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ट्रंप की चेतावनी से बढ़ा युद्ध का खतरा: ईरान पर अमेरिकी हमले, खाड़ी में मिसाइलों की बारिश से दुनिया में हड़कंप

अंतरराष्ट्रीय डेस्क | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 10 जून 2026

पश्चिम एशिया एक बार फिर बड़े युद्ध के मुहाने पर खड़ा दिखाई दे रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि तेहरान ने बातचीत में बहुत देर कर दी है और अब उसे इसकी कीमत चुकानी होगी। ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका ने होर्मुज जलडमरूमध्य के पास अमेरिकी अपाचे हेलीकॉप्टर गिराए जाने के आरोप के बाद ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर हवाई हमले किए हैं। जवाब में ईरान ने बहरीन, जॉर्डन और खाड़ी क्षेत्र के अन्य रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाते हुए मिसाइल हमले शुरू कर दिए हैं। तेजी से बिगड़ती स्थिति ने पूरे क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ा दी है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय को गंभीर चिंता में डाल दिया है।

अमेरिकी सैन्य कमान सेंटकॉम ने दावा किया है कि उसके लड़ाकू विमानों और नौसेना ने ईरान के वायु रक्षा ठिकानों, रडार स्टेशनों और निगरानी केंद्रों को सटीक हमलों में निशाना बनाया है। दूसरी ओर ईरान का कहना है कि अमेरिका और इज़राइल लगातार युद्धविराम का उल्लंघन कर रहे हैं और कूटनीतिक प्रयासों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। ईरानी विदेश मंत्रालय ने खाड़ी देशों को भी चेतावनी दी है कि वे अपनी भूमि और सैन्य सुविधाओं का इस्तेमाल अमेरिका और इज़राइल को न करने दें, क्योंकि ऐसा करना उनके लिए कानूनी और नैतिक जिम्मेदारी का प्रश्न है।

स्थिति तब और गंभीर हो गई जब ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने दावा किया कि उसने जॉर्डन स्थित अमेरिकी अल-अजराक सैन्य अड्डे सहित कई ठिकानों पर लंबी दूरी की मिसाइलों से हमला किया है। हालांकि जॉर्डन की सेना ने कहा कि उसने ईरान से दागी गई पांच मिसाइलों को हवा में ही मार गिराया और किसी तरह का बड़ा नुकसान नहीं हुआ। इसके बावजूद क्षेत्र में तनाव चरम पर पहुंच गया है और कई देशों ने अपनी सुरक्षा व्यवस्थाएं बढ़ा दी हैं।

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युद्ध का असर अब केवल सैन्य मोर्चे तक सीमित नहीं रहा है बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाजार भी इसकी चपेट में आ गया है। ब्रिटिश ऊर्जा कंपनी शेल के मुख्य कार्यकारी अधिकारी वाएल सावन ने कहा है कि होर्मुज जलडमरूमध्य में पैदा हुए संकट ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति में ऐसा व्यवधान पैदा किया है जो पहले कभी नहीं देखा गया। दुनिया के तेल उत्पादन का बड़ा हिस्सा प्रभावित हुआ है और भारत, इंडोनेशिया, थाईलैंड तथा वियतनाम जैसे देशों में ईंधन की आपूर्ति पर दबाव बढ़ रहा है। कई देशों को राशनिंग जैसी व्यवस्थाओं पर विचार करना पड़ रहा है।

इसी बीच ओमान तट के पास एक तेल टैंकर पर मिसाइल हमले की आशंका ने हालात और तनावपूर्ण बना दिए हैं। समुद्री सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार टैंकर के इंजन कक्ष में आग लगने से दो चालक दल के सदस्य लापता हो गए हैं जबकि एक व्यक्ति घायल हुआ है। ब्रिटिश एजेंसियों का अनुमान है कि यह घटना ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी से जुड़े अमेरिकी अभियानों का परिणाम हो सकती है। भारतीय दूतावास ने भी ओमान तट के पास एक जहाज से जुड़े घटनाक्रम पर नजर रखने और स्थानीय प्रशासन के साथ संपर्क में रहने की पुष्टि की है।

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने सुरक्षा परिषद में चेतावनी दी है कि क्षेत्र में जारी सैन्य टकराव किसी भी समय “पूर्ण युद्ध” में बदल सकता है। रूस और चीन ने भी संयम बरतने की अपील की है। रूस ने अमेरिका और ईरान दोनों से सैन्य कार्रवाई तुरंत रोकने का आग्रह किया है, जबकि चीन ने कहा है कि सभी पक्ष तनाव कम करने के लिए ठोस कदम उठाएं। हालांकि जमीनी हालात बताते हैं कि फिलहाल किसी भी पक्ष के पीछे हटने के संकेत नहीं हैं।

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लेबनान भी इस संघर्ष की आग में झुलस रहा है। दक्षिणी लेबनान और बेरूत के उपनगरों में इज़राइली हमलों में कई लोगों की मौत हुई है। वहीं हिजबुल्लाह और इज़राइल के बीच रॉकेट हमलों का सिलसिला जारी है। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय ने संभावित अंतरराष्ट्रीय कानून उल्लंघनों की जांच के लिए अगले सप्ताह लेबनान में विशेष जांच दल भेजने की घोषणा की है।

विश्लेषकों का मानना है कि यदि अमेरिका और ईरान के बीच यह टकराव इसी तरह बढ़ता रहा तो इसका असर केवल पश्चिम एशिया तक सीमित नहीं रहेगा। वैश्विक तेल बाजार, समुद्री व्यापार, ऊर्जा सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति पर इसके दूरगामी प्रभाव पड़ सकते हैं। फिलहाल पूरी दुनिया की निगाहें वॉशिंगटन, तेहरान और तेल समृद्ध खाड़ी क्षेत्र पर टिकी हुई हैं, जहां हर घंटे बदलते घटनाक्रम एक बड़े भू-राजनीतिक संकट की ओर इशारा कर रहे हैं।

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