधिक सक्रिय भूमिका देना इसी दिशा में एक कदम माना जा रहा है।
केंद्र सरकार में मंत्री के रूप में कुरियन का कार्यकाल अपेक्षाकृत शांत रहा, लेकिन अल्पसंख्यक समुदायों के बीच संवाद बढ़ाने और पार्टी की पहुंच मजबूत करने के प्रयासों में उनकी भूमिका को महत्वपूर्ण माना जाता है। अब देखना होगा कि पार्टी उन्हें केरल में कौन-सी जिम्मेदारी सौंपती है और क्या वे राज्य की राजनीति में बीजेपी के लिए नया समीकरण तैयार कर पाते हैं।
फिलहाल इतना स्पष्ट है कि जॉर्ज कुरियन की केंद्रीय मंत्रिमंडल से विदाई केवल एक प्रशासनिक बदलाव नहीं, बल्कि बीजेपी की केरल राजनीति में संभावित पुनर्संरचना का संकेत भी हो सकती है। आने वाले महीनों में पार्टी के संगठनात्मक फैसले यह तय करेंगे कि इस बदलाव का वास्तविक राजनीतिक प्रभाव कितना व्यापक होगा।




