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ईरान-अमेरिका वार्ता में प्रगति का दावा, लेकिन समझौते पर अभी भी सस्पेंस

अंतरराष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | तेहरान/वॉशिंगटन | 25 मई 2026

ईरान और अमेरिका के बीच जारी कूटनीतिक वार्ता को लेकर बड़ा बयान सामने आया है। ईरान ने दावा किया है कि दोनों देशों के बीच कई अहम मुद्दों पर “समझ” बन चुकी है, लेकिन अंतिम समझौता अभी करीब नहीं है। तेहरान ने साफ संकेत दिए हैं कि प्रतिबंधों, परमाणु कार्यक्रम और होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर अब भी गंभीर मतभेद बने हुए हैं।

ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता एस्माइल बकाई ने कहा कि वार्ता में कई मुद्दों पर सकारात्मक प्रगति हुई है और बड़ी संख्या में विवादित बिंदुओं पर सहमति बनने लगी है। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि “समझौता तुरंत होने वाला नहीं है” और कई संवेदनशील मुद्दों पर बातचीत अभी जारी है।

दरअसल, मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव और ईरान युद्ध की आशंकाओं के बीच अमेरिका और ईरान के बीच बैकचैनल बातचीत तेज हुई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, दोनों पक्ष युद्धविराम, समुद्री व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति को सामान्य करने के लिए संभावित ढांचे पर चर्चा कर रहे हैं।

सबसे बड़ा विवाद होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बना हुआ है। ईरान ने हाल ही में वहां से गुजरने वाले जहाजों पर “नेविगेशनल सर्विस फीस” लगाने की बात कही थी, जिससे वैश्विक तेल बाजार में हलचल बढ़ गई थी। वहीं अमेरिका और पश्चिमी देशों ने इसे अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार पर दबाव बनाने की कोशिश बताया है।

इसके अलावा ईरान के परमाणु कार्यक्रम और अमेरिकी प्रतिबंधों को हटाने का मुद्दा भी वार्ता की सबसे बड़ी बाधा बना हुआ है। ईरान चाहता है कि उस पर लगे आर्थिक प्रतिबंध हटाए जाएं, जबकि अमेरिका परमाणु गतिविधियों पर कड़े नियंत्रण और अंतरराष्ट्रीय निगरानी की मांग कर रहा है।

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राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर दोनों देशों के बीच कोई बड़ा समझौता होता है तो इसका असर सिर्फ मध्य-पूर्व ही नहीं, बल्कि पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था और तेल बाजार पर पड़ेगा। खासकर कच्चे तेल की कीमतों और अंतरराष्ट्रीय सप्लाई चेन पर इसका सीधा प्रभाव देखने को मिल सकता है।

फिलहाल दुनिया की नजर तेहरान और वॉशिंगटन के बीच चल रही इस संवेदनशील कूटनीतिक कवायद पर टिकी हुई है, क्योंकि यह वार्ता आने वाले समय में मध्य-पूर्व की राजनीति और वैश्विक शक्ति संतुलन की दिशा तय कर सकती है।

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