अंतरराष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 20 जून 2026
करीब तीन वर्षों से जारी युद्ध और सैन्य अभियानों के बीच फ़िलिस्तीन की स्वास्थ्य व्यवस्था गंभीर संकट से गुजर रही है। भारत में फ़िलिस्तीन के राजदूत अब्दुल्ला एम. अबू शावेश ने भारत सरकार और भारतीय मानवीय संगठनों से तत्काल सहायता की अपील करते हुए कहा है कि गाजा और वेस्ट बैंक के अस्पताल “व्यवस्था के पतन” की स्थिति में पहुंच चुके हैं और जीवनरक्षक दवाओं से लेकर चिकित्सा उपकरणों तक की भारी कमी का सामना कर रहे हैं।
नई दिल्ली में आयोजित एक प्रेस वार्ता में राजदूत अबू शावेश ने कहा कि फ़िलिस्तीनी अस्पतालों में कैंसर की दवाएं, इंसुलिन, डायलिसिस फ़िल्टर, सर्जिकल उपकरण और अन्य आवश्यक चिकित्सा सामग्री तेजी से खत्म हो रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द मदद नहीं पहुंची तो हजारों मरीजों की जान खतरे में पड़ सकती है।
फ़िलिस्तीनी राजदूत ने भारत सरकार की ‘आरोग्य मैत्री’ पहल का उल्लेख करते हुए कहा कि जिस तरह भारत ने दुनिया के कई संकटग्रस्त देशों को चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई है, उसी प्रकार इस मानवीय परियोजना का विस्तार फ़िलिस्तीन तक भी किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में गाजा और वेस्ट बैंक की स्वास्थ्य व्यवस्था को अंतरराष्ट्रीय सहयोग की सबसे अधिक आवश्यकता है।
अबू शावेश ने बताया कि लगातार संघर्ष और बुनियादी ढांचे को हुए नुकसान के कारण अस्पतालों की क्षमता बुरी तरह प्रभावित हुई है। अनेक चिकित्सा केंद्र आंशिक रूप से काम कर रहे हैं जबकि कई अस्पतालों में बिजली, दवाओं और प्रशिक्षित कर्मियों की कमी से इलाज की प्रक्रिया प्रभावित हो रही है। विशेष रूप से कैंसर, किडनी, मधुमेह और गंभीर बीमारियों से पीड़ित मरीजों के सामने जीवन और मृत्यु का संकट खड़ा हो गया है।
उन्होंने भारतीय नागरिक समाज, गैर-सरकारी संगठनों, चिकित्सा संस्थानों और राहत एजेंसियों से भी आगे आने की अपील की। उनका कहना था कि भारत और फ़िलिस्तीन के बीच ऐतिहासिक मित्रता और मानवीय संबंध रहे हैं तथा ऐसे कठिन समय में भारत की भूमिका लाखों लोगों के लिए राहत का कारण बन सकती है।
फ़िलिस्तीनी पक्ष का दावा है कि स्वास्थ्य क्षेत्र पर संकट केवल गाजा तक सीमित नहीं है बल्कि वेस्ट बैंक के कई क्षेत्रों में भी चिकित्सा सेवाएं गंभीर दबाव में हैं। आवश्यक दवाओं की आपूर्ति बाधित होने और चिकित्सा उपकरणों की कमी ने स्थिति को और जटिल बना दिया है।
गौरतलब है कि पश्चिम एशिया में लंबे समय से जारी संघर्ष के कारण मानवीय संकट लगातार गहराता गया है। संयुक्त राष्ट्र और कई अंतरराष्ट्रीय राहत संगठनों ने भी समय-समय पर चेतावनी दी है कि स्वास्थ्य, खाद्य और बुनियादी सेवाओं की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।
ऐसे समय में फ़िलिस्तीन द्वारा भारत से की गई यह अपील केवल कूटनीतिक अनुरोध नहीं, बल्कि मानवीय सहायता की एक तत्काल पुकार के रूप में देखी जा रही है। अब निगाहें भारत सरकार और भारतीय राहत संगठनों की प्रतिक्रिया पर टिकी हैं कि वे इस संकटग्रस्त क्षेत्र की सहायता के लिए क्या कदम उठाते हैं।




