अंतरराष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | रियाद/कुवैत सिटी | 2 जून 2026
पश्चिम एशिया में बढ़ते युद्ध संकट के बीच सऊदी अरब ने ईरान पर अब तक का सबसे तीखा कूटनीतिक हमला बोलते हुए कुवैत पर हुए कथित मिसाइल और ड्रोन हमलों की कड़ी निंदा की है। सऊदी विदेश मंत्रालय ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि ईरान द्वारा कुवैत के खिलाफ किए गए “बार-बार और दुर्भावनापूर्ण हमले” न केवल कुवैत की संप्रभुता का उल्लंघन हैं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र चार्टर की भी खुली अवहेलना हैं।
यह बयान ऐसे समय आया है जब ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने अमेरिकी हमलों के जवाब में कुवैत स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकाने को निशाना बनाने का दावा किया है। कुवैत की वायु रक्षा प्रणाली ने कई मिसाइलों और ड्रोन को इंटरसेप्ट करने की बात कही है, जबकि क्षेत्र में हवाई हमलों के सायरन और सुरक्षा अलर्ट जारी किए गए।
सऊदी अरब ने अपने बयान में स्पष्ट कहा कि कुवैत के खिलाफ किसी भी प्रकार की सैन्य आक्रामकता पूरे खाड़ी क्षेत्र की सुरक्षा और स्थिरता के लिए खतरा है। रियाद ने दोहराया कि वह कुवैत सरकार और वहां की जनता के साथ पूरी एकजुटता से खड़ा है तथा उसकी सुरक्षा, संप्रभुता और राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए उठाए गए हर कदम का समर्थन करेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह केवल कुवैत पर हमला नहीं बल्कि पूरे गल्फ सुरक्षा ढांचे को चुनौती देने वाला घटनाक्रम है। पिछले कुछ महीनों में ईरान, अमेरिका, इज़राइल और उनके सहयोगियों के बीच बढ़ते सैन्य संघर्ष ने खाड़ी क्षेत्र को युद्ध के मुहाने पर ला खड़ा किया है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज, बाब-अल-मंदेब और लेबनान मोर्चे पर बढ़ती तनातनी ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री व्यापार के लिए भी गंभीर खतरा पैदा कर दिया है।
इस बीच खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) के कई सदस्य देशों ने भी ईरानी कार्रवाई की आलोचना की है। कुवैत ने हमले को “खतरनाक उकसावा” बताते हुए ईरान को पूरी तरह जिम्मेदार ठहराया है। क्षेत्रीय पर्यवेक्षकों का कहना है कि यदि ऐसे हमले जारी रहे तो सऊदी अरब, यूएई और अन्य खाड़ी देशों की प्रतिक्रिया और अधिक आक्रामक हो सकती है, जिससे पूरे पश्चिम एशिया में बड़े सैन्य टकराव की आशंका बढ़ जाएगी।
अमेरिका और ईरान के बीच जारी संघर्षविराम वार्ताओं के बावजूद हालात लगातार बिगड़ते दिखाई दे रहे हैं। लेबनान में इज़राइली सैन्य कार्रवाई, होर्मुज जलडमरूमध्य पर तनाव और खाड़ी देशों पर बढ़ते हमलों ने क्षेत्र को अत्यंत संवेदनशील स्थिति में पहुंचा दिया है। ऐसे में सऊदी अरब का यह कड़ा बयान संकेत दे रहा है कि यदि क्षेत्रीय सुरक्षा पर खतरा बढ़ा तो खाड़ी देश अब केवल कूटनीतिक विरोध तक सीमित नहीं रह सकते।




