शिक्षा | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 15 जून 2026
गरीब और वंचित बच्चों को निजी स्कूलों में शिक्षा दिलाने के लिए बनाए गए शिक्षा का अधिकार (RTE) कानून को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण हस्तक्षेप किया है। सर्वोच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार और पंजाब सरकार से जवाब मांगा है कि आखिर राज्य में निजी स्कूलों में आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों और वंचित समूहों के बच्चों के लिए 25 प्रतिशत सीटें आरक्षित करने के कानून का सही तरीके से पालन क्यों नहीं हो रहा है।
मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति वी. मोहन की पीठ एक जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिका में आरोप लगाया गया है कि पंजाब में RTE कानून की धारा 12(1)(c) का प्रभावी क्रियान्वयन नहीं हो रहा है। इस प्रावधान के तहत निजी गैर-सहायता प्राप्त स्कूलों को प्रवेश स्तर पर 25 प्रतिशत सीटें गरीब और वंचित वर्ग के बच्चों के लिए आरक्षित रखना अनिवार्य है।
सुनवाई के दौरान अदालत ने याचिकाकर्ता से पूछा कि क्या उनके पास अपने आरोपों को साबित करने के लिए कोई सर्वेक्षण या ठोस आंकड़े हैं। याचिकाकर्ता, जो एक NGO चलाते हैं, स्वयं अदालत में उपस्थित हुए थे। उन्होंने दावा किया कि पंजाब के निजी स्कूलों में हर वर्ष लगभग दो लाख बच्चों को प्रवेश मिलता है और कानून के अनुसार कम से कम 50 हजार बच्चों को RTE कोटे के तहत दाखिला मिलना चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता को सुझाव दिया कि वह किसी एक जिले में सर्वेक्षण कर यह पता लगाएं कि कितने निजी स्कूल RTE कानून का पालन नहीं कर रहे हैं। अदालत ने कहा कि केवल सामान्य आरोपों के बजाय वास्तविक आंकड़े और प्रमाण प्रस्तुत करना आवश्यक है।
RTE कानून वर्ष 2009 में लागू किया गया था। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को भी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके। कानून के अनुसार निजी स्कूलों को प्रवेश स्तर पर 25 प्रतिशत सीटें आरक्षित करनी होती हैं और इसके बदले सरकार उन्हें निर्धारित राशि का भुगतान करती है।
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कानून का पूरी तरह पालन हो तो हजारों गरीब बच्चों को बेहतर शिक्षा का अवसर मिल सकता है। लेकिन कई राज्यों में वर्षों से यह शिकायत सामने आती रही है कि निजी स्कूल या तो इस प्रावधान का पालन नहीं करते या फिर प्रक्रिया को इतना जटिल बना देते हैं कि पात्र परिवार इसका लाभ नहीं उठा पाते।
अब केंद्र और पंजाब सरकार को सुप्रीम कोर्ट के समक्ष अपना पक्ष रखना होगा। इस मामले की अगली सुनवाई में अदालत यह तय कर सकती है कि RTE कानून के पालन को लेकर आगे क्या कदम उठाए जाएं। शिक्षा के अधिकार से जुड़े इस मामले पर देशभर के अभिभावकों, शिक्षाविदों और सामाजिक संगठनों की नजरें टिकी हुई हैं।




