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सुप्रीम कोर्ट की बड़ी टिप्पणी: शादी से पहले सहमति से बने रिश्ते चरित्र पर दाग नहीं

लाइफस्टाइल/ यूथ/ महिला/ राष्ट्रीय | महेंद्र सिंह | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 9 जून 2026

सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम फैसले में कहा है कि शादी से पहले दो वयस्क लोगों के बीच सहमति से बना रिश्ता किसी व्यक्ति के चरित्र पर दाग नहीं माना जा सकता। अदालत ने कहा कि समाज बदल रहा है और सरकारी संस्थाओं को भी बदलते सामाजिक माहौल को समझना चाहिए।

न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा और न्यायमूर्ति मनमोहन की पीठ ने कहा कि आज के समय में विवाह पूर्व संबंध असामान्य बात नहीं हैं। केवल इसी आधार पर किसी व्यक्ति को गलत चरित्र वाला मानना या उसके खिलाफ नकारात्मक राय बनाना उचित नहीं है।

अदालत ने यह टिप्पणी एक भर्ती और चरित्र सत्यापन से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान की। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि किसी व्यक्ति के निजी जीवन से जुड़ी बातों को देखकर उसके पूरे व्यक्तित्व का आकलन नहीं किया जा सकता। यदि रिश्ता दोनों पक्षों की सहमति से था और उसमें कोई अपराध शामिल नहीं था, तो उसे चरित्रहीनता का प्रमाण नहीं माना जा सकता।

कोर्ट ने कहा कि चरित्र का मूल्यांकन किसी एक घटना या निजी संबंध के आधार पर नहीं, बल्कि व्यक्ति के पूरे आचरण और व्यवहार को देखकर किया जाना चाहिए। अधिकारियों को भी ऐसे मामलों में संवेदनशील और निष्पक्ष दृष्टिकोण अपनाना चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि हर नागरिक को संविधान के तहत गरिमा और निजता का अधिकार प्राप्त है। इसलिए किसी व्यक्ति के निजी जीवन को लेकर पुरानी सामाजिक धारणाओं के आधार पर निर्णय लेना सही नहीं होगा।

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कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार यह फैसला बदलते सामाजिक मूल्यों को स्वीकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे भविष्य में भर्ती और चरित्र सत्यापन से जुड़े मामलों में अधिक संतुलित और व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाने में मदद मिल सकती है।

कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि किसी व्यक्ति के खिलाफ कोई गंभीर आपराधिक मामला हो तो उसकी जांच अलग विषय है। लेकिन केवल शादी से पहले सहमति से बने रिश्ते को चरित्र पर दाग मानना उचित नहीं है।

सुप्रीम कोर्ट की इस टिप्पणी को व्यक्तिगत स्वतंत्रता, निजता और आधुनिक सामाजिक सोच के समर्थन में एक महत्वपूर्ण संदेश माना जा रहा है।

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