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दलित मुस्लिम-ईसाइयों को SC दर्जा देने पर बनी आयोग की रिपोर्ट तैयार, सरकार को जल्द सौंपी जाएगी

राष्ट्रीय | मोबनी मजूमदार | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 12 जून 2026

दलित मुस्लिम और दलित ईसाई समुदायों को अनुसूचित जाति (SC) का दर्जा दिए जाने के लंबे समय से चल रहे विवाद पर अब एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। पूर्व मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति के.जी. बालाकृष्णन की अध्यक्षता वाले आयोग ने अपनी विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर ली है और इसे जल्द ही केंद्र सरकार को सौंपे जाने की संभावना है। यह रिपोर्ट ऐसे समय में तैयार हुई है जब इस संवेदनशील मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट में पिछले दो दशकों से सुनवाई लंबित है और देशभर में इसकी राजनीतिक तथा सामाजिक चर्चा लगातार तेज होती रही है।

केंद्र सरकार ने अक्टूबर 2022 में तीन सदस्यीय आयोग का गठन किया था। आयोग को यह अध्ययन करने की जिम्मेदारी दी गई थी कि धर्म परिवर्तन के बाद दलित मुसलमानों और दलित ईसाइयों को किस प्रकार के सामाजिक भेदभाव का सामना करना पड़ता है, उनकी अनुसूचित जाति दर्जे की मांग कितनी उचित है, इस मांग के पक्ष और विपक्ष में क्या तर्क हैं तथा इसका मौजूदा अनुसूचित जाति समुदायों पर क्या प्रभाव पड़ सकता है।

सूत्रों के अनुसार आयोग ने देश के विभिन्न राज्यों में व्यापक अध्ययन, सामाजिक संगठनों, धार्मिक समूहों, विशेषज्ञों और संबंधित पक्षों से चर्चा के बाद अपनी रिपोर्ट को अंतिम रूप दिया है। आयोग को अपने कार्यकाल के दौरान कई बार समय-सीमा विस्तार भी दिया गया था, क्योंकि विषय की संवेदनशीलता और व्यापकता को देखते हुए विस्तृत अध्ययन आवश्यक माना गया।

दलित मुस्लिम और दलित ईसाई संगठनों का लंबे समय से तर्क रहा है कि धर्म परिवर्तन के बावजूद सामाजिक भेदभाव और जातिगत उत्पीड़न समाप्त नहीं होता, इसलिए उन्हें भी अनुसूचित जाति वर्ग को मिलने वाले संवैधानिक अधिकार और आरक्षण लाभ मिलने चाहिए। वहीं इस मांग का विरोध करने वाले पक्षों का कहना है कि इससे मौजूदा अनुसूचित जाति समुदायों के अधिकारों और आरक्षण हिस्सेदारी पर प्रभाव पड़ सकता है।

राजनीतिक दृष्टि से भी यह रिपोर्ट बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। माना जा रहा है कि आयोग की सिफारिशें भविष्य में केंद्र सरकार की नीति और सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई दोनों को प्रभावित कर सकती हैं। रिपोर्ट सार्वजनिक होने के बाद इस मुद्दे पर देशव्यापी बहस और तेज होने की संभावना है।

फिलहाल सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि आयोग ने अपनी रिपोर्ट में क्या निष्कर्ष निकाले हैं और केंद्र सरकार इस पर क्या रुख अपनाती है। दलित मुस्लिम और दलित ईसाई समुदायों के लिए यह रिपोर्ट उनके लंबे संघर्ष की दिशा तय करने वाली एक महत्वपूर्ण कड़ी साबित हो सकती है।

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