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युवाओं में नशे के बढ़ते खतरे पर केंद्र सख्त, Pregabalin दवा को Schedule H1 में डाला गया

स्वास्थ्य | महेंद्र सिंह | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 22 मई 2026

देश में युवाओं के बीच दवाओं के दुरुपयोग को लेकर बढ़ती चिंता के बीच केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने दर्द और न्यूरोलॉजिकल बीमारियों के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवा Pregabalin को अब Drugs Rules 1945 के Schedule H1 में शामिल कर दिया है। सरकार का यह फैसला विभिन्न राज्यों से लगातार मिल रही उन रिपोर्टों के बाद आया है, जिनमें इस दवा के नशे और अवैध इस्तेमाल की बात सामने आई थी।

स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा जारी गजट नोटिफिकेशन के अनुसार Pregabalin अब उन दवाओं की श्रेणी में शामिल होगी जिनकी बिक्री और उपयोग पर सख्त निगरानी रखी जाएगी। इस दवा का इस्तेमाल आमतौर पर क्रॉनिक पेन, न्यूरोपैथी, फाइब्रोमायल्जिया और कुछ न्यूरोलॉजिकल बीमारियों के इलाज में किया जाता है। लेकिन हाल के वर्षों में इसके Sedative, Euphoric और Dissociative प्रभावों के कारण युवाओं में इसका दुरुपयोग तेजी से बढ़ा है।

सरकारी सूत्रों के मुताबिक कई राज्यों में Pregabalin की अवैध जमाखोरी और बिना डॉक्टर की पर्ची के बिक्री के मामले सामने आए थे। पुलिस और ड्रग कंट्रोल एजेंसियों ने कई जगहों पर बड़ी मात्रा में इस दवा को जब्त भी किया है। जांच में पता चला कि कुछ लोग इस दवा को नशे के विकल्प के रूप में इस्तेमाल कर रहे थे, जिससे मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ रहा था।

Schedule H1 में शामिल होने के बाद अब Pregabalin की बिक्री केवल पंजीकृत डॉक्टर के प्रिस्क्रिप्शन पर ही की जा सकेगी। मेडिकल स्टोर्स को इसकी बिक्री का पूरा रिकॉर्ड रखना होगा और नियमों का उल्लंघन करने पर कड़ी कार्रवाई की जा सकती है। सरकार का मानना है कि इससे दवा के अनियंत्रित उपयोग और काले बाजार पर रोक लगाने में मदद मिलेगी।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने सरकार के इस कदम का स्वागत किया है। उनका कहना है कि Pregabalin जैसी दवाओं का लंबे समय तक गलत इस्तेमाल व्यक्ति को मानसिक निर्भरता, भ्रम, सुस्ती और गंभीर न्यूरोलॉजिकल समस्याओं की ओर धकेल सकता है। कई मामलों में यह दवा अन्य नशीले पदार्थों के साथ मिलाकर भी इस्तेमाल की जा रही थी, जिससे खतरा और बढ़ गया था।

विशेषज्ञों के अनुसार भारत में प्रिस्क्रिप्शन ड्रग्स के दुरुपयोग का संकट धीरे-धीरे गंभीर रूप ले रहा है। पहले कोडीन सिरप, ट्रामाडोल और कुछ एंटी-एंग्जायटी दवाओं के दुरुपयोग के मामले सामने आए थे, और अब Pregabalin को लेकर भी सरकार को सख्ती करनी पड़ी है। डॉक्टरों का कहना है कि मरीजों को ऐसी दवाओं का सेवन केवल विशेषज्ञ सलाह और निर्धारित मात्रा में ही करना चाहिए।

केंद्र सरकार का यह कदम ऐसे समय आया है जब देशभर में नशे के खिलाफ अभियान तेज किया जा रहा है। स्वास्थ्य मंत्रालय और ड्रग कंट्रोल विभाग अब राज्यों के साथ मिलकर मेडिकल स्टोर्स, सप्लाई चैन और ऑनलाइन बिक्री पर भी नजर रखने की तैयारी कर रहे हैं।

विश्लेषकों का मानना है कि यदि समय रहते इस तरह की दवाओं पर नियंत्रण नहीं किया जाता, तो युवाओं में प्रिस्क्रिप्शन ड्रग एडिक्शन एक बड़े सामाजिक और स्वास्थ्य संकट का रूप ले सकता है। ऐसे में Pregabalin को Schedule H1 में शामिल करना केवल प्रशासनिक फैसला नहीं, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य सुरक्षा की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है

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