अंतरराष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | लागोस/नई दिल्ली | 13 जून 2026
31.5 किलो कोकीन बरामदगी के मामले में अदालत का सख्त रुख, भारतीय समुद्री समुदाय में चिंता बढ़ी
नाइजीरिया की एक अदालत ने कोकीन तस्करी के एक बड़े मामले में 11 भारतीय नाविकों को दोषी ठहराते हुए उनके व्यापारी जहाज पर 53 लाख डॉलर (करीब 45 करोड़ रुपये) का भारी जुर्माना लगाया है। यह फैसला ऐसे समय आया है जब हाल के दिनों में खाड़ी क्षेत्र और अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों पर भारतीय नाविकों की सुरक्षा और कानूनी चुनौतियों को लेकर गंभीर चिंताएं सामने आ रही हैं। नाइजीरिया की राष्ट्रीय मादक पदार्थ कानून प्रवर्तन एजेंसी (NDLEA) के अनुसार, इन भारतीय नाविकों को लगभग छह महीने पहले गिरफ्तार किया गया था, जब उनके जहाज से 31.5 किलोग्राम कोकीन बरामद की गई थी।
जांच एजेंसियों के मुताबिक यह जहाज मार्शल आइलैंड्स से नाइजीरिया के लागोस स्थित अपापा बंदरगाह पहुंचा था। इसी दौरान तलाशी में भारी मात्रा में कोकीन मिलने के बाद जहाज के कप्तान सहित कुल 11 भारतीय नागरिकों को हिरासत में लिया गया था। मामला अदालत में पहुंचा और लंबी सुनवाई के बाद सभी आरोपियों को नाइजीरियाई मादक पदार्थ कानून के तहत दोषी करार दिया गया। अदालत ने जहाज के मास्टर और अन्य 10 चालक दल के सदस्यों को दोषी मानते हुए कड़ी सजा सुनाई तथा जहाज पर 5.3 मिलियन डॉलर का आर्थिक दंड भी लगाया।
मार्शल आइलैंड्स से नाइजीरिया तक फैला अंतरराष्ट्रीय तस्करी नेटवर्क?
नाइजीरिया की नारकोटिक्स एजेंसी का मानना है कि यह केवल एक साधारण तस्करी का मामला नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय ड्रग नेटवर्क से जुड़ा एक संगठित ऑपरेशन हो सकता है। जांच अधिकारियों के अनुसार बरामद की गई 31.5 किलोग्राम कोकीन की अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत करोड़ों डॉलर आंकी जा रही है। एजेंसी अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कोकीन जहाज पर कैसे पहुंची, उसका अंतिम गंतव्य क्या था और क्या चालक दल के सदस्य इस पूरे नेटवर्क की जानकारी रखते थे।
विशेषज्ञों का कहना है कि हाल के वर्षों में समुद्री मार्गों का इस्तेमाल ड्रग तस्करी के लिए तेजी से बढ़ा है। बड़ी मालवाहक जहाजों और कंटेनर यातायात के कारण तस्कर अक्सर समुद्री व्यापार के वैध ढांचे का दुरुपयोग करने की कोशिश करते हैं। पश्चिमी अफ्रीका लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय मादक पदार्थ तस्करी का एक महत्वपूर्ण ट्रांजिट प्वाइंट माना जाता रहा है, और नाइजीरिया इस नेटवर्क के खिलाफ लगातार अभियान चला रहा है।
भारतीय नाविकों के लिए बढ़ी कानूनी चुनौतियां
यह फैसला भारतीय समुद्री उद्योग के लिए भी चिंता का विषय बन गया है। दुनिया भर में हजारों भारतीय नाविक विभिन्न देशों के जहाजों पर कार्यरत हैं और अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका है। लेकिन कई बार विदेशी बंदरगाहों और न्यायिक व्यवस्थाओं में उन्हें गंभीर कानूनी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों में दोष सिद्ध होने से पहले और बाद में भारतीय दूतावासों तथा समुद्री संगठनों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है।
हाल ही में ओमान की खाड़ी और पश्चिम एशिया क्षेत्र में भारतीय नाविकों की मौत और जहाजों पर हमलों की घटनाओं ने पहले ही समुद्री सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। अब नाइजीरिया में 11 भारतीय नाविकों को दोषी ठहराए जाने की घटना ने एक नया कानूनी और राजनयिक आयाम जोड़ दिया है।
भारतीय पक्ष की प्रतिक्रिया पर निगाहें
फिलहाल भारत सरकार या विदेश मंत्रालय की ओर से इस मामले पर विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि माना जा रहा है कि भारतीय मिशन नाइजीरिया में मामले की निगरानी कर रहा है और दोषी ठहराए गए नाविकों को उपलब्ध कानूनी सहायता का आकलन किया जा रहा है। यह भी देखा जा रहा है कि क्या आरोपी उच्च अदालत में इस फैसले को चुनौती देंगे।
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि यदि अदालत ने NDLEA कानून के तहत दोष सिद्ध किया है तो अपील प्रक्रिया लंबी और जटिल हो सकती है। इसके साथ ही जहाज पर लगाए गए 5.3 मिलियन डॉलर के भारी जुर्माने का असर जहाज मालिकों और संबंधित समुद्री कंपनियों पर भी पड़ सकता है।
वैश्विक समुद्री व्यापार के लिए चेतावनी
नाइजीरिया की अदालत का यह फैसला केवल एक आपराधिक मामले का निष्कर्ष नहीं है बल्कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री उद्योग के लिए भी एक बड़ा संदेश माना जा रहा है। यह संकेत है कि दुनिया भर की एजेंसियां समुद्री मार्गों के जरिए होने वाली ड्रग तस्करी पर अब और अधिक सख्ती से कार्रवाई कर रही हैं। जहाज मालिकों, समुद्री कंपनियों और चालक दल के सदस्यों के लिए सुरक्षा प्रोटोकॉल, माल निरीक्षण और कानूनी अनुपालन की अहमियत पहले से कहीं अधिक बढ़ गई है।
11 भारतीय नाविकों की सजा और जहाज पर लगाए गए करोड़ों रुपये के जुर्माने ने भारत और नाइजीरिया दोनों में व्यापक चर्चा छेड़ दी है। आने वाले दिनों में इस मामले की कानूनी और राजनयिक दिशा पर सबकी निगाहें टिकी रहेंगी।




