Home » Politics » राहुल गांधी से CPI(M) नाराज़, कहा- ED और मोदी सरकार के ‘फैसिलिटेटर’ बनना बंद करें

राहुल गांधी से CPI(M) नाराज़, कहा- ED और मोदी सरकार के ‘फैसिलिटेटर’ बनना बंद करें

राजनीति | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 13 जून 2026

पिनराई विजयन पर राहुल की टिप्पणी से भड़का वामदल, माकपा महासचिव एम.ए. बेबी ने कांग्रेस नेतृत्व को लिखा पत्र

INDIA गठबंधन के भीतर मतभेद अब खुलकर सामने आने लगे हैं। कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी द्वारा केरल के पूर्व मुख्यमंत्री पिनराई विजयन को लेकर की गई टिप्पणी पर भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। माकपा महासचिव एम.ए. बेबी ने राहुल गांधी पर सीधा हमला बोलते हुए कहा है कि किसी ने राहुल गांधी से पिनराई विजयन को गले लगाने के लिए नहीं कहा है, बल्कि उनसे केवल यह अपेक्षा की गई है कि वे प्रवर्तन निदेशालय (ED) और मोदी सरकार के लिए “फैसिलिटेटर” यानी सहयोगी की भूमिका निभाना बंद करें।

यह विवाद 8 जून को हुई INDIA गठबंधन की बैठक के दौरान सामने आया, जब वामपंथी नेताओं ने केरल विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस नेताओं द्वारा लगाए गए उन आरोपों पर आपत्ति जताई, जिनमें कहा गया था कि तत्कालीन सत्तारूढ़ CPI(M) और भाजपा के बीच अंदरूनी समझ बनी हुई है। इस पर राहुल गांधी ने जवाब देते हुए कहा था कि उनकी पिनराई विजयन से राजनीतिक लड़ाई चल रही है और इसलिए वे उन्हें “गले नहीं लगा सकते”। राहुल की इसी टिप्पणी ने अब विपक्षी गठबंधन के भीतर नई बहस और तनाव को जन्म दे दिया है।

एम.ए. बेबी का पलटवार, कहा- राजनीतिक मतभेद अलग, भाजपा की मदद अलग

माकपा महासचिव एम.ए. बेबी ने राहुल गांधी के बयान को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में राजनीतिक मतभेद स्वाभाविक होते हैं, लेकिन विपक्षी दलों को भाजपा और केंद्र सरकार के खिलाफ साझा लड़ाई में एक-दूसरे पर ऐसे आरोप लगाने से बचना चाहिए, जिनका इस्तेमाल सत्ताधारी दल अपने राजनीतिक लाभ के लिए कर सके। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि CPI(M) ने कभी राहुल गांधी से व्यक्तिगत या राजनीतिक नजदीकी की अपेक्षा नहीं की, लेकिन उनसे यह जरूर अपेक्षा की जाती है कि वे ऐसे आरोपों को बढ़ावा न दें जो भाजपा और जांच एजेंसियों के राजनीतिक नैरेटिव को मजबूत करते हों।

एम.ए. बेबी ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को पत्र लिखकर भी इस मुद्दे पर आपत्ति दर्ज कराई है। उन्होंने पत्र में कहा कि INDIA गठबंधन की भावना आपसी सम्मान, सहयोग और भाजपा के खिलाफ साझा संघर्ष पर आधारित है। यदि गठबंधन के प्रमुख नेता सार्वजनिक रूप से सहयोगी दलों पर ऐसे आरोप लगाएंगे, तो इससे विपक्षी एकता कमजोर होगी और भाजपा को राजनीतिक लाभ मिलेगा।

केरल की राजनीति का असर राष्ट्रीय विपक्ष पर

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह विवाद केवल एक बयान तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे केरल की जमीनी राजनीति भी जुड़ी हुई है। केरल में कांग्रेस और CPI(M) दशकों से एक-दूसरे के प्रमुख राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी रहे हैं। राज्य की राजनीति में दोनों दल सीधे मुकाबले में रहते हैं और अक्सर एक-दूसरे पर तीखे आरोप लगाते हैं। लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर दोनों दल INDIA गठबंधन के साझेदार हैं और भाजपा के खिलाफ साझा मोर्चा बनाने का दावा करते हैं।

यही कारण है कि केरल की राजनीतिक प्रतिस्पर्धा बार-बार राष्ट्रीय विपक्षी एकता के सामने चुनौती बन जाती है। राहुल गांधी के हालिया बयान और उस पर माकपा की प्रतिक्रिया ने यह सवाल फिर खड़ा कर दिया है कि क्या क्षेत्रीय राजनीतिक संघर्षों के बावजूद विपक्षी दल राष्ट्रीय स्तर पर एकजुट रह पाएंगे या नहीं।

पिनराई विजयन पहले भी राहुल गांधी पर साध चुके हैं निशाना

दिलचस्प बात यह है कि यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब हाल ही में पिनराई विजयन ने भी राहुल गांधी की राजनीतिक रणनीति की आलोचना की थी। विजयन ने कहा था कि राहुल गांधी का मौजूदा राजनीतिक दृष्टिकोण भाजपा को फायदा पहुंचा रहा है और INDIA गठबंधन को मजबूत करने के बजाय कमजोर कर रहा है। उनके इस बयान के बाद कांग्रेस और वाम दलों के बीच पहले से ही तनाव की स्थिति बनी हुई थी। अब राहुल गांधी की टिप्पणी और उस पर माकपा की तीखी प्रतिक्रिया ने दोनों दलों के बीच दूरी और बढ़ा दी है।

विश्लेषकों का कहना है कि विपक्षी दलों के बीच यह सार्वजनिक बयानबाजी INDIA गठबंधन की एकजुटता पर सवाल खड़े कर सकती है, खासकर ऐसे समय में जब भाजपा लगातार विपक्ष को बिखरा हुआ और नेतृत्वविहीन बताने की कोशिश कर रही है।

INDIA गठबंधन के सामने नई चुनौती

लोकसभा चुनाव के बाद विपक्षी राजनीति को एकजुट रखने की चुनौती लगातार बढ़ती जा रही है। कई राज्यों में सहयोगी दल आपस में प्रतिद्वंद्वी हैं और राष्ट्रीय स्तर पर साथ खड़े होने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसे में राहुल गांधी और CPI(M) के बीच ताजा टकराव इस बात का संकेत माना जा रहा है कि गठबंधन के भीतर वैचारिक और राजनीतिक मतभेद अभी भी पूरी तरह खत्म नहीं हुए हैं।

कांग्रेस की ओर से इस विवाद पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन माकपा के तीखे रुख ने यह स्पष्ट कर दिया है कि विपक्षी एकता की राह अभी आसान नहीं है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि कांग्रेस और वामपंथी दल इस विवाद को कैसे संभालते हैं और क्या INDIA गठबंधन इस मतभेद को पीछे छोड़कर भाजपा के खिलाफ साझा रणनीति बना पाता है या नहीं।

0 0 votes
Article Rating
Subscribe
Notify of
guest
0 Comments
Oldest
Newest Most Voted