अंतरराष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 17 मई 2026
100 नेपाली रुपये से ज्यादा सामान पर कस्टम ड्यूटी के फैसले पर लगी रोक, सीमा क्षेत्रों में लोगों ने जताई थी नाराजगी
नेपाल के सुप्रीम कोर्ट ने भारत से आने वाले सामान पर 100 नेपाली रुपये से अधिक मूल्य होने पर कस्टम ड्यूटी वसूलने के बालेन शाह सरकार के फैसले पर फिलहाल रोक लगा दी है। अदालत के इस फैसले को नेपाल सरकार के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है, क्योंकि हाल ही में लागू किए गए इस नियम को लेकर सीमा क्षेत्रों में भारी विरोध और जनआक्रोश देखने को मिला था।
नेपाल मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट की संयुक्त पीठ — न्यायाधीश हरि प्रसाद फुयाल और टेक प्रसाद धुंगाना — ने प्रधानमंत्री कार्यालय, मंत्रिपरिषद, वित्त मंत्रालय और संबंधित सरकारी एजेंसियों को निर्देश दिया कि अंतिम फैसला आने तक इस विवादित प्रावधान को लागू न किया जाए। अदालत ने साफ किया कि मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए फिलहाल पुराने नियमों की स्थिति बरकरार रखी जाएगी।
दरअसल, नेपाल सरकार ने हाल ही में सीमा पार से आने वाले यात्रियों पर सख्ती बढ़ाते हुए यह नियम लागू किया था कि भारत से नेपाल आने वाला कोई भी व्यक्ति यदि 100 नेपाली रुपये से अधिक मूल्य का सामान लेकर आता है तो उसे कस्टम ड्यूटी देनी होगी। सरकार का तर्क था कि यह कदम अनौपचारिक व्यापार और तस्करी रोकने के लिए उठाया गया है। हालांकि यह फैसला आते ही नेपाल के सीमावर्ती इलाकों में लोगों ने इसका विरोध शुरू कर दिया था।
नेपाल के कई व्यापारिक संगठनों, स्थानीय नागरिकों और सामाजिक समूहों ने आरोप लगाया कि यह नियम आम लोगों के लिए परेशानी पैदा करेगा। खासकर भारत-नेपाल सीमा से लगे क्षेत्रों में रहने वाले परिवारों की रोजमर्रा की जरूरतें दोनों देशों के बीच आवाजाही पर निर्भर रहती हैं। ऐसे में छोटे-मोटे घरेलू सामान पर भी टैक्स लगाना लोगों के लिए अतिरिक्त आर्थिक बोझ बन सकता था।
इसी मुद्दे को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई थी। याचिकाकर्ताओं ने अदालत में दावा किया कि सरकार का यह निर्णय नेपाल के कस्टम एक्ट 2081 के कई प्रावधानों के खिलाफ है, विशेष रूप से उन नियमों के खिलाफ जिनमें कुछ वस्तुओं और व्यक्तिगत उपयोग के सामान को छूट देने की व्यवस्था है। अदालत ने प्रारंभिक सुनवाई के बाद सरकार के आदेश पर रोक लगाने का फैसला सुनाया।
इस मामले पर भारत सरकार भी नजर बनाए हुए थी। पिछले महीने भारत के विदेश मंत्रालय ने कहा था कि नेपाल द्वारा लागू किया गया यह नियम कोई नया कानून नहीं, बल्कि पहले से मौजूद प्रावधानों के सख्त क्रियान्वयन का हिस्सा है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने स्पष्ट किया था कि नेपाल सरकार का उद्देश्य मुख्य रूप से अवैध व्यापार और तस्करी को रोकना है और व्यक्तिगत या घरेलू उपयोग के सामान ले जाने वाले आम नागरिकों को परेशान नहीं किया जाएगा।
हालांकि जमीनी स्तर पर हालात अलग दिखाई दिए। सीमा क्षेत्रों में कई यात्रियों और स्थानीय व्यापारियों ने आरोप लगाया कि अधिकारियों द्वारा नियमों की सख्ती से जांच की जा रही थी, जिससे लोगों को परेशानी हो रही थी। सोशल मीडिया पर भी नेपाल सरकार के फैसले को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मामला केवल कस्टम ड्यूटी तक सीमित नहीं है, बल्कि भारत-नेपाल के पारंपरिक सामाजिक और आर्थिक रिश्तों से भी जुड़ा हुआ है। दोनों देशों के बीच खुली सीमा व्यवस्था दशकों से मौजूद है और लाखों लोग रोजाना दोनों तरफ आवाजाही करते हैं। ऐसे में किसी भी सख्त सीमा नियम का सीधा असर आम नागरिकों और छोटे व्यापारियों पर पड़ता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला फिलहाल लोगों को राहत देने वाला माना जा रहा है, लेकिन अंतिम निर्णय आने तक यह मुद्दा नेपाल की राजनीति और प्रशासन के लिए चुनौती बना रह सकता है। वहीं सीमा क्षेत्रों में रहने वाले लोग अब अदालत के अंतिम फैसले का इंतजार कर रहे हैं।




