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तिरुमला में रोज़ 3 लाख श्रद्धालुओं को मिलता है मुफ्त भोजन, 40 साल पुरानी सेवा बनी दुनिया की मिसाल

धर्म एवं समाज | ABC NATIONAL NEWS | तिरुमला | 10 जून 2026

आंध्र प्रदेश के तिरुमला स्थित भगवान वेंकटेश्वर मंदिर में हर दिन करीब तीन लाख श्रद्धालुओं को निःशुल्क भोजन परोसा जाता है। ऐसे समय में जब दुनिया के कई हिस्सों में करोड़ों लोग भूख और खाद्य संकट से जूझ रहे हैं, तिरुमला का यह विशाल अन्नदान कार्यक्रम मानव सेवा और धार्मिक समर्पण की एक अनूठी मिसाल बनकर उभरा है। मंदिर आने वाले हर श्रद्धालु को बिना किसी भेदभाव के भरपेट और गुणवत्तापूर्ण भोजन उपलब्ध कराया जाता है, जिससे यह दुनिया की सबसे बड़ी निःशुल्क भोजन योजनाओं में से एक बन गया है।

इस महान सेवा की शुरुआत 6 अप्रैल 1985 को “नित्य अन्नदानम योजना” के रूप में हुई थी। उस समय यह एक छोटी पहल थी, लेकिन चार दशकों के दौरान यह एक विशाल जनकल्याणकारी अभियान में बदल गई। आज यह योजना तिरुमला तिरुपति देवस्थानम (TTD) के श्री वेंकटेश्वर अन्नप्रसादम ट्रस्ट के माध्यम से संचालित होती है और लाखों श्रद्धालुओं की सेवा कर रही है। भारतीय परंपरा में कहा जाता है कि “अन्नदान महादान” होता है और तिरुमला का यह कार्यक्रम उसी भावना को जीवंत रूप में प्रस्तुत करता है।

टीटीडी द्वारा संचालित विशाल रसोईघरों में प्रतिदिन हजारों किलो खाद्यान्न का उपयोग किया जाता है। केवल मई 2026 के दौरान ही प्रतिदिन औसतन 15.8 टन चावल पकाया गया। आधुनिक मशीनों और पारंपरिक सेवा भावना के संगम से संचालित यह व्यवस्था इतनी विशाल है कि हर दिन लाखों लोगों को भोजन उपलब्ध कराने के बावजूद इसकी गुणवत्ता और स्वच्छता बनाए रखी जाती है। भोजन तैयार करने से लेकर परोसने तक हर चरण में विशेष मानकों का पालन किया जाता है।

इस सेवा को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए श्री वेंकटेश्वर अन्नप्रसादम ट्रस्ट के पास ₹2,460 करोड़ से अधिक की जमा पूंजी है। श्रद्धालुओं, दानदाताओं और समाजसेवियों के सहयोग से यह कोष लगातार बढ़ता रहा है, जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि आने वाले वर्षों में भी किसी श्रद्धालु को भोजन के लिए परेशान न होना पड़े। बड़ी संख्या में लोग अपनी श्रद्धा और आस्था के तहत इस अन्नदान योजना में आर्थिक योगदान देते हैं।

तिरुमला का यह अन्नदान कार्यक्रम केवल भोजन वितरण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सेवा, समानता और मानवता का संदेश भी देता है। यहां अमीर-गरीब, देशी-विदेशी, सभी श्रद्धालु एक ही पंक्ति में बैठकर भोजन ग्रहण करते हैं। यही भावना इस योजना को विशेष बनाती है। चार दशक पहले शुरू हुई यह पहल आज न केवल भारत बल्कि पूरी दुनिया के लिए सामाजिक सेवा और जनकल्याण का एक प्रेरणादायक मॉडल बन चुकी है।

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