स्पोर्ट्स | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 12 जून 2026
भारतीय खेल जगत को शुक्रवार को बड़ा झटका लगा जब देश के दिग्गज निशानेबाज, एशियाई खेलों के स्वर्ण पदक विजेता और ओलंपिक पदक विजेता मनु भाकर के गुरु जसपाल राणा का 49 वर्ष की आयु में निधन हो गया। खिलाड़ी, कोच और मार्गदर्शक के रूप में भारतीय निशानेबाजी को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने वाले राणा के निधन से खेल जगत में शोक की लहर दौड़ गई है।
हाल ही में जर्मनी के म्यूनिख में आयोजित ISSF विश्व कप से लौटते समय उनकी तबीयत बिगड़ गई थी। इसके बाद उनका चिकित्सीय उपचार हुआ, लेकिन तमाम प्रयासों के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका। उनके निधन की खबर सामने आते ही खेल मंत्रालय, भारतीय ओलंपिक संघ, राष्ट्रीय राइफल संघ और देश-विदेश के खिलाड़ियों ने गहरा दुख व्यक्त किया।
जसपाल राणा भारतीय निशानेबाजी के उन महान खिलाड़ियों में गिने जाते हैं जिन्होंने 1990 के दशक में इस खेल को देश में नई पहचान दिलाई। उन्होंने एशियाई खेलों और कई अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत के लिए स्वर्ण सहित अनेक पदक जीते। उनकी उपलब्धियों के सम्मान में उन्हें 1994 में अर्जुन पुरस्कार, 1997 में पद्मश्री और 2020 में द्रोणाचार्य पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।
खिलाड़ी के रूप में शानदार करियर के बाद राणा ने कोचिंग की जिम्मेदारी संभाली और भारतीय शूटिंग की नई पीढ़ी तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। ओलंपिक कांस्य पदक विजेता मनु भाकर की सफलता के पीछे भी जसपाल राणा का बड़ा योगदान माना जाता है। मनु भाकर के करियर को संवारने और उन्हें विश्वस्तरीय निशानेबाज बनाने में राणा की भूमिका निर्णायक रही।
उत्तराखंड से ताल्लुक रखने वाले जसपाल राणा ने बेहद कम उम्र में अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी पहचान बनाई थी। उनकी सटीक निशानेबाजी और दबाव में प्रदर्शन करने की क्षमता ने उन्हें भारतीय शूटिंग का सबसे बड़ा चेहरा बना दिया था। उन्होंने न केवल खुद पदक जीते, बल्कि देश को कई ऐसे खिलाड़ी भी दिए जिन्होंने विश्व स्तर पर भारत का नाम रोशन किया।
खेल विशेषज्ञों का मानना है कि जसपाल राणा केवल एक चैंपियन खिलाड़ी नहीं थे, बल्कि भारतीय निशानेबाजी के आधुनिक युग के निर्माता भी थे। उनकी मेहनत और दूरदर्शिता ने भारत को शूटिंग में विश्व शक्ति बनने की दिशा में मजबूत आधार दिया।
जसपाल राणा का जाना भारतीय खेल इतिहास की एक बड़ी क्षति है। एक महान निशानेबाज, सफल कोच और प्रेरणादायी व्यक्तित्व के रूप में उनकी विरासत हमेशा जीवित रहेगी। भारतीय खेल जगत उन्हें केवल उनके पदकों के लिए नहीं, बल्कि देश को चैंपियन बनाने वाले गुरु के रूप में भी याद रखेगा।




