राष्ट्रीय डेस्क | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 1 जून 2026
सुप्रीम कोर्ट ने मानव तस्करी को मानव शोषण के सबसे भयावह रूपों में से एक बताते हुए कहा है कि इसका गहरा संबंध पलायन (माइग्रेशन) से है। अदालत ने टिप्पणी की कि सम्मानजनक आजीविका की तलाश में शुरू हुई यात्रा अक्सर महिलाओं और बच्चों के लिए शोषण और उत्पीड़न के भयावह जाल में बदल जाती है।
न्यायमूर्ति जे.बी. पारदीवाला और न्यायमूर्ति आर. महादेवन की पीठ ने कहा कि सामाजिक और आर्थिक असमानताएं लोगों को बेहतर जीवन की तलाश में पलायन के लिए मजबूर करती हैं, लेकिन यही परिस्थितियां उन्हें मानव तस्करी के नेटवर्क के लिए आसान शिकार भी बना देती हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि हर पलायन मानव तस्करी नहीं होता, लेकिन अधिकांश मानव तस्करी के मामलों में पलायन की भूमिका किसी न किसी रूप में मौजूद रहती है।
सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि गरीबी, बेरोजगारी, सामाजिक भेदभाव और अवसरों की कमी जैसी परिस्थितियां लोगों को अपने घर छोड़ने पर मजबूर करती हैं। ऐसे में दलाल और तस्कर बेहतर रोजगार, शिक्षा या सुरक्षित जीवन का झांसा देकर विशेष रूप से महिलाओं और बच्चों को अपने जाल में फंसा लेते हैं।
अदालत ने यह भी रेखांकित किया कि स्वेच्छा से वयस्कों द्वारा किए जाने वाले यौन कार्य (सेक्स वर्क) और मानव तस्करी के मामलों में स्पष्ट अंतर किया जाना चाहिए। न्यायालय ने कहा कि यौनकर्मियों के अधिकारों को मानव तस्करी के अपराध से अलग दृष्टिकोण से देखा जाना चाहिए। किसी व्यक्ति के मौलिक अधिकारों की रक्षा और मानव तस्करी के खिलाफ सख्त कार्रवाई, दोनों एक साथ संभव हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने सरकारों और संबंधित एजेंसियों को निर्देश दिया कि वे मानव तस्करी की समस्या को केवल कानून-व्यवस्था के मुद्दे के रूप में न देखें, बल्कि इसे सामाजिक, आर्थिक और प्रवासन संबंधी चुनौतियों से जोड़कर व्यापक रणनीति तैयार करें। अदालत ने कहा कि तस्करी रोकने के लिए रोजगार, शिक्षा, सामाजिक सुरक्षा और सुरक्षित प्रवासन व्यवस्था को मजबूत करना आवश्यक है।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत सहित कई विकासशील देशों में मानव तस्करी की समस्या का मूल कारण आर्थिक असुरक्षा और अवसरों की कमी है। अदालत की यह टिप्पणी नीति-निर्माताओं के लिए महत्वपूर्ण संकेत मानी जा रही है कि केवल गिरफ्तारी और कानूनी कार्रवाई पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन परिस्थितियों को भी बदलना होगा जो लोगों को शोषण के जोखिम की ओर धकेलती हैं।
सुप्रीम कोर्ट की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब देश में मानव तस्करी, बाल श्रम, जबरन यौन शोषण और अवैध श्रम प्रवासन से जुड़े मामलों को लेकर चिंता लगातार बढ़ रही है। अदालत ने संकेत दिया कि मानव तस्करी के खिलाफ लड़ाई तभी सफल हो सकती है जब समाज, सरकार और न्याय व्यवस्था मिलकर इसके मूल कारणों पर काम करें।




