न्यायपालिका | सुमन कुमार | ABC NATIONAL NEWS | चेन्नई | 22 मई 2026
मद्रास हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में कहा है कि अगर मां अपने बेटे को किडनी दान करना चाहती है, तो उसे अपना रिश्ता साबित करने के लिए DNA टेस्ट करवाने की जरूरत नहीं है। अदालत ने कहा कि जन्म प्रमाणपत्र, आधार कार्ड और PAN कार्ड जैसे सरकारी दस्तावेज ही पर्याप्त हैं। मामला पश्चिम बंगाल के हावड़ा निवासी रीता चौरसिया और उनके बेटे रोहित कुमार चौरसिया से जुड़ा था। दोनों चेन्नई के एक अस्पताल में किडनी ट्रांसप्लांट करवाना चाहते थे, लेकिन प्रक्रिया के दौरान DNA टेस्ट की मांग की गई थी।
जस्टिस जी.आर. स्वामीनाथन ने कहा कि हर मामले में DNA टेस्ट की शर्त लगाना सही नहीं है। अगर सरकारी दस्तावेजों से मां-बेटे का रिश्ता साफ साबित हो रहा है, तो अतिरिक्त जांच की जरूरत नहीं होनी चाहिए। अदालत ने यह भी कहा कि ऐसी अनावश्यक प्रक्रियाएं मरीज और परिवार पर मानसिक और आर्थिक बोझ डालती हैं।
हाईकोर्ट के इस फैसले को आम लोगों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि इससे भविष्य में अंगदान और ट्रांसप्लांट की प्रक्रिया आसान हो सकेगी और मरीजों को इलाज में बेवजह देरी का सामना नहीं करना पड़ेगा।




