अंतरराष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | बीजिंग | 23 जून 2026
अलीबाबा-बायडू पर अमेरिकी कार्रवाई के बाद बीजिंग का जवाब, रक्षा क्षेत्र से जुड़ी कंपनियों पर निर्यात रोक
दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं अमेरिका और चीन के बीच तकनीकी और व्यापारिक टकराव अब एक नए दौर में प्रवेश करता दिखाई दे रहा है। अमेरिकी प्रशासन द्वारा कई प्रमुख चीनी टेक कंपनियों को सैन्य संबंधों के आरोप में ब्लैकलिस्ट किए जाने के बाद चीन ने भी करारा जवाब दिया है।
चीन ने सोमवार को 10 अमेरिकी रक्षा एवं सैन्य क्षेत्र से जुड़ी कंपनियों पर प्रतिबंध लगाने की घोषणा की। बीजिंग ने स्पष्ट किया कि अब चीनी कंपनियां इन अमेरिकी संस्थाओं को ऐसे उत्पाद और तकनीक निर्यात नहीं कर सकेंगी जिनका उपयोग सैन्य और नागरिक दोनों उद्देश्यों के लिए किया जा सकता है।
चीन के वाणिज्य मंत्रालय ने कहा कि यह फैसला देश की राष्ट्रीय सुरक्षा की रक्षा और अमेरिका द्वारा तथाकथित “चीनी सैन्य कंपनियों” की सूची का विस्तार करने के जवाब में लिया गया है।
किन कंपनियों पर गिरी गाज?
प्रतिबंधित कंपनियों में अमेरिकी सैन्य ड्रोन निर्माता, रक्षा ठेकेदार और रेयर अर्थ खनन क्षेत्र से जुड़ी कई संस्थाएं शामिल हैं। इसके अलावा चीन के वित्त मंत्रालय ने 46 अमेरिकी कंपनियों के उत्पादों की सरकारी खरीद पर भी रोक लगा दी है।
इन कंपनियों में रक्षा क्षेत्र की दिग्गज कंपनियां लॉकहीड मार्टिन, रेथियॉन और जनरल डायनेमिक्स की कई इकाइयां शामिल हैं। हालांकि चीन ने इस फैसले के पीछे विस्तृत कारण सार्वजनिक नहीं किए हैं।
क्या है पूरा विवाद?
कुछ सप्ताह पहले अमेरिका के रक्षा विभाग ने अलीबाबा, बायडू समेत कई बड़ी चीनी टेक कंपनियों को उन संस्थाओं की सूची में शामिल किया था जिनके चीन की सेना से कथित संबंध बताए गए थे।
अमेरिका का दावा है कि इन कंपनियों की तकनीक और संसाधनों का इस्तेमाल चीनी सैन्य क्षमताओं को मजबूत करने में किया जा सकता है। वहीं चीन और संबंधित कंपनियों ने इन आरोपों को निराधार बताते हुए खारिज कर दिया है।
बायडू ने अमेरिकी आरोपों को “पूरी तरह बेबुनियाद” करार दिया था।
प्रतीकात्मक ज्यादा, आर्थिक असर कम?
विशेषज्ञों का मानना है कि चीन का यह कदम राजनीतिक और रणनीतिक संदेश ज्यादा है, जबकि आर्थिक प्रभाव सीमित रह सकता है।
एशिया ग्रुप के ग्रेटर चाइना पार्टनर जॉर्ज चेन के अनुसार, प्रतिबंधित अधिकांश अमेरिकी कंपनियां पहले से ही चीन में व्यापक कारोबारी गतिविधियां नहीं करतीं। ऐसे में इस कदम का प्रत्यक्ष आर्थिक असर सीमित रहेगा, लेकिन दोनों देशों के बीच बढ़ते अविश्वास का यह स्पष्ट संकेत है।
टेक्नोलॉजी से रक्षा तक बढ़ी प्रतिस्पर्धा
पिछले कुछ वर्षों में अमेरिका और चीन के बीच प्रतिस्पर्धा केवल व्यापार तक सीमित नहीं रही है। सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, 5G नेटवर्क, साइबर सुरक्षा, रेयर अर्थ मिनरल्स और रक्षा तकनीक जैसे क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच तनाव लगातार बढ़ रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह टकराव आने वाले वर्षों में वैश्विक सप्लाई चेन, निवेश प्रवाह और तकनीकी विकास पर भी गहरा प्रभाव डाल सकता है।
दुनिया की नजरें वॉशिंगटन और बीजिंग पर
ऐसे समय में जब पश्चिम एशिया संकट, वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता और ऊर्जा बाजार पहले से दबाव में हैं, अमेरिका और चीन के बीच बढ़ता यह टकराव वैश्विक बाजारों की चिंता बढ़ा सकता है।
साफ है कि दुनिया की दो महाशक्तियों के बीच “टेक्नोलॉजी वॉर” अब केवल बयानबाजी तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रतिबंधों, जवाबी कार्रवाई और रणनीतिक प्रतिस्पर्धा के नए चरण में प्रवेश कर चुकी है।




