राष्ट्रीय/महाराष्ट्र | ABC NATIONAL NEWS | मुंबई | 20 जून 2026
महाराष्ट्र की राजनीति में शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के भीतर चल रहा संकट लगातार गहराता जा रहा है। पार्टी के छह असंतुष्ट सांसद लगातार दूसरे दिन भी महत्वपूर्ण संगठनात्मक कार्यक्रमों से दूर रहे, जिससे संभावित टूट और राजनीतिक बगावत की अटकलें और तेज हो गई हैं। शिवसेना के 60वें स्थापना दिवस समारोह में इन सांसदों की अनुपस्थिति ने स्पष्ट संकेत दे दिया है कि पार्टी के भीतर मतभेद अब केवल अफवाह नहीं, बल्कि एक गंभीर राजनीतिक चुनौती का रूप ले चुके हैं।
सूत्रों के अनुसार, असंतुष्ट सांसदों का समूह अलग राजनीतिक गुट बनाने और बाद में मुख्यमंत्री रह चुके एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल होने की तैयारी कर रहा है। यदि ऐसा होता है तो वर्ष 2022 में एकनाथ शिंदे की बगावत के बाद यह उद्धव ठाकरे के लिए दूसरा बड़ा राजनीतिक झटका होगा।
जिन सांसदों के नाम इस संभावित बगावत से जुड़े बताए जा रहे हैं उनमें संजय दिना पाटिल, नागेश पाटिल-अष्टीकर, ओमराजे निंबालकर, भाऊसाहेब वाकचौरे, संजय देशमुख और संजय जाधव शामिल हैं। उल्लेखनीय है कि ये सभी सांसद एक दिन पहले दिल्ली में आयोजित संसदीय दल की बैठक से भी अनुपस्थित रहे थे, जबकि पार्टी नेतृत्व ने औपचारिक व्हिप जारी किया था।
इस बीच पार्टी प्रमुख उद्धव ठाकरे ने स्थापना दिवस समारोह के मंच से कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए संगठन में व्याप्त असमंजस और अफवाहों पर जवाब देने की कोशिश की। उन्होंने विशेष रूप से उन चर्चाओं को खारिज किया जिनमें दावा किया जा रहा था कि शिवसेना (यूबीटी) भविष्य में कांग्रेस में विलय कर सकती है।
उद्धव ठाकरे ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि शिवसेना का गठन मराठी मानुष के अधिकारों और अस्मिता की रक्षा के लिए हुआ था और किसी भी राजनीतिक दल में उसके विलय का सवाल ही नहीं उठता। उन्होंने कहा, “हमने 30 वर्षों तक भाजपा के साथ गठबंधन किया, लेकिन कभी उसमें विलय नहीं किया। फिर कांग्रेस में विलय का प्रश्न ही क्यों उठेगा?” उनके इस बयान को पार्टी के भीतर फैली उस आशंका का जवाब माना जा रहा है जिसे कुछ असंतुष्ट सांसद अपनी नाराजगी का कारण बता रहे हैं।
दरअसल, शिंदे गुट के सांसद नरेश म्हास्के ने दावा किया था कि कई सांसदों को आशंका है कि उद्धव ठाकरे अंततः कांग्रेस के साथ अपनी पार्टी का विलय कर सकते हैं। इसी कारण कुछ सांसद अलग रास्ता अपनाने पर विचार कर रहे हैं। हालांकि उद्धव ठाकरे ने इन दावों को पूरी तरह निराधार बताया।
अपने भाषण में उद्धव ठाकरे भावुक भी दिखाई दिए। उन्होंने कहा कि यदि पार्टी कार्यकर्ताओं का उन पर भरोसा नहीं है तो वे पद छोड़ने के लिए तैयार हैं। उन्होंने कहा, “मैं चुनौतियों से भागने वाला व्यक्ति नहीं हूं, लेकिन यदि आपको मुझ पर विश्वास नहीं है तो मैं पद छोड़ने को तैयार हूं।” इस बयान को राजनीतिक संकट के बीच कार्यकर्ताओं से भावनात्मक जुड़ाव बनाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
उद्धव ठाकरे ने भाजपा पर भी तीखा हमला बोला और आरोप लगाया कि देश में विपक्षी दलों को कमजोर करने तथा क्षेत्रीय राजनीतिक ताकतों को समाप्त करने की रणनीति पर काम किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में निर्वाचित प्रतिनिधियों की खरीद-फरोख्त जैसी घटनाएं जनता का विश्वास कमजोर कर रही हैं। उन्होंने चिंता जताते हुए कहा कि यदि यह सिलसिला जारी रहा तो देश अराजकता की ओर बढ़ सकता है।
कार्यक्रम के दौरान उन्होंने उन मतदाताओं से सार्वजनिक रूप से माफी भी मांगी जिन्होंने 2024 के लोकसभा चुनाव में पार्टी उम्मीदवारों को वोट दिया था और जिनके सांसद अब बगावत की राह पर दिखाई दे रहे हैं। उद्धव ने कहा कि जनता ने बालासाहेब ठाकरे के नाम और शिवसेना की विचारधारा पर भरोसा करके वोट दिया था और यदि निर्वाचित प्रतिनिधि उस विश्वास को तोड़ते हैं तो यह लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है।
उधर पार्टी के वरिष्ठ नेता संजय राउत ने भी असंतुष्ट सांसदों पर हमला तेज कर दिया है। उन्होंने बागी नेताओं को “गद्दार”, “बेईमान” और “धोखेबाज” तक कहा है। राजनीतिक तनाव को देखते हुए महाराष्ट्र खुफिया विभाग ने छह असंतुष्ट सांसदों को वाई-प्लस श्रेणी के बराबर सुरक्षा उपलब्ध कराई है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले कुछ दिन शिवसेना (यूबीटी) के भविष्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं। यदि असंतुष्ट सांसद औपचारिक रूप से अलग गुट बनाते हैं तो महाराष्ट्र की राजनीति में एक और बड़ा पुनर्गठन देखने को मिल सकता है। फिलहाल उद्धव ठाकरे संगठन को बचाने और कार्यकर्ताओं को एकजुट रखने की कोशिश में जुटे हैं, जबकि विरोधी खेमे की गतिविधियों ने राज्य की राजनीति को नई दिशा दे दी है।




