व्यापार/राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 16 सितंबर 2026
सरकार ने कहा- फैसला वापस नहीं होगा
UPI को लेकर चल रही बहस के बीच केंद्र सरकार ने साफ कर दिया है कि ₹2,000 से अधिक के चुनिंदा UPI मर्चेंट भुगतानों पर लागू होने वाले Merchant Discount Rate यानी MDR को वापस लेने पर फिलहाल कोई विचार नहीं है। PTI के हवाले से सामने आई रिपोर्ट के मुताबिक, एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने कहा कि इस संबंध में फैसला लिया जा चुका है और इसे वापस लेने का सवाल नहीं है।
नई व्यवस्था 15 अक्टूबर 2026 से लागू होने वाली है। इसके तहत ₹2,000 से अधिक के पात्र Person-to-Merchant यानी P2M UPI लेन-देन पर 0.4 प्रतिशत MDR लागू होगा। हालांकि यह शुल्क सीधे ग्राहक से नहीं लिया जाएगा।
ग्राहक के लिए UPI रहेगा मुफ्त
सरकार ने इस मुद्दे पर उठ रही आशंकाओं के बीच स्पष्ट किया है कि UPI से व्यक्ति-से-व्यक्ति यानी P2P भुगतान पूरी तरह मुफ्त रहेगा, चाहे रकम कितनी भी हो।
इसी तरह ₹2,000 तक के मर्चेंट भुगतान पर MDR नहीं लगेगा। छोटे व्यापारी, जो UPI QR के जरिए महीने में ₹1 लाख तक प्राप्त करते हैं और निर्धारित P2PM श्रेणी में आते हैं, उन्हें भी जीरो MDR की सुविधा जारी रहेगी। सरकार के मुताबिक करीब 96 प्रतिशत मर्चेंट UPI लेन-देन MDR से प्रभावित नहीं होंगे।
लेकिन ₹2,000 के ऊपर क्या होगा?
नई व्यवस्था का असर मुख्य रूप से बड़े मूल्य वाले मर्चेंट भुगतान पर पड़ेगा।
सरकार के अनुसार, ₹2,000 से ऊपर के सामान्य P2M लेन-देन पर 0.4 प्रतिशत MDR लगेगा। ₹75,000 या उससे अधिक के लेन-देन के लिए MDR की अधिकतम सीमा ₹300 प्रति ट्रांजैक्शन तय की गई है। यह राशि ग्राहक से अलग से UPI शुल्क के रूप में नहीं ली जाएगी, बल्कि भुगतान व्यवस्था से जुड़े मर्चेंट पक्ष के शुल्क ढांचे का हिस्सा होगी।
पेट्रोल पंप और जरूरी सेवाओं के लिए ₹5
सबसे ज्यादा चर्चा पेट्रोल पंपों को लेकर है।
सरकार ने ईंधन, रेलवे, दूरसंचार, बीमा और कृषि इनपुट जैसे आवश्यक एवं कम मार्जिन वाले क्षेत्रों के लिए अलग व्यवस्था रखी है। ₹2,000 से अधिक के ऐसे लेन-देन पर ₹5 प्रति ट्रांजैक्शन का फ्लैट MDR लागू होगा।
यही प्रावधान पेट्रोल पंप डीलरों के विरोध का कारण बना है। डीलरों का तर्क है कि ईंधन कारोबार में मार्जिन सीमित होता है और डिजिटल भुगतान पर अतिरिक्त लागत उनके कारोबार को प्रभावित कर सकती है। कुछ पेट्रोल पंप संगठनों ने ₹2,000 से ऊपर UPI भुगतान स्वीकार करने के बजाय नकद भुगतान की ओर जाने की चेतावनी भी दी है।
सरकार का तर्क- UPI को आर्थिक रूप से टिकाऊ बनाना जरूरी
केंद्र सरकार का कहना है कि यह कदम UPI के दीर्घकालिक वित्तीय स्थायित्व, सुरक्षा और तकनीकी विस्तार को मजबूत करने के लिए उठाया गया है।
सरकार के अनुसार, UPI के बढ़ते इस्तेमाल के साथ इसके इंफ्रास्ट्रक्चर, साइबर सुरक्षा और फ्रॉड प्रिवेंशन पर लगातार खर्च होता है। ऐसे में पूरे सिस्टम को लंबे समय तक टिकाऊ बनाए रखने के लिए भुगतान इकोसिस्टम में एक सीमित राजस्व व्यवस्था जरूरी है।
‘विदेशी दबाव’ के आरोप को सरकार ने किया खारिज
UPI MDR के फैसले को लेकर विपक्ष की ओर से सरकार पर विदेशी दबाव में आने के आरोप भी लगाए गए हैं। कांग्रेस समेत कुछ विपक्षी नेताओं ने अमेरिका के दबाव का आरोप लगाया है।
वित्त मंत्रालय ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि UPI से संबंधित नीतिगत फैसले भारत स्वतंत्र रूप से लेता है और इनका उद्देश्य एक टिकाऊ, समावेशी और किफायती डिजिटल भुगतान व्यवस्था बनाना है।
विरोध के बीच अब असली सवाल मर्चेंट का
सरकार का कहना है कि ग्राहक से UPI भुगतान पर कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा और बैंक यह सुनिश्चित करेंगे कि MDR को ग्राहक पर अलग से न डाला जाए।
लेकिन व्यापारियों और पेट्रोल पंप डीलरों के लिए सवाल अलग है—अगर ग्राहक से शुल्क नहीं लिया जाएगा, तो MDR की लागत अंततः कौन वहन करेगा और उसका असर व्यापार के मार्जिन पर कितना पड़ेगा?
UPI ने भारत में डिजिटल भुगतान की तस्वीर बदल दी है। अब नई MDR व्यवस्था के साथ चुनौती यह है कि UPI की सुविधा और पहुंच बनी रहे, छोटे कारोबार पर अनावश्यक बोझ न पड़े और भुगतान व्यवस्था आर्थिक रूप से टिकाऊ भी बने।
फिलहाल सरकार ने अपना रुख स्पष्ट कर दिया है—₹2,000 से ऊपर के पात्र UPI मर्चेंट भुगतान पर MDR लागू करने का फैसला वापस नहीं लिया जा रहा।



