अंतरराष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | सिंगापुर | 31 मई 2026
अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने सिंगापुर में आयोजित प्रतिष्ठित शांग्री-ला डायलॉग सुरक्षा सम्मेलन में इंडो-पैसिफिक क्षेत्र को लेकर अमेरिका की रणनीति स्पष्ट करते हुए कहा कि वाशिंगटन इस क्षेत्र की सुरक्षा और स्थिरता के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है। हालांकि इस बार उनके बयान पिछले वर्ष की तुलना में अपेक्षाकृत नरम रहे और उन्होंने चीन को सीधे तौर पर सबसे बड़ा खतरा बताने से परहेज किया।
हेगसेथ ने विश्व नेताओं, सैन्य अधिकारियों और कूटनीतिज्ञों को संबोधित करते हुए कहा कि इंडो-पैसिफिक क्षेत्र अमेरिका की सुरक्षा और समृद्धि के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि अमेरिका का उद्देश्य इस क्षेत्र में शक्ति संतुलन बनाए रखना और दीर्घकालिक स्थिरता सुनिश्चित करना है।
यह बयान ऐसे समय आया है जब हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच बीजिंग में महत्वपूर्ण शिखर वार्ता हुई थी। बैठक के बाद ट्रंप ने शी जिनपिंग को “महान नेता” बताते हुए दोनों देशों के बीच बेहतर भविष्य की उम्मीद जताई थी। इसी बदलते कूटनीतिक माहौल का असर हेगसेथ के भाषण में भी दिखाई दिया।
अपने संबोधन में हेगसेथ ने कहा कि अमेरिका और चीन के बीच प्रतिस्पर्धा के बावजूद दोनों देशों को रणनीतिक स्थिरता और पारस्परिक सम्मान के आधार पर संबंध विकसित करने चाहिए। उन्होंने कहा कि जहां दोनों देशों के हित मिलते हैं, वहां व्यावहारिक और लाभकारी समझौते संभव हैं।
हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अमेरिका किसी भी स्थिति में इंडो-पैसिफिक क्षेत्र पर किसी एक शक्ति का प्रभुत्व स्वीकार नहीं करेगा। उनके अनुसार चीन की तेजी से बढ़ती सैन्य क्षमता और क्षेत्रीय गतिविधियां कई देशों के लिए चिंता का विषय बनी हुई हैं। उन्होंने कहा कि यदि किसी एक देश का वर्चस्व स्थापित होता है तो इससे पूरे क्षेत्र का संतुलन बिगड़ सकता है।
हेगसेथ ने यह भी दोहराया कि अमेरिका अपने सहयोगी देशों और साझेदारों के साथ मिलकर क्षेत्रीय सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाए रखेगा। उन्होंने कहा कि स्वतंत्र नौवहन, खुला व्यापार और नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था अमेरिका की प्राथमिकताओं में शामिल हैं।
उधर सम्मेलन में मौजूद चीनी प्रतिनिधियों ने भी अमेरिका और चीन के बीच हालिया संवाद का स्वागत किया। चीन के वरिष्ठ सैन्य अधिकारी मेजर जनरल मेंग श्यांगकिंग ने कहा कि ट्रंप और शी जिनपिंग के बीच बनी सहमति आने वाले वर्षों में दोनों देशों के संबंधों को नई दिशा दे सकती है और वैश्विक स्थिरता में योगदान कर सकती है।
विश्लेषकों का मानना है कि हेगसेथ का यह भाषण अमेरिका की दोहरी रणनीति को दर्शाता है। एक ओर वाशिंगटन चीन के साथ टकराव को कम करने की कोशिश कर रहा है, वहीं दूसरी ओर वह अपने सहयोगियों को यह भरोसा भी दिलाना चाहता है कि इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में उसकी सुरक्षा प्रतिबद्धताएं कमजोर नहीं हुई हैं।
शांग्री-ला डायलॉग में दिए गए इस संदेश से यह संकेत मिलता है कि अमेरिका और चीन के बीच प्रतिस्पर्धा जारी रहेगी, लेकिन दोनों देश फिलहाल सीधे टकराव के बजाय संवाद और संतुलन की नीति को प्राथमिकता देते दिखाई दे रहे हैं।




