अर्थव्यवस्था / RBI / केंद्र सरकार | सुनील कुमार सिंह | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 22 मई 2026
पश्चिम एशिया में जारी युद्ध, कच्चे तेल की आसमान छूती कीमतों और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने केंद्र सरकार को बड़ी राहत देते हुए वित्त वर्ष 2025-26 के लिए रिकॉर्ड 2.87 लाख करोड़ रुपये के सरप्लस ट्रांसफर यानी डिविडेंड देने का ऐलान किया है। यह अब तक का सबसे बड़ा डिविडेंड ट्रांसफर माना जा रहा है और ऐसे समय आया है जब भारत समेत पूरी दुनिया ऊर्जा संकट, महंगाई और वैश्विक बाजारों में भारी उतार-चढ़ाव का सामना कर रही है। RBI के केंद्रीय निदेशक मंडल की 623वीं बैठक में यह फैसला लिया गया, जिसकी अध्यक्षता गवर्नर संजय मल्होत्रा ने की।
इस रिकॉर्ड डिविडेंड ने सरकार को बड़ा वित्तीय सहारा दिया है, क्योंकि मौजूदा समय में तेल की बढ़ती कीमतों के कारण भारत का आयात बिल तेजी से बढ़ रहा है। ईरान संकट और होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव ने ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ा दी है। इसका असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर भी साफ दिखाई दे रहा है। रुपया डॉलर के मुकाबले कमजोर हुआ है, विदेशी निवेशकों की बिकवाली तेज हुई है और बॉन्ड यील्ड लगातार ऊपर जा रही है। ऐसे माहौल में RBI का यह भुगतान सरकार के लिए एक “राजकोषीय सुरक्षा कवच” की तरह देखा जा रहा है।
RBI की बैलेंस शीट में इस वर्ष भारी विस्तार दर्ज किया गया। 31 मार्च 2026 तक केंद्रीय बैंक की बैलेंस शीट बढ़कर लगभग 92 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गई, जो पिछले वर्ष की तुलना में 20.61 प्रतिशत अधिक है। केंद्रीय बैंक की कुल आय में भी 26 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई। विशेषज्ञों के अनुसार डॉलर में कमजोरी, सोने की कीमतों में तेज उछाल और विदेशी मुद्रा भंडार के बेहतर प्रबंधन ने RBI की कमाई को रिकॉर्ड स्तर तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई।
दरअसल, RBI की कमाई कई स्रोतों से होती है। विदेशी मुद्रा भंडार पर रिटर्न, सरकारी बॉन्ड में निवेश, करेंसी प्रबंधन और बैंकिंग सिस्टम में लिक्विडिटी संचालन से केंद्रीय बैंक को बड़ी आय होती है। इस बार विदेशी मुद्रा हस्तक्षेप और निवेश से हुए मुनाफे ने रिकॉर्ड सरप्लस ट्रांसफर का रास्ता साफ किया। इसके अलावा डॉलर में करीब 10 प्रतिशत गिरावट और सोने की कीमतों में लगभग 60 प्रतिशत उछाल ने RBI की अकाउंटिंग कमाई को और मजबूत किया।
हालांकि RBI ने रिकॉर्ड डिविडेंड देने के साथ-साथ अपने जोखिम सुरक्षा फंड यानी Contingent Risk Buffer (CRB) को भी मजबूत बनाए रखा है। केंद्रीय बोर्ड ने CRB में 1.09 लाख करोड़ रुपये ट्रांसफर करने की मंजूरी दी और इसे बैलेंस शीट के 6.5 प्रतिशत स्तर पर बनाए रखने का फैसला किया। इसका मतलब यह है कि RBI ने केवल सरकार को पैसा देने पर ही जोर नहीं दिया, बल्कि अपनी वित्तीय मजबूती और भविष्य के जोखिमों को ध्यान में रखते हुए संतुलन भी बनाए रखा।
इस बीच RBI ने अपनी मासिक “स्टेट ऑफ द इकॉनमी” रिपोर्ट में यह भी चेतावनी दी है कि भारत की घरेलू मांग अभी आर्थिक विकास को मजबूती दे रही है, लेकिन पश्चिम एशिया संकट के कारण आपूर्ति पक्ष पर दबाव बढ़ रहा है। केंद्रीय बैंक ने कहा कि महंगाई फिलहाल नियंत्रण सीमा के भीतर है, लेकिन तेल और ऊर्जा कीमतों में बढ़ोतरी का असर आने वाले महीनों में बाजार पर दिखाई दे सकता है। यानी एक तरफ अर्थव्यवस्था मांग के दम पर आगे बढ़ रही है, वहीं दूसरी तरफ वैश्विक संकट भविष्य की चुनौतियों का संकेत दे रहा है।
अर्थशास्त्रियों का मानना है कि यह रिकॉर्ड डिविडेंड सरकार को वित्तीय घाटा नियंत्रित रखने, सब्सिडी प्रबंधन और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में खर्च जारी रखने में मदद करेगा। हालांकि कई विशेषज्ञ यह भी कह रहे हैं कि केवल RBI के सरप्लस के भरोसे अर्थव्यवस्था को लंबे समय तक संभालना संभव नहीं है। सरकार को टैक्स संग्रह बढ़ाने, निवेश आकर्षित करने और खर्च की गुणवत्ता सुधारने पर भी गंभीरता से काम करना होगा।
फिलहाल इतना तय है कि युद्ध और आर्थिक अनिश्चितताओं के इस दौर में RBI का यह रिकॉर्ड डिविडेंड केंद्र सरकार के लिए बड़ी राहत बनकर सामने आया है। लेकिन साथ ही यह भी साफ संकेत है कि वैश्विक संकट का असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर लगातार मंडरा रहा है और आने वाले महीनों में आर्थिक प्रबंधन सरकार और RBI दोनों के लिए बड़ी चुनौती बना रह सकता है।




