राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 13 जून 2026
30 जून से संभालेंगे कमान, जनरल उपेंद्र द्विवेदी के उत्तराधिकारी होंगे धीरज सेठ
भारतीय सेना के शीर्ष नेतृत्व में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। केंद्र सरकार ने वर्तमान उप सेना प्रमुख (Vice Chief of Army Staff) लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ को देश का अगला थलसेना प्रमुख (Chief of Army Staff) नियुक्त करने का फैसला किया है। रक्षा मंत्रालय द्वारा जारी आधिकारिक घोषणा के अनुसार लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ 30 जून 2026 की दोपहर से भारतीय सेना की कमान संभालेंगे। वर्तमान थलसेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी इसी दिन अपनी निर्धारित सेवा अवधि पूरी कर सेवानिवृत्त हो रहे हैं।
यह नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब भारतीय सेना एक साथ कई महत्वपूर्ण चुनौतियों और रणनीतिक बदलावों के दौर से गुजर रही है। उत्तरी सीमाओं पर चीन की गतिविधियां, पश्चिमी मोर्चे पर पाकिस्तान की चुनौतियां, आधुनिक युद्ध तकनीकों का बढ़ता प्रभाव, ड्रोन युद्ध, साइबर सुरक्षा और भविष्य के युद्धक्षेत्रों की तैयारी जैसे कई महत्वपूर्ण मुद्दे नए सेना प्रमुख के सामने होंगे। ऐसे में लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ की नियुक्ति को भारतीय सैन्य नेतृत्व में निरंतरता और अनुभव का संतुलित मिश्रण माना जा रहा है।
समृद्ध सैन्य अनुभव और रणनीतिक नेतृत्व की पहचान
लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ भारतीय सेना के उन वरिष्ठ अधिकारियों में गिने जाते हैं जिन्होंने अपने लंबे सैन्य करियर के दौरान विभिन्न महत्वपूर्ण कमांड और स्टाफ नियुक्तियों में उत्कृष्ट सेवाएं दी हैं। वर्तमान में वे उप सेना प्रमुख के रूप में कार्यरत हैं और सेना के आधुनिकीकरण, सैन्य सुधारों तथा संयुक्त सैन्य अभियानों से जुड़े कई महत्वपूर्ण निर्णयों में उनकी प्रमुख भूमिका रही है।
सैन्य हलकों में उन्हें एक पेशेवर, शांत और रणनीतिक सोच रखने वाले अधिकारी के रूप में देखा जाता है। विभिन्न संवेदनशील क्षेत्रों में उनकी नियुक्तियों ने उन्हें जमीनी स्तर से लेकर शीर्ष सैन्य नीति निर्धारण तक का व्यापक अनुभव प्रदान किया है। सेना के आधुनिकीकरण और नई तकनीकों को अपनाने के पक्षधर माने जाने वाले धीरज सेठ आने वाले वर्षों में भारतीय सेना को भविष्य की चुनौतियों के अनुरूप तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
ऐसे समय में मिली जिम्मेदारी जब बदल रहा है युद्ध का स्वरूप
धीरज सेठ ऐसे समय में सेना प्रमुख बनने जा रहे हैं जब पूरी दुनिया में युद्ध का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। रूस-यूक्रेन युद्ध ने ड्रोन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध और लंबी दूरी की सटीक मारक क्षमता वाले हथियारों की भूमिका को नए स्तर पर पहुंचा दिया है। पश्चिम एशिया के संघर्षों ने भी यह स्पष्ट कर दिया है कि भविष्य के युद्ध केवल सीमाओं पर नहीं बल्कि साइबर स्पेस, अंतरिक्ष और सूचना तंत्र में भी लड़े जाएंगे।
भारत पहले ही ‘आत्मनिर्भर भारत’ और रक्षा क्षेत्र में स्वदेशीकरण के अभियान को तेजी से आगे बढ़ा रहा है। हाल ही में डीआरडीओ द्वारा सफल बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस और एंटी-शिप मिसाइल परीक्षणों ने भारत की सैन्य क्षमता को नई मजबूती दी है। ऐसे में नए सेना प्रमुख के सामने इन क्षमताओं को जमीनी सैन्य रणनीति में शामिल करने की चुनौती भी होगी।
जनरल उपेंद्र द्विवेदी का कार्यकाल रहा महत्वपूर्ण
सेवानिवृत्त होने जा रहे वर्तमान सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी का कार्यकाल भी कई मायनों में महत्वपूर्ण रहा। उनके नेतृत्व में भारतीय सेना ने सीमा सुरक्षा, सैन्य आधुनिकीकरण और थिएटर कमांड की दिशा में कई महत्वपूर्ण कदम उठाए। सेना में तकनीकी सुधारों और स्वदेशी रक्षा उपकरणों के उपयोग को बढ़ावा देने के प्रयासों को भी उनके कार्यकाल की प्रमुख उपलब्धियों में गिना जाता है।
जनरल द्विवेदी के कार्यकाल में सेना ने उत्तरी और पश्चिमी सीमाओं पर अपनी परिचालन क्षमता को और मजबूत किया। साथ ही अग्निपथ योजना और नई भर्ती प्रणाली को लेकर भी सेना ने महत्वपूर्ण परिवर्तन देखे। अब इन पहलों को आगे बढ़ाने और नई दिशा देने की जिम्मेदारी लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ के कंधों पर होगी।
सरकार और सेना की नजरें भविष्य की चुनौतियों पर
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में भारतीय सेना को पारंपरिक युद्ध के साथ-साथ हाइब्रिड वारफेयर, ड्रोन हमलों, साइबर खतरों और अंतरिक्ष आधारित सुरक्षा चुनौतियों का भी सामना करना पड़ सकता है। इसलिए नए सेना प्रमुख की भूमिका केवल सैन्य कमांडर तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि उन्हें सैन्य सुधारक और रणनीतिक योजनाकार की भूमिका भी निभानी होगी।
भारत वर्तमान में दुनिया की सबसे बड़ी सेनाओं में से एक है और वैश्विक स्तर पर उसकी रणनीतिक भूमिका लगातार बढ़ रही है। इंडो-पैसिफिक क्षेत्र से लेकर संयुक्त राष्ट्र शांति अभियानों तक भारत की सक्रिय भागीदारी बनी हुई है। ऐसे में लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ की नियुक्ति को केवल नेतृत्व परिवर्तन नहीं बल्कि भारतीय सैन्य रणनीति के अगले अध्याय की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है।
नई जिम्मेदारी, नई चुनौतियां और नई उम्मीदें
30 जून 2026 को जब लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ भारतीय सेना के 31वें थलसेना प्रमुख के रूप में कार्यभार संभालेंगे, तब उनके सामने देश की सुरक्षा से जुड़े अनेक महत्वपूर्ण प्रश्न होंगे। सीमा सुरक्षा, सैन्य आधुनिकीकरण, स्वदेशी रक्षा उत्पादन, भविष्य के युद्धों की तैयारी और जवानों के कल्याण जैसे विषय उनकी प्राथमिकताओं में शामिल रहेंगे।
देश की सुरक्षा व्यवस्था के सबसे महत्वपूर्ण स्तंभों में से एक भारतीय सेना अब नए नेतृत्व के साथ आगे बढ़ने की तैयारी कर रही है। रक्षा विशेषज्ञों और सैन्य समुदाय को उम्मीद है कि लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ अपने अनुभव, नेतृत्व क्षमता और रणनीतिक दृष्टिकोण के बल पर भारतीय सेना को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में सफल होंगे।




