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चागोस द्वीप विवाद: मॉरीशस ने कहा- अमेरिका की ओर से कोई प्रस्ताव नहीं मिला

अंतरराष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | पोर्ट लुईस | 9 जून 2026

हिंद महासागर में स्थित रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण चागोस द्वीपसमूह को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है। ब्रिटिश अखबार द टेलीग्राफ की एक रिपोर्ट में दावा किया गया था कि अमेरिकी प्रशासन चागोस द्वीपों को मॉरीशस से खरीदने की संभावना पर विचार कर रहा है। हालांकि मॉरीशस सरकार ने इस खबर का खंडन करते हुए कहा है कि उसे अमेरिका की ओर से ऐसा कोई आधिकारिक प्रस्ताव नहीं मिला है।

मॉरीशस सरकार ने एक बयान जारी कर कहा कि उसने मीडिया में आई खबरों पर ध्यान दिया है, लेकिन अब तक अमेरिकी प्रशासन ने न तो कोई औपचारिक प्रस्ताव भेजा है और न ही किसी प्रकार की आधिकारिक बातचीत की है। सरकार ने स्पष्ट किया कि डिएगो गार्सिया या पूरे चागोस द्वीपसमूह को लेकर अमेरिका की ओर से कोई संपर्क नहीं किया गया है।

चागोस द्वीपसमूह लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय विवाद का विषय रहा है। इसका सबसे बड़ा द्वीप डिएगो गार्सिया है, जहां अमेरिका का एक महत्वपूर्ण सैन्य अड्डा स्थित है। यह अड्डा हिंद महासागर क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य और रणनीतिक गतिविधियों के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।

ब्रिटेन ने 1960 के दशक में डिएगो गार्सिया को अमेरिका को सैन्य उपयोग के लिए पट्टे पर दिया था। बाद में मॉरीशस ने इस क्षेत्र पर अपना दावा जताया और कहा कि स्वतंत्रता से पहले चागोस द्वीपों को उससे अलग करना गलत था। अंतरराष्ट्रीय न्यायालय और संयुक्त राष्ट्र की कई संस्थाओं ने भी मॉरीशस के दावे का समर्थन किया है।

हाल के वर्षों में ब्रिटेन और मॉरीशस के बीच इस क्षेत्र के भविष्य को लेकर बातचीत चल रही है। इसी बीच अमेरिका द्वारा द्वीप खरीदने की संभावित योजना की खबर सामने आने से चर्चा तेज हो गई थी।

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विशेषज्ञों का मानना है कि डिएगो गार्सिया का सामरिक महत्व बहुत अधिक है। पश्चिम एशिया, अफ्रीका और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सैन्य अभियानों के लिए यह अमेरिका के सबसे महत्वपूर्ण ठिकानों में से एक माना जाता है।

फिलहाल मॉरीशस ने साफ कर दिया है कि उसे अमेरिका की ओर से कोई प्रस्ताव नहीं मिला है। ऐसे में चागोस द्वीपों को लेकर चल रही अटकलों पर फिलहाल विराम लग गया है, लेकिन इस क्षेत्र का भविष्य अंतरराष्ट्रीय राजनीति और कूटनीति का महत्वपूर्ण विषय बना हुआ है।

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